अपडेटेड 5 February 2026 at 16:26 IST
Yashoda Jayanti 2026: 6 या 7 फरवरी... कब है यशोदा जयंती? जानें सही तिथि, पूजा विधि, कथा और धार्मिक महत्व
Yashoda Jayanti 2026 Kab Hai: यशोदा जयंती सिर्फ एक तिथि नहीं, बल्कि मां के निस्वार्थ प्रेम और वात्सल्य का उत्सव है। इस बार श्रद्धा के साथ मां यशोदा और बाल गोपाल की पूजा करें और अपने जीवन में सुख, शांति और संतान सुख का आशीर्वाद प्राप्त करें।
Yashoda Jayanti 2026 Vrat Significance: हिंदू धर्म में मां यशोदा का स्थान बहुत ही खास माना गया है। भगवान श्रीकृष्ण को अपने पुत्र की तरह प्रेम, स्नेह और वात्सल्य देने वाली माता यशोदा की जयंती हर साल श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाई जाती है। इस दिन खासतौर पर संतान सुख और परिवार की खुशहाली के लिए पूजा की जाती है। तो चलिए जानते हैं कि यशोदा जयंती 2026 कब है, कैसे पूजा करें और इसका धार्मिक महत्व क्या है।
यशोदा जयंती 2026 कब है?
पंचांग के अनुसार, हर साल फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को यशोदा जयंती मनाई जाती है। द्रिक पंचांग के मुताबिक, षष्ठी तिथि की शुरुआत 7 फरवरी 2026 को रात 01:18 बजे से लेकर अगले दिन 8 फरवरी 2026 को रात 02:54 बजे तक रहेगी। उदया तिथि को मानते हुए यशोदा जयंती 7 फरवरी 2026, शनिवार को मनाई जाएगी।
यशोदा जयंती का धार्मिक महत्व
माता यशोदा को वात्सल्य प्रेम की देवी माना जाता है। वे नंद बाबा की पत्नी और गोकुल की महारानी थीं। उन्होंने भगवान कृष्ण को भगवान नहीं, बल्कि अपने लाडले बेटे के रूप में पाला।
धार्मिक मान्यता है कि यशोदा जयंती के दिन मां यशोदा और बाल गोपाल की पूजा करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है और संतान सुख की प्राप्ति होती है। यह दिन हमें सिखाता है कि ईश्वर को पाने के लिए ज्ञान या धन नहीं, बल्कि सच्चा प्रेम और भक्ति सबसे बड़ा मार्ग है।
यशोदा जयंती 2026 की पूजा विधि
यशोदा जयंती के दिन पूजा विधि बहुत ही सरल है। आप इसे पूरे श्रद्धा भाव से करें।
- सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें और व्रत का संकल्प लें।
- पूजा स्थान पर लाल कपड़ा बिछाकर भगवान श्रीकृष्ण और मां यशोदा की तस्वीर या मूर्ति रखें।
- रोली, सिंदूर, चंदन, फूल, अक्षत अर्पित करें।
- श्रीकृष्ण को माखन-मिश्री और तुलसी दल चढ़ाएं।
- फल और मिठाई का भोग लगाएं।
- दीपक और धूप जलाकर आरती करें।
- गोपाल सहस्त्रनाम या श्रीकृष्ण मंत्र का जाप करें।
- अंत में प्रसाद सभी में बांट दें।
व्रत रखने वाली महिलाएं इस दिन अन्न और नमक का सेवन न करें और फलाहार करें।
मां यशोदा जी की आरती
यशोदा जयंती के दिन आरती करने से पूजा पूर्ण मानी जाती है।
आरति करत यसोदा प्रमुदित, फूली अंग न मात।
बल बल कहि दुलरावत, आनंद मगन भई पुलकात॥
सुबरन-थार रत्न-दीपावलि, चित्रित घृत-भीनी बात।
कल सिंदूर दूब दधि अच्छत, तिलक करत बहु भांत॥
अन्न चतुर्विध बिबिध भोग, दुंदुभी बाजत बहु जात।
नाचत गोप कुंकुमा छिरकत, देत अखिल नगदात ।।
बरसत कुसुम निकर-सुर-नर-मुनि, व्रजजुवती मुसकात।
कृष्णदास-प्रभु गिरधर को (श्री) मुख, निरख लजत ससि-कांत ।।
यशोदा जयंती की पौराणिक कथा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माता यशोदा ने अपने पूर्व जन्म में भगवान विष्णु की कठोर तपस्या की थी। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान ने उन्हें वरदान दिया। यशोदा जी ने भगवान को अपने पुत्र के रूप में पाने की इच्छा जताई।
अगले जन्म में भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण अवतार लिया। योगमाया के प्रभाव से वे देवकी की जगह गोकुल में माता यशोदा के पास पहुंचे। एक बार यशोदा जी ने बाल कृष्ण के मुख में पूरा ब्रह्मांड देखा, लेकिन फिर भी उनका मातृत्व भाव कभी कम नहीं हुआ। इसी अद्भुत प्रेम और वात्सल्य के कारण यशोदा जयंती को मातृ-प्रेम के पर्व के रूप में मनाया जाता है।
यशोदा जयंती सिर्फ एक तिथि नहीं, बल्कि मां के निस्वार्थ प्रेम और वात्सल्य का उत्सव है। 7 फरवरी 2026 को श्रद्धा के साथ मां यशोदा और बाल गोपाल की पूजा करें और अपने जीवन में सुख, शांति और संतान सुख का आशीर्वाद प्राप्त करें।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ अलग-अलग सूचना और मान्यताओं पर आधारित है। REPUBLIC BHARAT इस आर्टिकल में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता और प्रमाणिकता का दावा नहीं करता है।
Published By : Samridhi Breja
पब्लिश्ड 5 February 2026 at 16:26 IST