अपडेटेड 15 November 2025 at 17:41 IST

Som Pradosh Vrat 2025: 17 या 18 नवंबर... मार्गशीष मास का पहला प्रदोष व्रत कब है? जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और महत्व

Lord Shiva: मार्गशीर्ष मास का सोम प्रदोष व्रत के दिन शाम प्रदोष काल में शिवजी की पूजा करने से विशेष पुण्य और शुभ फल की प्राप्ति होती है।

सोम प्रदोष व्रत 2025 कब है? | Image: Freepik

Som Pradosh Vrat 2025 Kab Hai: भगवान शिव के भक्त इन्हें खुश करने के लिए क्या-कुछ नहीं करते हैं। वहीं हिन्दू धर्म में व्रत और पूजा का अधिक महत्व होता है। ऐसे में मार्गशीष का महीना शुरू हो चुका है।

ऐसे में मार्गशीर्ष मास का पहला प्रदोष व्रत कब रखा जाएगा? यह सवाल इन दिनों काफी पूछा जा रहा है, क्योंकि कुछ जगहों पर 17 नवंबर की तारीख बताई जा रही है और कुछ जगहों पर 18 नवंबर। ऐसे में सही जानकारी जानना जरूरी है ताकि पूजा सही दिन की जा सके।

मार्गशीर्ष मास का पहला सोम प्रदोष व्रत कब है?

द्रिक पंचांग के अनुसार मार्गशीर्ष मास का पहला सोम प्रदोष व्रत सोमवार, 17 नवंबर 2025 को पड़ेगा। इस दिन त्रयोदशी तिथि और सोमवार का सुंदर संयोग बन रहा है, जिसे सोम प्रदोष कहते हैं।

त्रयोदशी तिथि का समय क्या है?

  • त्रयोदशी तिथि शुरू: 17 नवंबर 2025, सुबह 04:46 बजे
  • त्रयोदशी तिथि समाप्त: 18 नवंबर 2025, सुबह 07:11 बजे

चूंकि प्रदोष व्रत त्रयोदशी तिथि की सन्ध्या काल को माना जाता है, इसलिए इसका व्रत 17 नवंबर की शाम को ही रखा जाएगा।

सोम प्रदोष व्रत 2025 का शुभ मुहूर्त

प्रदोष काल सूर्यास्त के बाद लगभग 1.5 घंटे तक माना जाता है। 17 नवंबर 2025 को प्रदोष पूजा का शुभ समय शाम 05:28 बजे से शाम 07:53 बजे तक रहेगा। इसी समय भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना करना अत्यंत शुभ माना गया है।

सोम प्रदोष व्रत की पूजा विधि

  • आप घर पर बहुत सरल तरीके से पूजा कर सकते हैं।
  • सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें।
  • घर को साफ करके पूजा स्थान पर दीपक जलाएं।
  • प्रदोष काल में भगवान शिव को गंगाजल, दूध, दही, शहद मिलाकर जल अर्पित करें।
  • बिल्व पत्र, अक्षत, धूप, दीप और फल चढ़ाएं।
  • “ॐ नमः शिवाय” का जाप करें।
  • शिव चालीसा या प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें।

सोम प्रदोष व्रत का महत्व

सोम प्रदोष भगवान शिव को प्रसन्न करने का अत्यंत फलदायी दिन माना जाता है। इस व्रत को करने से आपकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इसके अलावा मानसिक शांति मिलती है। धन-समृद्धि का योग बढ़ता है। विवाह और दांपत्य जीवन की बाधाएं दूर होती हैं। साथ ही, स्वास्थ्य में सुधार आता है। मान्यता है कि जो भी भक्त श्रद्धा से इस दिन शिवजी की उपासना करता है, उसके जीवन की कठिनाइयां कम होने लगती हैं।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ अलग-अलग सूचना और मान्यताओं पर आधारित है। REPUBLIC BHARAT इस आर्टिकल में दी गई किसी भी जानकारी की सत्‍यता और प्रमाणिकता का दावा नहीं करता है।

Published By : Sagar Singh

पब्लिश्ड 15 November 2025 at 17:36 IST