Boss Scam: तेजी से बढ़ रहा है बॉस स्कैम, लोग खुद साइबर अपराधियों के बैंक में कर रहे हैं पैसे ट्रांसफर, जानिए कैसे बचे इस नए फ्रॉड से

Boss Scam: आमतौर पर स्कैमर्स किसी स्कैम को करने के लिए ओटीपी मांगते हैं और फिर लोगों को अपने जाल में फंसाकर उनको ठगने का काम करते हैं। लेकिन अब स्कैमर्स एक नया बॉस स्कैम लेकर आए हैं।

boss scam | Image: Meta, Republic

Boss Scam: टेक्नोलॉजी के बदलते दौर में जहां स्कैमर्स पर रोक लगाने के लिए अलग अलग तरह हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। तो वहीं स्कैमर्स भी धोखाधड़ी करने में नए नए तरीके अपनाने में लगे हैं। आमतौर पर स्कैमर्स किसी स्कैम को करने के लिए ओटीपी मांगते हैं और फिर लोगों को अपने जाल में फंसाकर उनको ठगने का काम करते हैं। लेकिन क्योंकि अब ओटीपी स्कैम को लेकर भारत सरकार और बैंक आदि बहुत बड़े स्तर पर अभियान चला रहे हैं तो लोग इसको लेकर काफी सतर्क होते जा रहे हैं। ऐसे में अब स्कैमर्स एक नया बॉस स्कैम लेकर आए हैं। 

क्या है ये बॉस स्कैम 

बॉस स्कैम में ठगों को किसी व्यक्ति को ठगने के लिए ओटीपी की जरूरत नहीं पड़ती। बल्कि इसमें ठग लोगों का भरोसा जीतकर उनको ठगने का काम करते हैं। बड़ी बात यह भी है कि इस स्कैम में लोग स्वयं अपने बैंक से ठगों के बैंक अकाउंट में पैसे ट्रांसफर करते हैं।  

कैसे होता है ये स्कैम 

इस स्कैम में साइबर अपराधी व्हाट्सऐप पर किसी व्यक्ति के बॉस की DP लगाकर उसको कुछ बैंक अकाउंट नंबर भेजता है। और उस व्यक्ति के बॉस की तरफ से इन्हीं अकाउंट में पैसे ट्रांसफर करने का आदेश देता है। DP में अपने बॉस की फोटो देख बहुत लोग झांसे में फंस जाते हैं और भेजे गए बैंक खातों में पैसे भी ट्रांसफर कर देते हैं। इस प्रकार साइबर अपराधी लोगों को उनके बॉस के नाम पर ठगने का काम कर रहे हैं। 

तेजी से बढ़ रहा है स्कैम 

इस स्कैम की शुरुआत मुंबई से हुई थी जहां इस प्रकार के एक अपराध से व्यक्ति ने अपने 10 करोड़ रुपये तक गंवा दिए थे। इसके बाद ही मुंबई पुलिस ने इस अनोखे स्कैम को बॉस स्कैम' का नाम दिया था। पिछले दिनों पूर्व प्रधानमंत्री इंद्र कुमार गुजराल के पुत्र नरेश गुजराल के एक कर्मचारी भी इसी जाल में फंसकर अपने 7.68 करोड़ रुपये साइबर अपराधियों के हाथों गंवा चुके हैं।  

बॉस के बारे में कैसे पता चलता है 

साइबर अपराधी व्हाट्सऐप पर यूजर्स को Malicious अटैचमेंट फाइल भेजते हैं। इनमें कंप्यूटर के लिए ZIP, DLL, या EXE फाइलें शामिल हो सकती हैं, या मोबाइल उपकरणों के लिए WhatsApp के माध्यम से भेजी गई APK फाइलें हो सकती हैं। जैसे ही आप इन फाइल को खोलते हैं तो आपके फोन/ कंप्यूटर में मैलवेयर इंस्टॉल होकर हैकर को Unauthorized access प्रदान करने का काम करता है। 

इससे मैलवेयर एक्टिव होकर आपके व्हाट्सऐप में कॉन्टैक्ट तक पहुँच जाता है और फिर बॉस, सर आदि के नाम के  सेव हुए कॉन्टैक्ट की जानकारी साइबर अपराधियों तक पहुंच जाती है।    

बचाव के लिए क्या करें 

  • संदिग्ध फाइल को डाउनलोड न करें- व्हाट्सऐप या ईमेल पर आई कभी भी संदिग्ध फाइल को डाउनलोड न करें।
  • ऑटो–डाउनलोड बंद करें- व्हाट्सऐप पर सेटिंग्स में जाकर ‘ऑटोमैटिक डाउनलोड’ को बंद करें। 
  • लिंक्ड डिवाइस की निगरानी करें- व्हाट्सऐप पर सेटिंग्स में जाकर Linked Devices पर निगरानी रखते रहें। कभी कोई ऐसी डिवाइस दिखे जो आप इस्तेमाल नहीं कर रहे तो उसे Unlink करें। 
  • APK फाइल डाउनलोड नया करें- अपने फोन में आई APK फाइल को डाउनलोड ना करें। साथ ही सभी ऐप Google Play Store या Apple App Store से ही डाउनलोड करें।   

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Published By : Kritarth Sardana

पब्लिश्ड 2 August 2026 at 15:21 IST