'लू से बचना है तो पिएं कुत्ते के मांस का सूप', उत्तर कोरिया की किम जोंग सरकार की सलाह से दुनिया हैरान

उत्तर कोरिया में जारी भीषण गर्मी और 40 डिग्री से अधिक के तापमान के बीच किम जोंग उन सरकार की एक अजीबोगरीब सलाह चर्चा में आ गई है। भुखमरी और कड़े नियमों के लिए जाने जाने वाले इस देश के सरकारी मीडिया 'रोडोंग सिनमुन' ने नागरिकों को लू से बचने के लिए 'डॉग मीट सूप' पीने का सुझाव दिया है।

उत्तर कोरिया की किम जोंग सरकार की सलाह से दुनिया हैरान | Image: Social Media

उत्तर कोरिया इन दिनों भीषण गर्मी और लू की चपेट में है। देश के कई हिस्सों में पारा 35 से 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है, जिससे आम जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। इस आपदा से निपटने के लिए किम जोंग उन सरकार और स्थानीय स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने नागरिकों को अपने आहार में बदलाव करने के निर्देश दिए हैं। 

डॉक्टरों की अजीब सलाह लू से बचने के लिए पिएं 'डॉग मीट सूप'

उत्तर कोरिया के समाचार पत्र 'रोडोंग सिनमुन' की एक रिपोर्ट के अनुसार, प्योंगयांग जनरल अस्पताल के डॉक्टरों ने नागरिकों को लू से बचाव के उपाय बताए हैं। डॉक्टरों का दावा है कि तेज गर्मी से हृदय रोग, डायबिटीज और थायराइड के मरीजों की स्थिति बिगड़ सकती है। इससे बचने के लिए उन्होंने तरबूज और खीरे के साथ-साथ 'डांगोगी गुक' यानी कि डॉग मीट सूप पीने की सलाह दी है।

साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के मुताबिक, उत्तर कोरिया सरकार कुत्ते के मांस को अपनी पारंपरिक संस्कृति का अहम हिस्सा मानती है। राजधानी प्योंगयांग में ताएदोंग नदी के किनारे इसके विशेष सरकारी रेस्तरां चलाए जाते हैं और इसे लोकप्रिय बनाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कुकिंग प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाती हैं।

1980 के दशक में क्यों बदला गया इस सूप का नाम?

एक रिपोर्ट के अनुसार, कोरियाई प्रायद्वीप में कुत्ते का मांस खाने की परंपरा काफी पुरानी है। 1980 के दशक में उत्तर कोरिया के संस्थापक किम इल संग ने एक विशेष आदेश जारी कर डॉग मीट सूप का नाम बदलकर 'डांगोगी' रख दिया था, जिसका शाब्दिक अर्थ 'मीठा मांस' होता है। यह फैसला इसलिए लिया गया था ताकि देश में आने वाले विदेशी पर्यटकों और राजनयिकों को इसका वास्तविक नाम सुनकर किसी तरह की असहजता न हो।

आम जनता की पहुंच से बाहर हुआ सूप 

सरकार भले ही भीषण गर्मी से बचने के लिए डॉग मीट सूप पीने की सलाह दे रही हो, लेकिन वास्तविकता यह है कि उत्तर कोरिया की आम जनता इसे खरीदने में पूरी तरह असमर्थ है। 1990 के दशक के भीषण अकाल से पहले तक, एक कुत्ते की कीमत लगभग 150 से 300 उत्तर कोरियाई वॉन हुआ करती थी और आम लोग इसे आसानी से खरीद लेते थे।

ये भी पढ़ें - UPI Transaction New Rule: 2000 रुपये के ज्यादा UPI पेमेंट पर क्या अब देना होगा चार्ज? जानिए नए नियम

 

Published By : Aarya Pandey

पब्लिश्ड 5 August 2026 at 22:23 IST