अपडेटेड 15 December 2025 at 15:54 IST

Magh Mela 2026 Prayagraj: कब से शुरू होने जा रहा है माघ मेला? जानें स्नान की तिथि और कल्पवास का धार्मिक महत्व

Magh Mela 2026 Prayagraj: हिंदू धर्म में माघ मेला का विशेष महत्व है। वहीं ये मेला साधना, योग और और आध्यात्मिक शांति के लिए जाना जाता है। अब ऐसे में नए साल में कब से माघ मेला लगने जा रहा है और स्नान की सही तिथि और कल्पवास का महत्व क्या है? आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं।

Magh Mela 2026 Prayagraj | Image: Freepik

Magh Mela 2026 Prayagraj: सनातन धर्म में माघ मेले को सौभाग्य का कारक माना गया है। यह हर साल संगम नगरी प्रयागराज में आयोजन किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माघ मेले में स्नान करने से व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथ ही जीवन के सभी कष्टों से भी छुटकारा मिल जाता है। यही कारण है कि देश-विदेश से सभी श्रद्धालु हर साल माघ मेले में स्नान करने के लिए आते हैं। 

यह मेला केवल साधु-संतों के लिए ही नहीं, बल्कि गृहस्थ लोगों के लिए बेहद भाग्यशाली माना जाता है। माघ मेला आध्यात्मिक शांति के लिए जाना जाता है। अब ऐसे में नए साल में माघ मेला कब से आरंभ हो रहा है? माघ मेला स्नान की सही तिथि क्या है और कल्पवास का धार्मिक महत्व क्या है? आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं।

माघ मेला कब से हो रहा है शुरू? 

माघ मेले का आरंभ 3 जनवरी 2026 से होने जा रहा है और इसका समापन 15 फरवरी को होगा। ऐसा कहा जाता है कि माघ मास में डुबकी लगाने से व्यक्ति के मन और कर्म दोनों शुद्ध हो होते हैं। इसलिए हर साल माघ मेले में कई बड़े पैमाने में लोग स्नान करने के लिए आते हैं।

माघ मेले में स्नान की सही तिथि क्या है? 

माघ मेले में स्नान करने की सही तिथि के बारे में विस्तार से जान लें। 
3 जनवरी 2026- पौष पूर्णिमा
15 जनवरी 2026- मकर संक्रांति
18 जनवरी 2026- मौनी अमावस्या
23 जनवरी 2026- बसंत पंचमी
1 फरवरी 2026- माघ पूर्णिमा
15 फरवरी 2026- महाशिवरात्रि

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माघ मास में कल्पवास का क्या महत्व है? 

माघ महीने में कल्पवास का विशेष महत्व है। वहीं संगम तट पर एक माह तक साधना करने वालों को कल्पवास कहा गया है। महाभारत के अनुसार, ऐसा कहा जाता है कि माघ महीने में कल्पवास करने से व्यक्ति को सौ साल तक  बिना अन्न ग्रहण करके जो तपस्या का फल मिलता है। उतना ही फल कल्पवास करने से मिलता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव को त्रिपुर राक्षस के वध करने की क्षमता कल्पवास से ही हुई थी। कल्पवास एक रात्रि, तीन रात्रि, तीन महीने, छह महीने और 12 साल या फिर जीवनभर के लिए कल्पवास किया जाता है। पुराणों में भी लिखित है कि देवी-देवता भी आम मनुष्यों  की तरह पृथ्वी पर जन्म लेने की इच्छा रखते हैं ताकि वह आम लोगों की तरह जन्म लेकर प्रयागराज में कल्पवास कर सकें। 

Published By : Sujeet Kumar

पब्लिश्ड 15 December 2025 at 15:54 IST