अपडेटेड 17 January 2026 at 11:18 IST

Narak Niwaran Chaturdashi 2026: महादेव को प्रसन्न करने का महायोग, नरक निवारण चतुर्दशी पर ऐसे मिटाएं अपने जन्म-जन्मांतर के पाप

Narak Niwaran Chaturdashi 2026: नरक निवारण चतुर्दशी, जिसे 'माघ चतुर्दशी' के रूप में भी जाना जाता है, सनातन धर्म में आध्यात्मिक शुद्धि और पाप मुक्ति का महापर्व है। इस दिन भगवान शिव की आराधना करने से न केवल मानसिक और शारीरिक दुखों का अंत होता है, बल्कि नर्क की यातनाओं से भी मुक्ति मिलती है।

Narak Niwaran Chaturdashi 2026 | Image: Canva/AI

Narak Niwaran Chaturdashi 2026: सनातन धर्म में महाशिवरात्रि के साथ-साथ नरक निवारण चतुर्दशी का विशेष महत्व है। माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाने वाली यह तिथि भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त करने और नर्क के कष्टों से मुक्ति पाने का महापर्व है। साल 2026 में यह शुभ अवसर 17 जनवरी को पड़ रहा है। 

ऐसी मान्यता है कि इस दिन पूरी श्रद्धा से महादेव की पूजा करने वाले जातक को न केवल इस जन्म के दुखों से मुक्ति मिलती है, बल्कि पूर्व जन्मों के संचित पापों का भी नाश होता है। आइए जानते हैं इस दिन का महत्व क्या है और किस विधि से भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने से लाभ हो सकता है।

नरक निवारण चतुर्दशी का धार्मिक महत्व क्या है? 

पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस दिन भगवान शिव ने माता पार्वती को 'नरक निवारण' का रहस्य बताया था। जो व्यक्ति इस दिन उपवास रखकर शिवलिंग का अभिषेक करता है, उसे मृत्यु के पश्चात यमराज के दंड का भय नहीं रहता। इसे 'अधनिवारक चतुर्दशी' भी कहा जाता है, जिसका अर्थ पापों का निवारण करने वाली तिथि से है। यह दिन आत्म-शुद्धि का है। महादेव, जो स्वयं 'कालों के काल' महाकाल हैं, इस दिन भक्तों की पुकार अति शीघ्र सुनते हैं और उन्हें नरक की यातनाओं से सुरक्षित करने का वरदान देते हैं।

नरक निवारण चतुर्दशी के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त

निशीथ काल में पूजा करना बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन मध्य रात्रि 12:00 से 12:50 के बीच आप विधिवत रूप से भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं।

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नरक निवारण चतुर्दशी के दिन किस विधि से पूजा करें? 

  • सूर्योदय से पूर्व उठकर जल में काले तिल डालकर स्नान करें। 
  • मंदिर जाकर तांबे के लोटे से शिवलिंग पर जल अर्पित करें। यदि संभव हो, तो पंचामृत से अभिषेक करें।
  • महादेव को तीन पत्तों वाला बेलपत्र 'ऊं नमः शिवाय' जपते हुए अर्पित करें। साथ ही धतूरा, शमी पत्र और मंदार के पुष्प भी चढ़ाए शाम के समय घर के मुख्य द्वार पर और शिवालय में दीप प्रज्वलित करें। इससे अज्ञानता का अंधकार मिटता है और जीवन में प्रकाश आता है।
  • इस दिन कम से कम 108 बार महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। यह मंत्र अकाल मृत्यु के भय को समाप्त करता है।
  • इस दिन तिल, गुड़ और गरम वस्त्रों का दान जरूरतमंदों को करें।

Published By : Sagar Singh

पब्लिश्ड 17 January 2026 at 11:18 IST