विदेशी अरबपतियों के पपेट के रूप में राहुल नजर आ रहे हैं, स्टारलिंक के खिलाफ बोलने वाली कांग्रेस अब उसके पक्ष में क्यों...', BJP ने उठाए सवाल

Starlink को लेकर हो रहे विवाद पर बीजेपी के नेशनल मीडिया को-कोऑर्डिनेटर सिद्धार्थ यादव ने कहा, “राहुल गांधी की राजनीति विदेशी समर्थन पर टिकी हुई लगती है।

siddharth yadav rahul gandhi | Image: siddharth yadav x

Starlink को लेकर हो रहे विवाद पर बीजेपी के नेशनल मीडिया को-कोऑर्डिनेटर सिद्धार्थ यादव ने कहा, “राहुल गांधी की राजनीति विदेशी समर्थन पर टिकी हुई लगती है। उन्होंने विदेश में भारतीय लोकतंत्र पर सवाल उठाए हैं और अब वे विदेशी अरबपतियों का समर्थन करते दिख रहे हैं। एक साल पहले कांग्रेस ने स्टारलिंक को लेकर चिंता जताई थी, तो अब क्या बदल गया है?”

सिद्धार्थ यादव ने कहा "भारत एक संप्रभु देश है और इसकी नीतियां संसद में बनती हैं... जो लोग विदेशी अरबपतियों के हाथों की कठपुतली बने हुए हैं, उन्हें यह जान लेना चाहिए कि इस देश की जनता उनके इरादों और छिपे हुए हितों को अच्छी तरह समझती है।" 

October 9, 2026

राहुल 'सरेंडर गांधी' कैसे बन गए?

भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राम माधव ने कहा है “सबसे पहले Elon Musk को यह समझ लेना चाहिए कि भारत कोई 'Banana Republic' नहीं है। यहां नियम, कानून और व्यवस्था के तहत ही सारे निर्णय लिए जाएंगे। जिन्हें वे इशारों में Oligarch वगैरह कह रहे हैं, वे लोग भी स्पेक्ट्रम आवंटन के लिए प्रतीक्षा कर रहे हैं। चाहे जियो हो या एयरटेल, वे सभी स्टारलिंक के साथ कतार में हैं और प्रतीक्षा कर रहे हैं। लेकिन सबसे मजेदार प्रतिक्रिया तो राहुल गांधी जी की है।” 

राम माधव ने कहा "वे तो हम सबको कह रहे थे कि आप एलन मस्क और ट्रम्प के सामने सरेंडर कर देते हैं, आप सरेंडर करने वाली पार्टी हैं। अब क्या हो गया कि वे खुद इतना सरेंडर हो रहे हैं? इतने उतावले क्यों हो रहे हैं कि एलन मस्क को कोई मुश्किल हो रही है? कुछ महीनों पहले इन्हीं के नेता जयराम रमेश कह रहे थे कि एलन मस्क का स्टारलिंक देश की सुरक्षा के लिए खतरा है। उनके सलाहकार भी इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बता रहे थे। फिर अचानक वे 'सरेंडर गांधी' कैसे बन गए? 

भाजपा नेता ने कहा “इस बीच ऐसा क्या मिल गया कि जो कल तक हमारे ऊपर आरोप लगा रहे थे, आज अचानक एलन मस्क की सेवा में उतर गए? राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी अच्छी तरह समझ लें कि उनकी UPA सरकार के दौरान स्पेक्ट्रम को लेकर बहुत बड़ा भ्रष्टाचार हुआ था और स्पेक्ट्रम अनाप-शनाप तरीके से बेचा गया था। लेकिन यह मोदी जी की सरकार है, यहां सब कुछ नियम-कायदे और कानून के अनुरूप ही होगा। जिसे जब मिलना होगा, बिना किसी भेदभाव के मिलेगा... 'सरेंडर गांधी' एलन मस्क को खुश करने की कितनी भी कोशिश कर लें! पता नहीं अचानक राहुल गांधी जी को एलन मस्क से इतना प्रेम कैसे हो गया।”

राम माधव ने कहा “वे चाहे जितना प्रयास कर लें, निर्णय कानून और भारत के नियमों के अनुसार ही होगा। जैसा कि प्रधानमंत्री जी ने कल स्पष्ट कहा है कि मोबाइल की सुरक्षा, नेटवर्क की सुरक्षा, स्पेक्ट्रम और देश की राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रखकर ही निर्णय लिया जाएगा। सरकार इस विषय पर पहले ही अपना स्पष्टीकरण दे चुकी है।”

ज्योतिरादित्य सिंधिया भी IMC के मंच बोले 

इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2026 के 10वें एडिशन में केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा "मैं बिल्कुल साफ कर दूं। भारत किसी भी सेक्टर में मोनोपॉली (एकाधिकार) की इजाज़त नहीं देता है। इसलिए, जहां तक ​​SATCOM की बात है, तो ऐसा नहीं है कि सिर्फ़ एक ही लाइसेंसधारी को चुना गया है। जो भी ये सर्विस देना चाहता है, उन सभी को लाइसेंस दिए गए हैं। आज तीन लाइसेंस जारी किए गए हैं। एक खास कंपनी के बारे में बहुत चर्चा हो रही है, लेकिन असल में तीन कंपनियों को लाइसेंस मिले हैं: रिलायंस जियो, वनवेब और स्टारलिंक। 

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा "एक और कंपनी है जो लाइसेंस लेने में दिलचस्पी रखती है और उस कंपनी को तय प्रक्रिया का पालन करना होगा—वह है अमेज़न का प्रोजेक्ट कुइपर। अभी तीन कंपनियों को लाइसेंस मिल चुका है। एक बार रेवेन्यू चार्ज सिस्टम फाइनल हो जाए, और ये तीनों कंपनियां—A, B और C सुरक्षा संबंधी चिंताओं और ज़रूरी शर्तों के आधार पर अपनी उपलब्धियों या माइलस्टोन के मुताबिक सभी ज़रूरतों को पूरा कर लें, तो ज़ाहिर है कि वे अपना कामकाज शुरू कर सकती हैं। लेकिन इसके लिए हर कंपनी को अलग-अलग नियमों का पालन करना होगा।"

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा, "कई मायनों में, जिनेवा से नई दिल्ली तक इस वर्कशॉप का सफ़र उस सफ़र जैसा ही है जो अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को खुद तय करना है: ग्लोबल बातचीत से लोकल समाधान तक, तकनीकी संभावना से इंसानों पर असर तक, और रणनीति से बड़े पैमाने पर लागू करने तक…आज लगभग हर देश का AI को लेकर कोई न कोई लक्ष्य है। AI के लक्ष्य और AI के असर के बीच की दूरी को स्किल्स, कंप्यूट, डेटा, संस्थानों और कनेक्टिविटी के ज़रिए पाटा जाता है। 

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने यह भी कहा "आज भारत सिर्फ़ मेज़बान नहीं है; हम इस मिशन में पार्टनर हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब इसे लागू करने के दशक में प्रवेश कर चुका है। अब सवाल यह नहीं है कि क्या AI हमारी अर्थव्यवस्थाओं, समाजों और हमारी ज़िंदगी को बदल देगा; वह बदलाव तो पहले से ही हो रहा है। असल सवाल यह है कि क्या हम इसे बड़े पैमाने पर ज़िम्मेदार, समावेशी, सुरक्षित और सुलभ बना सकते हैं।"

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Published By : Kritarth Sardana

पब्लिश्ड 9 October 2026 at 15:17 IST