अपडेटेड 22 January 2026 at 23:49 IST

NATO महासचिव ने क्या पिलाई घुट्टी? डोनाल्ड ट्रंप ने यूरोपियन यूनियन पर ट्रैरिफ लगाने से लिया यू-टर्न, ग्रीनलैंड विवाद हो गया खत्म?

बैठक के बाद ट्रंप ने ऐलान किया कि उन्होंने रुट्टे के साथ मिलकर भविष्य के समझौते का एक फ्रेमवर्क तय किया है और यह ग्रीनलैंड और व्यापक आर्कटिक क्षेत्र में NATO सहयोग को मजबूत करेगा। उन्होंने यूरोपीय देशों पर लगने वाले टैरिफ की धमकी वापस ले ली।

Trump Withdraws Tariff Threats Deal With NATO Chief on Greenland | Image: AP

Donald Trump news: ग्रीनलैंड विवाद के बीच दावोस में वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और NATO महासचिव मार्क रुट्टे की मुलाकात ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति को एक बड़ा मोड़ ला दिया। कुछ दिन पहले तक यूरोपीय देशों पर सख्त रुख अपना के तेवर अब नरम पड़ गए हैं। रुट्टे के साथ बंद कमरों में हुई बातचीत ने सब कुछ बदल दिया।

बदल गए ट्रंप के सुर

पहले ट्रंप ने ग्रीनलैंड मामले में उनका समर्थन न करने पर डेनमार्क समेत 8 यूरोपीय देशों पर 10% टैरिफ लगाने की धमकी दी थी, जो 1 फरवरी से लागू होने वाला था। नाटो महासचिव संग बैठक के बाद ट्रंप ने अचानक टैरिफ की धमकी वापस ले ली और घोषणा की कि वे NATO के साथ ग्रीनलैंड और पूरे आर्कटिक क्षेत्र की सुरक्षा पर एक भविष्य के समझौते का फ्रेमवर्क तैयार कर चुके हैं।

नाटो महासचिव संग बैठक और लिया यू-टर्न

स्विट्जरलैंड के दावोस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और NATO के महासचिव मार्क रुट्टे ने वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के दौरान द्विपक्षीय बैठक हुई। इस मुलाकात के बाद ट्रंप यूरोप और नाटो को लेकर वो थोड़े-थोड़े शांत नजर आए। ट्रंप यूरोपीय देशों पर 10 फीसदी टैरिफ से भी पीछे हटे।

उनकी बैठक में बातचीत का केंद्र ग्रीनलैंड विवाद नहीं था। बताया गया कि इस मुलाकात में ग्रीनलैंड की संप्रभुता या डेनमार्क से अलग करने के मुद्दा को नहीं उठाया गया। दोनों नेताओं ने मुलाकात के दौरान आर्कटिक के बढ़ते वैश्विक तनाव, रूस-चीन के बीच बढ़ती गतिविधियों और NATO सहयोग पर ध्यान केंद्रित करना शामिल रहा।

बैठक के बाद ट्रंप ने ऐलान किया कि उन्होंने रुट्टे के साथ मिलकर भविष्य के समझौते का एक फ्रेमवर्क तय किया है और यह ग्रीनलैंड और व्यापक आर्कटिक क्षेत्र में NATO सहयोग को मजबूत करेगा। उन्होंने इस समझौते को अमेरिका और NATO देशों दोनों के हित में बताया। उन्होंने यूरोपीय देशों पर लगने वाले टैरिफ की धमकी वापस ले ली।

उन्होंने कहा कि वो यूरोपीय देशों पर 1 फरवरी से 10 फीसदी टैरिफ को लगाना नहीं चाहते। वे ग्रीनलैंड पर नियंत्रण की बात नहीं मानने पर टैरिफ की धमकी दे रहे थे। साथ ही ट्रंप ने यह भी कहा कि वे सेना का इस्तेमाल नहीं करेंगे और वो परिस्थितियों को कूटनीति से संभालना चाहते हैं।

NATO महासचिव ने क्या पिलाई घुट्टी?

इस बैठक के बाद ट्रंप के नरम पड़े तेवर को देख नाटो महासचिव रुट्टे को अंतरराष्ट्रीय मीडिया में "ट्रंप व्हिस्परर" (Trump Whisperer) का खिताब मिलने लगा। क्योंकि उन्होंने ट्रंप के आक्रामक और अप्रत्याशित अंदाज को बिना किसी सार्वजनिक विवाद या टकराव के शांत कर दिया।

जहां ट्रंप के बयानों और उनकी धमकियों का अन्य यूरोपीय नेता खुले मंच पर विरोध जता रहे थे, तो वहीं रुट्टे ने बंद रूम में निजी बातचीत में समझाया। उन्होंने ट्रंप को बताया कि कैसे आर्कटिक की सुरक्षा NATO के साझा हित में है और इससे ट्रंप कमजोर नहीं बल्कि मजबूत, दूरदर्शी नेता के रूप में उभरेंगे।

इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने न सिर्फ टैरिफ से कदम पीछे खींचे, बल्कि NATO के साथ सहयोग का रास्ता अपनाया। रुट्टे का यह चुपचाप लेकिन प्रभावी ढंग से ट्रंप को प्रभावित करना उनकी कूटनीतिक कुशलता को दिखाता है।

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Published By : Ruchi Mehra

पब्लिश्ड 22 January 2026 at 23:49 IST