अपडेटेड 5 March 2026 at 09:47 IST
Vishnu Chalisa Path: आज गुरुवार के दिन करें विष्णु चालीसा का पाठ, विवाह में आ रही परेशानियां होंगी दूर
Vishnu Chalisa Path: हिंदू धर्म में गुरुवार का दिन भगवान विष्णु को समर्पित है। इस दिन श्रीहरि की पूजा-पाठ करने से व्यक्ति के जीवन में आ रही बाधाएं दूर हो सकती है। अब ऐसे में इस दिन विष्णु चालीसा का पाठ करने का विशेष विधान है। आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं।
Vishnu Chalisa Path: सनातन धर्म में भगवान विष्णु को सृष्टि का पालनहार कहा जाता है। वहीं गुरुवार का दिन इनकी पूजा विधिवत रूप से करने का विधान है। ऐसी मान्यता है कि भगवान विष्णु की पूजा विधिवत रूप से व्यक्ति के जीवन में धन-धान्य का आगमन होता है और भाग्योदय हो सकता है। आपको बता दें, गुरुवार के दिन विष्णु चालीसा का पाठ करने से व्यक्ति को उत्तम फलों की प्राप्ति हो सकती है। आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं।
गुरुवार के दिन करें विष्णु चालीसा का पाठ
दोहा
विष्णु सुनिए विनय सेवक की चितलाय ।
कीरत कुछ वर्णन करूं दीजै ज्ञान बताय ।।
विष्णु चालीसा
नमो विष्णु भगवान खरारी, कष्ट नशावन अखिल बिहारी ।
प्रबल जगत में शक्ति तुम्हारी, त्रिभुवन फैल रही उजियारी ।।सुन्दर रूप मनोहर सूरत, सरल स्वभाव मोहनी मूरत ।
तन पर पीताम्बर अति सोहत, बैजन्ती माला मन मोहत ।।
शंख चक्र कर गदा विराजे, देखत दैत्य असुर दल भाजे ।
सत्य धर्म मद लोभ न गाजे, काम क्रोध मद लोभ न छाजे ।।
सन्तभक्त सज्जन मनरंजन, दनुज असुर दुष्टन दल गंजन ।
सुख उपजाय कष्ट सब भंजन, दोष मिटाय करत जन सज्जन ।।
पाप काट भव सिन्धु उतारण, कष्ट नाशकर भक्त उबारण ।
करत अनेक रूप प्रभु धारण, केवल आप भक्ति के कारण ।।
धरणि धेनु बन तुमहिं पुकारा, तब तुम रूप राम का धारा ।
भार उतार असुर दल मारा, रावण आदिक को संहारा ।।
आप वाराह रूप बनाया, हिरण्याक्ष को मार गिराया ।
धर मत्स्य तन सिन्धु बनाया, चौदह रतनन को निकलाया।।
अमिलख असुरन द्वन्द मचाया, रूप मोहनी आप दिखाया ।
देवन को अमृत पान कराया, असुरन को छवि से बहलाया।।
कूर्म रूप धर सिन्धु मझाया, मन्द्राचल गिरि तुरत उठाया ।
शंकर का तुम फन्द छुड़ाया, भस्मासुर को रूप दिखाया ।।
वेदन को जब असुर डुबाया, कर प्रबन्ध उन्हें ढुढवाया ।
मोहित बनकर खलहि नचाया, उसही कर से भस्म कराया ।।
असुर जलन्धर अति बलदाई, शंकर से उन कीन्ह लड़ाई ।
हार पार शिव सकल बनाई, कीन सती से छल खल जाई।।
सुमिरन कीन तुम्हें शिवरानी, बतलाई सब विपत कहानी ।
तब तुम बने मुनीश्वर ज्ञानी, वृन्दा की सब सुरति भुलानी।।
देखत तीन दनुज शैतानी, वृन्दा आय तुम्हें लपटानी ।
हो स्पर्श धर्म क्षति मानी, हना असुर उर शिव शैतानी।।
तुमने ध्रुव प्रहलाद उबारे, हिरणाकुश आदिक खल मारे ।
गणिका और अजामिल तारे, बहुत भक्त भव सिन्धु उतारे।।
हरहु सकल संताप हमारे, कृपा करहु हरि सिरजन हारे ।
देखहुं मैं निज दरश तुम्हारे, दीन बन्धु भक्तन हितकारे।।
चाहता आपका सेवक दर्शन, करहु दया अपनी मधुसूदन ।
जानूं नहीं योग्य जब पूजन, होय यज्ञ स्तुति अनुमोदन ।।
शीलदया सन्तोष सुलक्षण, विदित नहीं व्रतबोध विलक्षण ।
करहुं आपका किस विधि पूजन, कुमति विलोक होत दुख भीषण ।।
करहुं प्रणाम कौन विधिसुमिरण, कौन भांति मैं करहु समर्पण ।
सुर मुनि करत सदा सेवकाई, हर्षित रहत परम गति पाई ।।
दीन दुखिन पर सदा सहाई, निज जन जान लेव अपनाई ।
पाप दोष संताप नशाओ, भव बन्धन से मुक्त कराओ।।
सुत सम्पति दे सुख उपजाओ, निज चरनन का दास बनाओ ।
निगम सदा ये विनय सुनावै, पढ़ै सुनै सो जन सुख पावै।।
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विष्णु चालीसा का पाठ करने का महत्व
भगवान विष्णु लक्ष्मी जी के पति हैं। मान्यता है कि जो भक्त विष्णु जी की स्तुति करता है, उस पर माता लक्ष्मी की कृपा अपने आप ही हो जाती है। इससे घर में दरिद्रता दूर होती है और आर्थिक स्थिति में सुधार आता है। घर में विष्णु चालीसा का पाठ करने से क्लेश दूर होते हैं और परिवार के सदस्यों के बीच प्रेम बढ़ता है।
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ अलग-अलग सूचना और मान्यताओं पर आधारित है। REPUBLIC BHARAT इस आर्टिकल में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता और प्रमाणिकता का दावा नहीं करता है।
Published By : Aarya Pandey
पब्लिश्ड 5 March 2026 at 09:47 IST