अपडेटेड 16 January 2026 at 09:05 IST

Shukra Pradosh Vrat 2026: आज शुक्र प्रदोष व्रत के दिन इस मुहूर्त में करें भगवान शिव की पूजा, जानें महत्व

Shukra Pradosh Vrat 2026: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत को बेहद शुभ फलदायी माना जाता है। वहीं इस दिन भगवान शिव की पूजा किस मुहूर्त में करने से लाभ हो सकता है। आइए जानते हैं।

Shukra Pradosh Vrat 2026 | Image: Freepik

Shukra Pradosh Vrat 2026: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है। जब त्रयोदशी तिथि शुक्रवार के दिन पड़ती है, तो इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाता है। साल 2026 का यह विशेष शुक्र प्रदोष व्रत भक्तों के लिए सुख, सौभाग्य और दांपत्य जीवन में मधुरता लाने वाला माना जा रहा है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की संयुक्त पूजा करने से जातक के जीवन से आर्थिक तंगी दूर होती है और शुक्र ग्रह के शुभ प्रभाव में वृद्धि होती है। अब ऐसे में आज शुक्र प्रदोष व्रत के दिन किस मुहूर्त में भगवान शिव की पूजा करने से लाभ हो सकता है। आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं।

शुक्र प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव की पूजा का शुभ मुहूर्त

शुक्र प्रदोष व्रत के दिन पूजा के लिए शाम का समय सबसे उत्तम है। प्रदोष व्रत की पूजा हमेशा सूर्यास्त से लगभग 45 मिनट पहले और 45 मिनट बाद के समय में की जाती है। प्रदोष काल पूजा मुहूर्त- शाम 6 बजकर 15 मिनट से लेकर शाम 08 बजकर 35 मिनट तक।

शुक्र प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव की पूजा का महत्व क्या है? 

शास्त्रों के अनुसार, प्रदोष काल वह समय होता है जब भगवान शिव कैलाश पर्वत पर प्रसन्न मुद्रा में नृत्य करते हैं। शुक्र प्रदोष का व्रत रखने से न केवल आरोग्य की प्राप्ति होती है, बल्कि जातक की कला, प्रेम और विलासिता से जुड़ी इच्छाएं भी पूरी होती हैं। जो लोग वैवाहिक जीवन में समस्याओं का सामना कर रहे हैं, उनके लिए यह व्रत रामबाण माना जाता है। इतना ही नहीं, अगर किसी जातक की कोई मनोकामना है तो इस दिन पूजा-पाठ करने से लाभ हो सकता है।

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शुक्र प्रदोष व्रत के दिन करें इन मंत्रों का जाप

शुक्र प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव की पूजा करने के दौरान इन मंत्रों का जाप विशेष रूप से करें। 

  • ॐ नमः शिवाय'
  • ॐ नमो भगवते रुद्राय 
  • ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
  • करचरण कृतं वा कायजं कर्मजं वा। श्रवणनयनजं वा मानसं वापराधं। विहितमविहितं वा सर्वमेतत्क्षमस्व। जय जय करुणाब्धे श्रीमहादेव शम्भो॥

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ अलग-अलग सूचना और मान्यताओं पर आधारित है। REPUBLIC BHARAT इस आर्टिकल में दी गई किसी भी जानकारी की सत्‍यता और प्रमाणिकता का दावा नहीं करता है।

Published By : Sagar Singh

पब्लिश्ड 16 January 2026 at 09:05 IST