अपडेटेड 7 January 2026 at 14:37 IST

Kalashtami 2026: 10 या 11 जनवरी... कब है कालाष्टमी? जानें सही तारीख, कालभैरव की पूजा का शुभ मुहूर्त और महत्व

Kalashtami 2026 Kab Hai: कालाष्टमी का व्रत रखने से भगवान कालभैरव की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन के संकट धीरे-धीरे दूर होने लगते हैं। सही मुहूर्त में पूजा और व्रत करने से भगवान कालभैरव की कृपा मिलती है और जीवन में सुरक्षा, शांति और स्थिरता आती है।

कब है कलाष्टमी 2026 व्रत? | Image: Freepik

Kalashtami 2026 Vrat Date: कालाष्टमी भगवान कालभैरव की पूजा का विशेष दिन माना जाता है। यह व्रत हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने से भय, बाधा, शत्रु और नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव कम होता है। साल 2026 की पहली कालाष्टमी को लेकर लोगों के मन में भ्रम है कि यह 10 जनवरी को है या 11 जनवरी को। तो चलिए पंचांग के अनुसार इसकी सही तारीख, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि जानते हैं।

2026 की पहली कालाष्टमी की सही तिथि कबो क्या है?

पंचांग के अनुसार, माघ मास कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 10 जनवरी 2026 यानी शनिवार सुबह 8:23 बजे से शुरू होगी। अगले दिन 11 जनवरी 2026 यानी रविवार सुबह 10:20 बजे तक समाप्त हो जाएगी। कालाष्टमी की पूजा रात में निशिता काल में की जाती है और इसमें उदया तिथि का नियम लागू नहीं होता है। इसी कारण साल 2026 की पहली कालाष्टमी 10 जनवरी को ही मनाई जाएगी। इस दिन व्रत और पूजा करना शुभ और फलदायी रहेगा।

कालाष्टमी का धार्मिक महत्व क्या है?

भगवान कालभैरव, भगवान शिव के उग्र रूप माने जाते हैं। वे समय, न्याय और सुरक्षा के अधिपति हैं। कालाष्टमी के दिन पूजा करने से भय और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है। इसके अलावा शत्रु बाधा कम होती है। साथ ही, कालसर्प दोष, शनि और राहु के दुष्प्रभाव शांत होते हैं। मानसिक शांति और आत्मबल मिलता है। नियमित पूजा से जीवन में स्थिरता और सुरक्षा बनी रहती है।

कालाष्टमी 2026 का शुभ मुहूर्त क्या है?

कालाष्टमी की पूजा निशिता काल में करना सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। निशिता काल 10 जनवरी की रात 12:02 बजे से 12:56 बजे तक यानी 11 जनवरी तक रहेगा। इस समय पूजा करने से पुण्य फल कई गुना बढ़ जाता है।

कालाष्टमी 2026 की सरल पूजा विधि क्या है?

  • सबसे पहले सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें।
  • पूजा स्थान पर दीपक जलाएं या कालभैरव मंदिर जाएं।
  • भगवान कालभैरव का ध्यान करें।
  • रुद्राक्ष माला से “ॐ कालभैरवाय नमः” मंत्र का जप करें।
  • धूप, दीप, फूल और फल अर्पित करें।
  • इस दिन उपवास रखें और रात में पूजा करें।
  • घर में कालभैरव की मूर्ति या चित्र न रखें, मंदिर में पूजा करना बेहतर होता है।
  • कालभैरव का वाहन कुत्ता है, इसलिए काले कुत्ते को भोजन कराना बहुत शुभ माना जाता है।

किन लोगों को जरूर करनी चाहिए कालाष्टमी की पूजा?

  • जिनकी कुंडली में कालसर्प दोष हो, उनके लिए कालाष्टमी की पूजा करना बेहद शुभ माना जाता है।
  • इसके अलावा जिन पर शनि या राहु का बुरा प्रभाव होता है, उन्हें कालाष्टमी की पूजा करनी चाहिए।
  • वहीं अगर जीवन में बार-बार बाधाएं आती हैं या भय या अस्थिरता बनी रहती है, तो आपको कालाष्टमी की पूजा जरूर करनी चाहिए।

साल 2026 की पहली कालाष्टमी 10 जनवरी यानी शनिवार को है। 10 जनवरी 2026 को कालाष्टमी का व्रत रखने से भगवान कालभैरव की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन के संकट धीरे-धीरे दूर होने लगते हैं। सही मुहूर्त में पूजा और व्रत करने से भगवान कालभैरव की कृपा मिलती है और जीवन में सुरक्षा, शांति और स्थिरता आती है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ अलग-अलग सूचना और मान्यताओं पर आधारित है। REPUBLIC BHARAT इस आर्टिकल में दी गई किसी भी जानकारी की सत्‍यता और प्रमाणिकता का दावा नहीं करता है।

Published By : Samridhi Breja

पब्लिश्ड 7 January 2026 at 14:37 IST