Manu Bhaker: Gen-Z की भाषा पर चल रही बहस में निशानेबाज मनु भाकर की एंट्री, कहा- गाली देना कूल नहीं, हम जो भाषा चुनते हैं उससे...
हाल ही में जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन और सोशल मीडिया पर वायरल वीडियोज में Gen Z का एक वर्ग सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अभद्र भाषा और विवादित नारेबाजी करता दिखा। हालांकि, पीएम मोदी ने बड़ा दिल दिखाते हुए कहा कि वे ऐसे शरारती बच्चों को माफ कर चुके हैं और नहीं चाहते कि उनका भविष्य किसी कानूनी पचड़े में फंसे।
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जंतर-मंतर पर हुए विरोध प्रदर्शन के कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए हैं, जिनमें आज की पीढ़ी (Gen Z) सरकार और देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए आपत्तिजनक नारेबाजी करती दिख रही है। हालांकि, प्रधानमंत्री मोदी ने बड़प्पन दिखाते हुए कहा कि वे ऐसे युवाओं को माफ कर चुके हैं और नहीं चाहते कि वे किसी कानूनी पचड़े में फंसे। लेकिन इस घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या विरोध जताने के लिए अभद्र भाषा का सहारा लेना सही है?
'गाली देना 'Cool' होना नहीं है'
इस पूरी बहस में अब ओलंपिक मेडलिस्ट शूटर मनु भाकर ने कदम रखा है। उन्होंने प्रधानमंत्री का समर्थन करते हुए अभिव्यक्ति की आजादी और 'कूल' दिखने की आड़ में कुछ भी बोल देने की मानसिकता पर कड़ा प्रहार किया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर अपनी बात रखते हुए मनु ने लिखा कि 'हम जो भाषा चुनते हैं, वह हमारे व्यक्तित्व और स्वभाव को दर्शाती है। अपने शब्दों का चुनाव सोच-समझकर करें, क्योंकि वक्त के साथ आप वही बन जाते हैं जो आप सोचते हैं, बोलते हैं और जैसा व्यवहार करते हैं।'
असली 'Cool' क्या है?
मनु भाकर ने युवाओं को आइना दिखाते हुए साफ किया कि अपशब्दों का इस्तेमाल करना या किसी को गाली देना कतई 'कूल' नहीं है। उनके मुताबिक असली 'Cool' होने का मतलब है कि मेहनती और दयालु होना। खुद का और दूसरों का सम्मान करना। ईमानदारी से सफलता हासिल करना और अपने माता-पिता और देश को गौरवान्वित करना होता है।
मनु भाकर ने इस मुद्दे पर अपनी बात इसलिए रखी क्योंकि पिछले कुछ सालों में अभद्र भाषा को लेकर समाज का नज़रिया चिंताजनक रूप से बदला है। आज की युवा पीढ़ी के लिए अपमानजनक शब्द इतने आम हो गए हैं कि वे अनजाने में भी रोज़मर्रा की बातचीत में अनादरपूर्ण भाषा का इस्तेमाल करने लगे हैं और इसे फैशन समझने लगे हैं।
भाषा ही हमारी पहचान है
किसी भी लोकतंत्र में विरोध का अधिकार सबको है, लेकिन विरोध की आड़ में मर्यादा की सीमा लांघना और असभ्य भाषा का प्रयोग करना देश के युवाओं की छवि को धूमिल करता है। मनु भाकर का यह संदेश हर युवा के लिए एक सीख है कि 'Cool' बनने के चक्कर में अपनी संस्कृति और संस्कारों को न भूलें।
Published By : Aarya Pandey
पब्लिश्ड 3 August 2026 at 17:10 IST