अपडेटेड 4 January 2026 at 10:14 IST
Magh Month 2026 Snan Date : आज से शुरू हुआ माघ का महीना, जानें पुण्य स्नान की तिथियां और किन बातों का रखना है ध्यान
Magh Month 2026 Snan Date : हिंदू धर्म में माघ महीने को बेहद पवित्र माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस महीने में स्नान-दान और तप करने से व्यक्ति को मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है। अब ऐसे में माघ महीने में कब-कब स्नान करने की तिथियां हैं? इसके बारे में जानते हैं।
Magh Month 2026 Snan Date : सनातन धर्म में माघ मास का विशेष आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व है। हिंदू पंचांग के अनुसार, पौष पूर्णिमा के अगले दिन से माघ महीने की शुरुआत होती है, जो इस वर्ष 4 जनवरी 2026 से प्रभावी हो रही है। प्रयागराज के त्रिवेणी संगम पर लगने वाले सुप्रसिद्ध 'माघ मेला' का शुभारंभ भी 3 जनवरी को पौष पूर्णिमा के साथ हो चुका है।
मान्यता है कि इस पूरे माह में पवित्र नदियों में स्नान करने से मनुष्य के जन्म-जन्मान्तर के पाप धुल जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। अब ऐसे में माघ महीने में स्नान करने की शुभ तिथियां कौन-कौन सी है? इसके बारे में जानते हैं।
पुण्य स्नान की प्रमुख तिथियां
माघ के महीने में वैसे तो प्रतिदिन स्नान करना फलदायी है, लेकिन कुछ विशेष तिथियां ऐसी हैं जिनमें संगम या पवित्र नदियों में डुबकी लगाने का महत्व कई गुना बढ़ जाता है।
- मकर संक्रांति - 14 जनवरी,बुधवार
- मौनी अमावस्या - 18 जनवरी, रविवार
- बसंत पंचमी - 23 जनवरी, शुक्रवार
- माघी पूर्णिमा - 01 फरवरी, रविवार
- महाशिवरात्रि - 15 फरवरी, रविवार
माघ मास का धार्मिक महत्व क्या है?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, माघ मास में सभी देवी-देवता पृथ्वी पर आते हैं और प्रयागराज में संगम तट पर निवास करते हैं। पद्म पुराण में कहा गया है कि माघ के महीने में भगवान विष्णु की पूजा और तीर्थ स्नान करने से उतने ही पुण्य की प्राप्ति होती है, जितनी कि एक हजार अश्वमेध यज्ञ करने से मिलती है। इस मास को 'माधव मास' भी कहा जाता है, जो भगवान श्रीकृष्ण का ही एक नाम है।
माघ महीने में किन बातों का ध्यान रखें?
माघ के दौरान सूर्योदय से पूर्व स्नान करने का विधान है। यदि आप नदी किनारे नहीं जा सकते, तो घर पर ही जल में गंगाजल और काले तिल मिलाकर स्नान करें।
इस महीने में काले तिल, गुड़, घी, कंबल और गर्म वस्त्रों का दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
माघ में तामसिक भोजन न करें। कल्पवासी तो इस दौरान दिन में केवल एक बार ही सात्विक भोजन ग्रहण करते हैं।
Published By : Sagar Singh
पब्लिश्ड 4 January 2026 at 08:59 IST