Iran Israel War: होर्मुज स्ट्रेट को बिना खुलवाए अमेरिका कर देगा युद्ध खत्म होने का ऐलान? ट्रंप ने दिया संकेत- अमेरिकी मीडिया का बड़ा दावा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कथित तौर पर होर्मुज स्ट्रेट को खुलवाने की अपनी जिद छोड़ दी है। वह इस समुद्री गलियारे में दखल से पीछे हटते हुए युद्ध खत्म करने को तैयार हो गए हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कथित तौर पर होर्मुज स्ट्रेट को खुलवाने की अपनी जिद छोड़ दी है। वह इस समुद्री गलियारे में दखल से पीछे हटते हुए युद्ध खत्म करने को तैयार हो गए हैं। वॉल स्ट्रीट जर्नल ने डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों के हवाले से बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने सहयोगियों से कहा है कि वह ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान खत्म करने को तैयार हैं, भले ही होर्मुज जलडमरूमध्य बंद रहे।
ट्रंप ने कहा कि इस समुद्री गलियारे को फिर से खोलने के जटिल अभियान को फिलहाल छोड़ देंगे। रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रंप और उनके सहयोगियों का मानना है कि दुनिया के लिए ज़रूरी तेल सप्लाई वाले समुद्री रास्ते को खोलने की कोशिश से ईरान के साथ जंग लंबी खिंच सकती है।
ट्रंप ने इस जंग को खत्म करने के लिए 4 से 6 हफ्ते का समय तय किया था, लेकिन इस मिशन की वजह से जंग इस समय से ज्यादा आगे बढ़ सकती है। न्यूज एजेंसी सिन्हुआ ने अधिकारियों के हवाले से बताया कि ट्रंप ने फैसला किया कि अमेरिका को ईरान की नेवी और मिसाइल स्टॉक को कमजोर करने के अपने मुख्य मकसद को पाने पर ध्यान देना चाहिए। तेहरान पर स्ट्रेट के जरिए ट्रेड के फ्री फ्लो को फिर से शुरू करने के लिए डिप्लोमैटिक दबाव डालना चाहिए।
पर इजरायल नहीं है युद्ध खत्म करने को तैयार
एक तरफ अमेरिका युद्ध खत्म करने और ईरान के साथ सकारात्मक वार्ता की बातें कर रहा है तो वहीं इजरायली प्रधानमंत्री बैंजामिन नेतन्ययाहू ने सीधा कहा है कि वह युद्ध खत्म करने की कोई तारीख नहीं बता सकते हैं। इजरायल लगातार ईरान और लेबनान पर हमले कर रहा है। नेतन्याहू ने कहा कि उन्होंने आधा रास्ता तय कर लिया है लेकिन युद्ध के शेड्यूल का ऐलान नहीं किया जा सकता है।
तेल की आपूर्ति में समस्या बनी रहेगी
होर्मुज पूरी तरह न खुलने पर खाड़ी देशों का तेल बाहर नहीं निकल पाएगा। ऑप्शनल रास्ते (जैसे पाइपलाइन) बहुत कम कैपेसिटी के हैं। इससे दुनिया में तेल की कमी बनी रह सकती है। एशियाई देश सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे क्योंकि वे 80-85% तेल इसी रास्ते से आयात करते हैं।
भारत पर खास असर
भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है। हमारा बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है। अगर होर्मुज नहीं खुला तो तेल महंगा होने से आम बजट पर बोझ बढ़ेगा। सरकार को सब्सिडी देनी पड़ सकती है या पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं। इससे महंगाई बढ़ेगी और अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा।
अगर ट्रंप होर्मुज खोले बिना युद्ध खत्म करते हैं तो तेल की कीमतें अभी भी ऊंची रह सकती हैं और आपूर्ति में दिक्कत बनी रहेगी। भारत जैसे देशों को महंगाई और आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ सकता है। पूरी राहत तभी मिलेगी जब होर्मुज स्ट्रेट फिर से सामान्य रूप से खुल जाए। अभी बाजार स्ट्रैटजी और सहयोगी देशों की कार्रवाई पर नजर रखे हुए हैं।
Published By : Ankur Shrivastava
पब्लिश्ड 31 March 2026 at 17:32 IST