दिसंबर में चरम पर होगा अल-नीनो...बदल सकता है बारिश और तापमान का पैटर्न, क्या इस बार नहीं पड़ेगी ठंड?

दिसंबर तक अल-नीनो अपने सबसे प्रभावकारी और मजबूत स्तर पर पहुंच सकता है। प्रशांत महासागर के सतह के तापमान में असामान्य बढ़ोतरी से पुराने सभी रिकॉर्ड टूटने की संभावना जताई जा रही है।

दिसंबर में चरम पर होगा अल-नीनो...बदल सकता है बारिश और तापमान का पैटर्न, क्या इस बार नहीं पड़ेगी ठंड? | Image: Meta AI

दुनिया के मौसम पर अल-नीनो का असर लगातार गहराता जा रहा है। प्रशांत महासागर में समुद्र का तापमान तेजी से बढ़ रहा है, जिसके दिसंबर 2026 तक रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने की आशंका है। इसके प्रभाव से वैश्विक स्तर पर तापमान में भारी वृद्धि और वर्षा के पैटर्न में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के अनुसार, इस बार का अल-नीनो इतिहास के सबसे ताकतवर रूपों में से एक हो सकता है और फरवरी 2027 तक इसका प्रभाव बना रह सकता है।

नीनो 3.4 इंडेक्स और रिकॉर्ड तोड़ तापमान

वैज्ञानिक अल-नीनो की तीव्रता का आकलन करने के लिए प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से के तापमान की निगरानी करते हैं, जिसे 'नीनो 3.4 इंडेक्स' कहा जाता है। आंकड़ों के अनुसार, इस क्षेत्र का तापमान सामान्य से काफी ऊपर चल रहा है। जून 2026 में यह तापमान सामान्य से 1.6 डिग्री सेल्सियस अधिक था।

अगस्त तक यह बढ़कर 2.5 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया

अक्टूबर से दिसंबर के बीच इसके सामान्य से करीब 3.7 डिग्री सेल्सियस तक अधिक रहने का अनुमान है, जो अब तक का एक नया रिकॉर्ड होगा। इससे पहले नवंबर 2015 से जनवरी 2016 के दौरान तापमान में 2.6 डिग्री सेल्सियस की अधिकतम बढ़ोतरी दर्ज की गई थी।

क्या भारत में कम होगी ठंड?

अल-नीनो के कारण समुद्र और वायुमंडल के बीच ऊष्मा का संतुलन बदल जाता है, जिससे दुनिया भर में मौसम प्रभावित होता है। हालांकि, इसका असर हर क्षेत्र में एक जैसा नहीं होता। भारत में इस बार सर्दी कम पड़ेगी या ज्यादा, इसका सीधा अनुमान केवल अल-नीनो के आधार पर नहीं लगाया जा सकता। इसके लिए देश के विभिन्न हिस्सों के स्थानीय तापमान और मौसम संबंधी पूर्वानुमानों को देखना होगा। फिलहाल मौसम एजेंसियों के अनुसार ऐसा कोई संकेत नहीं है कि भारत में इस बार सर्दी का असर कमजोर रहेगा।

October 9, 2026

हिंद महासागर और जलवायु पैटर्न

प्रशांत महासागर के अलावा हिंद महासागर का तापमान भी वैश्विक मौसम को तय करने में अहम भूमिका निभाता है। 'इंडियन ओशन डाइपोल' (IOD) नामक जलवायु पैटर्न आसपास के क्षेत्रों में मानसूनी बारिश को प्रभावित करता है। इसके अक्टूबर में अपने सबसे मजबूत स्तर पर पहुंचने और फिर धीरे-धीरे कमजोर होने की उम्मीद है। इसके अलावा, भूमध्यरेखीय अटलांटिक महासागर का तापमान भी सामान्य से अधिक रहने का अनुमान है।

वैश्विक चुनौतियां और चेतावनी

संयुक्त राष्ट्र और WMO ने चेतावनी दी है कि बढ़ते तापमान और वर्षा के बदलते चक्र के कारण दुनिया भर के कई हिस्सों में गंभीर सूखा, भारी बाढ़ और पारिस्थितिक व आर्थिक संकट का खतरा बढ़ सकता है। फरवरी 2027 तक इसके प्रभाव बने रहने की लगभग पूरी संभावना है, जिसके चलते आने वाले महीनों में कृषि, जल संसाधन और आम जनजीवन पर इसके दूरगामी परिणाम देखने को मिल सकते हैं।

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Published By : Aarya Pandey

पब्लिश्ड 10 October 2026 at 18:59 IST