Kedarnath Yatra 2026: बैल की पीठ की तरह क्यों है केदारनाथ में विराजित शिवलिंग? महाभारत काल से है गहरा नाता; जानिए क्या

Kedarnath Yatra 2026: हिमालय की गोद में स्थित केदारनाथ धाम न केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता बल्कि अपने अद्भुत त्रिकोणीय शिवलिंग के लिए भी विश्वभर में प्रसिद्ध है। वर्ष 2026 की यात्रा के दौरान श्रद्धालु एक बार फिर भगवान शिव के इस अनोखे रूप के दर्शन कर रहे हैं, जिसका गहरा नाता द्वापर युग और महाभारत की कथा से है।

Kedarnath Yatra 2026 | Image: Instagram

Kedarnath Yatra 2026: हिमालय की गोद में स्थित केदारनाथ धाम न केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि अपनी अद्भुत धार्मिक मान्यताओं और रहस्यों के लिए भी जाना जाता है। चारधाम यात्रा शुरू हो चुकी है और इस साल भी लाखों श्रद्धालु बाबा केदार के दर्शन के लिए उमड़ रहे हैं। केदारनाथ मंदिर की सबसे खास बात यहां स्थापित त्रिकोणीय शिवलिंग है। जहां देशभर के अन्य ज्योतिर्लिंग गोलाकार या अंडाकार हैं, वहीं यहाँ का शिवलिंग बैल की पीठ की तरह त्रिकोणीय क्यों है? इसके पीछे महाभारत काल की एक बेहद रोचक कथा है।

महाभारत काल और पांडवों का पश्चाताप

केदारनाथ के इतिहास का गहरा नाता महाभारत के युद्ध से है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, कुरुक्षेत्र के भीषण युद्ध के बाद पांडवों पर अपने ही सगे-संबंधियों और गुरुओं की हत्या का पाप गोत्र हत्या और ब्रह्म हत्या लगा था। इस पाप से मुक्ति पाने के लिए महर्षि व्यास ने उन्हें भगवान शिव की शरण में जाने की सलाह दी।

पांडव भगवान शिव को खोजने के लिए काशी पहुंचे, लेकिन महादेव युद्ध में हुए नरसंहार से पांडवों से रुष्ट थे और उन्हें दर्शन नहीं देना चाहते थे। इसलिए वे काशी छोड़कर गुप्तकाशी में चले गए।

जब महादेव ने लिया 'नंदी' का रूप

पांडव भी हार मानने वाले नहीं थे, वे महादेव का पीछा करते हुए हिमालय की पहाड़ियों तक पहुंच गए। पांडवों को अपने करीब देख भगवान शिव ने एक बैल का रूप धारण कर लिया और पशुओं के झुंड में शामिल हो गए।

पांडवों को संदेह हुआ कि महादेव इसी झुंड में छिपे हैं। तब भीम ने अपना विशाल रूप धारण किया और दो पहाड़ों पर पैर फैलाकर खड़े हो गए। सभी पशु भीम के पैरों के नीचे से निकल गए, लेकिन महादेव रूपी बैल ने ऐसा करने से मना कर दिया।

बैल स्वरूप में प्रकट हुए थे भोलेनाथ 

जैसे ही भीम ने बैल को पकड़ने की कोशिश की, भगवान शिव जमीन में समाने लगे। तभी भीम ने फुर्ती दिखाते हुए बैल की पीठ का कूबड़ पकड़ लिया। पांडवों की भक्ति और दृढ़ संकल्प देख महादेव प्रसन्न हुए और उन्हें दर्शन देकर पापों से मुक्त कर दिया। यही कारण है कि केदारनाथ में आज भी भगवान शिव की पूजा उसी 'कूबड़' के रूप में की जाती है, जो त्रिकोणीय आकार का है।

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Published By : Aarya Pandey

पब्लिश्ड 23 April 2026 at 07:48 IST