अपडेटेड 9 January 2026 at 15:05 IST

Makar Sankranti 2026: मकर संक्रांति और एकादशी एक साथ, तो क्या खा सकते हैं खिचड़ी?

Makar Sankranti And Shattila Ekadashi 2026 Together: मकर संक्रांति और एकादशी एक साथ होने पर सबसे जरूरी है कि आप अपनी आस्था और व्रत के नियमों का पालन करें। ऐसे में आप छोटे-बड़े नियमों का सही तरह से पालन करें।

मकर संक्रांति 2026 और षटतिला एकादशी 2026 | Image: Freepik

So Can We Eat Khichdi Or Not On Makar Sankranti 2026: साल 2026 में मकर संक्रांति और एकादशी एक ही दिन पड़ने से लोगों के मन में यह सवाल है कि ऐसे में क्या खिचड़ी खाई जा सकती है या नहीं। मकर संक्रांति पर खिचड़ी, तिल-गुड़ और दान का विशेष महत्व होता है, वहीं एकादशी व्रत में खाने-पीने को लेकर कुछ नियम माने जाते हैं। ऐसे में दोनों पर्व एक साथ होने पर भ्रम होना स्वाभाविक है। तो चलिए जानते हैं षटतिला एकादशी और मकर संक्रांति के कुछ नियम-

मकर संक्रांति का महत्व क्या है?

मकर संक्रांति सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का पर्व है। इस दिन स्नान, दान और पुण्य कर्म का खास महत्व माना जाता है। उत्तर भारत में खिचड़ी खाने और दान करने की परंपरा है। माना जाता है कि इस दिन खिचड़ी खाने से स्वास्थ्य अच्छा रहता है और सूर्य देव की कृपा मिलती है।

मकर संक्रांति 2026 का शुभ मुहूर्त

साल 2026 में मकर संक्रांति को लेकर भ्रम इसलिए है क्योंकि सूर्य दिन में राशि परिवर्तन कर रहे हैं। मकर संक्रांति की तिथि 14 जनवरी 2026, बुधवार को है। वहीं सूर्य का मकर राशि में गोचर दोपहर 3 बजकर 06 मिनट पर होगा। शास्त्रों के अनुसार, उदया तिथि के आधार पर मकर संक्रांति 14 जनवरी 2026 को ही मनाई जाएगी।

एकादशी के नियम

एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है। इस दिन अन्न का सेवन वर्जित माना जाता है। व्रती लोग फलाहार करते हैं या फिर निर्जला व्रत रखते हैं। चावल, गेहूं और दाल जैसी चीजें आमतौर पर एकादशी में नहीं खाई जातीं है।

षटतिला एकादशी 2026 का शुभ मुहूर्त

वैदिक पंचांग के अनुसार, एकादशी तिथि की शुरुआत 13 जनवरी 2026 को दोपहर 3:16 बजे से लेकर अगले दिन 14 जनवरी 2026 को शाम 5:53 बजे तक रहेगी। ऐसे में उदयातिथि को ध्यान में रखते हुए षटतिला एकादशी का व्रत 14 जनवरी 2026 यानी बुधवार को रखा जाएगा।

तो क्या खा सकते हैं खिचड़ी?

अगर मकर संक्रांति और एकादशी एक साथ पड़ती है और आप एकादशी का व्रत रख रहे हैं, तो पारंपरिक अन्न वाली खिचड़ी यानी चावल और दाल से बनी खिचड़ी नहीं खानी चाहिए। क्योंकि एकादशी में अन्न निषिद्ध माना गया है।

हालांकि, अगर आप चाहें तो व्रत के नियमों के अनुसार फलाहारी खिचड़ी बना सकते हैं। इसमें समा के चावल, कुट्टू, सिंघाड़े का आटा, मूंगफली और सेंधा नमक का इस्तेमाल किया जाता है। यह व्रत के नियमों में भी सही मानी जाती है और मकर संक्रांति की परंपरा भी बनी रहती है।

व्रत न रखने वालों को क्या करना चाहिए?

जो लोग एकादशी का व्रत नहीं रख रहे हैं, वे मकर संक्रांति पर सामान्य तरीके से खिचड़ी खा सकते हैं और दान-पुण्य कर सकते हैं।

मकर संक्रांति और एकादशी एक साथ होने पर सबसे जरूरी है कि आप अपनी आस्था और व्रत के नियमों का पालन करें। ऐसे में व्रती लोग अन्न वाली खिचड़ी से बचें और फलाहारी खिचड़ी लें। बिना व्रत वाले लोग सामान्य खिचड़ी खा सकते हैं।

यह जरूर पढ़ें: Navpancham Rajyog 2026: शनि-बुध मिलकर बनाएंगे नवपंचम राजयोग, कामकाज में मिलेगी तरक्की; खुलेंगे नए रास्ते

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ अलग-अलग सूचना और मान्यताओं पर आधारित है। REPUBLIC BHARAT इस आर्टिकल में दी गई किसी भी जानकारी की सत्‍यता और प्रमाणिकता का दावा नहीं करता है।

Published By : Samridhi Breja

पब्लिश्ड 9 January 2026 at 15:04 IST