अपडेटेड 15 January 2026 at 17:19 IST

ट्रंप के साथ मुनीर की गलबहियां वाला हथकंडा भी नहीं आया काम, पाकिस्तानियों के लिए वीजा पर भी अमेरिका ने लगा दी रोक, क्या करेंगे शहबाज?

अमेरिका ने 75 देशों के लिए 21 जनवरी से वीजा जारी करने की पूरी प्रोसेस रोकने का फैसला किया है। इसमें पाकिस्तान और बांग्लादेश समेत भारत के 6 पड़ोसी देश हैं।

Trump Met Pak Army Chief Asim Munir at the White House | Image: AP, Republic

अमेरिका ने 75 देशों के लिए 21 जनवरी से वीजा जारी करने की पूरी प्रोसेस रोकने का फैसला किया है। इसमें पाकिस्तान और बांग्लादेश समेत भारत के 6 पड़ोसी देश हैं। फॉक्स न्यूज के मुताबिक, यह फैसला अमेरिकी विदेश मंत्रालय के एक मेमो के आधार पर लिया गया है। इस फैसले का मकसद अमेरिका आने वाले विदेशियों की संख्या कम करना है। इस रोक के बाद अब पाकिस्तानियों के लिए अमेरिका में स्थायी निवास के रास्ते बंद हो गए हैं। अमेरिका के इस फैसले से पाकिस्तान की भारी बेइज्जती हुई है।

ट्रंप के इस फैसले के बाद हवा में उड़ रहे पाकिस्‍तानी जमीन पर आ गिरे हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर को न जाने किन किन विशेषणों से नवाजा था। ट्रंप ने मुनीर को कभी 'माई फेवरिट जनरल' कहा तो कभी 'हाइली रिस्पेक्टेड जनरल' बताया था। अमेरिकी राष्ट्रपति ने शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर को 'ग्रेट पीपुल' कहा था। अमेरिकी राष्ट्रपति से तारीफें सुन सुनकर पाकिस्तानी फूलते रहे। उन्हें लगा कि ट्रंप के रूप में उन्हें एक शक्तिशाली 'डैडी' मिल गया है। लेकिन14 जनवरी को ट्रंप के इस फैसले ने पाकिस्‍तानियों की हवा निकाल दी।

मुनीर की गलबहियां वाला हथकंडा भी नहीं आया काम

मई, 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के बाद अमेरिका और पाकिस्तान करीब आए थे। अमेरिका के हाथों पाकिस्तान की जान बची थी। इसके बाद शहबाज और मुनीर ट्रंप का अहसान मानने लगे। जून में मुनीर और ट्रंप की मुलाकात हुई। व्हाइट हाउस में मुनीर ने लंच किया। इसके बाद सितंबर में फिर मुनीर अमेरिका गए। इस बार उनके साथ पीएम शहबाज शरीफ भी थे। ट्रंप से भाव मिलने के बाद मुनीर और शरीफ गदगद थे। उनके मुल्क ने ट्रंप को नोबेल पीस प्राइज के लिए नॉमिनेट कर दिया।

अमेरिका ने पाकिस्तान को दक्षिण एशिया में मुख्य रूप से एक रणनीतिक सुरक्षा पार्टनर के तौर पर देखा। हालांकि लादेन के एबटाबाद में मिलने के बाद रिश्तों में खटास आ गई थी। ट्रंप ने खुद 2018 में दावा किया था कि इस्लामाबाद ने वाशिंगटन को झूठ और धोखे के अलावा कुछ नहीं दिया। उन्होंने कहा था, हम पाकिस्तान को अरबों-खरबों डॉलर दे रहे हैं, जबकि वे उन्हीं आतंकवादियों को पनाह दे रहे हैं जिनसे हम लड़ रहे हैं। अब समय आ गया है कि पाकिस्तान सभ्यता, व्यवस्था और शांति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाए।

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Published By : Ankur Shrivastava

पब्लिश्ड 15 January 2026 at 17:19 IST