अमेरिका ने ईरान को फिर दिया 'दर्द', इजरायल के साथ की ताबड़तोड़ एयरस्ट्राइक, 400 मिलियन में बने मिडिल ईस्ट के सबसे ऊंचे पुल को किया धुआं-धुआं
मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त सैन्य कार्रवाई में ईरान के सबसे प्रतिष्ठित इंफ्रास्ट्रक्चर B1 ब्रिज को निशाना बनाया।
मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त सैन्य कार्रवाई में ईरान के सबसे प्रतिष्ठित इंफ्रास्ट्रक्चर B1 ब्रिज को निशाना बनाया। तेहरान और करज शहरों को जोड़ने वाला यह रणनीतिक पुल मंगलवार रात को की गई सटीक एयरस्ट्राइक में बीच से टूट गया। लगभग 400 मिलियन डॉलर (करीब 3,300 करोड़ रुपये) की लागत से निर्मित यह पुल ईरान की इंजीनियरिंग क्षमता का प्रतीक माना जाता था, जो अब मलबे के ढेर में तब्दील हो चुका है।
यह हमला इतना घातक और सटीक था कि पूरी दुनिया स्तब्ध है। सैटेलाइट इमेजरी और शुरुआती रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुल का मुख्य हिस्सा पूरी तरह नष्ट हो गया, जिससे तेहरान-करज हाईवे पर यातायात ठप हो गया। ईरानी अधिकारियों ने इसे 'दुश्मनी का कायराना हमला' करार दिया है, जबकि वॉशिंगटन और तेल अवीव से अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया।
ईरान के सीने पर गहरा घाव
ईरान के सबसे सुरक्षित इलाकों में से एक माने जाने वाले तेहरान के उपनगरीय क्षेत्र में यह स्ट्राइक हुई। B1 ब्रिज मिडिल ईस्ट के सबसे ऊंचे पुलों में शुमार था, जिसकी कुल लंबाई 1.5 किलोमीटर से अधिक थी। निर्माण में 7 साल लगे और यह ईरान की आर्थिक प्रगति का सबसे बड़ा प्रतीक था। हमले से न केवल पुल जमींदोज हुआ, बल्कि आसपास की बुनियादी ढांचा को भी भारी नुकसान पहुंचा है। अनुमान है कि मरम्मत में अरबों डॉलर और महीनों लगेंगे।
बिजली गुल, अंधेरे में डूबे कई इलाके
ईरानी मीडिया के अनुसार, स्ट्राइक के बाद करज और आसपास के इलाकों में बिजली आपूर्ति चरमरा गई। कई महत्वपूर्ण क्षेत्र घंटों अंधेरे में डूब गए, क्योंकि पुल के पास बिजली ग्रिड स्टेशन भी प्रभावित हुआ है। इससे अस्पतालों, फैक्ट्रियों और आवासीय इलाकों में अफरा-तफरी मच गई।
पुल की रणनीतिक अहमियत
B1 ब्रिज को सिर्फ यातायात का साधन नहीं, बल्कि ईरान की आर्थिक और सैन्य रीढ़ माना जाता था। रोजाना लाखों वाहन इससे गुजरते थे। ये तेहरान को करज के औद्योगिक केंद्र से जोड़ता था। इसके तबाह होने से सप्लाई चेन बाधित हो गई है। इतना ही नहीं, विशेषज्ञों का कहना है कि यह पुल ईरानी सेना के लिए लॉजिस्टिक्स हब था। युद्ध की स्थिति में सैनिकों, हथियारों और ईंधन की आवाजाही इसी पर निर्भर थी। हमले का मकसद ईरान की सैन्य गतिशीलता को कमजोर करना प्रतीत होता है।
Published By : Ankur Shrivastava
पब्लिश्ड 2 April 2026 at 19:57 IST