अपडेटेड 8 February 2026 at 22:29 IST

Kalashtami February 2026: 9 या 10 फरवरी... कब है कालाष्टमी? जानें कालभैरव की पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि और महत्व

Kalashtami 2026 Kab Hai: कालाष्टमी का व्रत रखने से भगवान कालभैरव की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन के संकट धीरे-धीरे दूर होने लगते हैं। सही मुहूर्त में पूजा और व्रत करने से भगवान कालभैरव की कृपा मिलती है और जीवन में सुरक्षा, शांति और स्थिरता आती है।

फरवरी 2026 में कालाष्टमी कब है? | Image: Freepik

Kalashtami 2026 Date: सनातन धर्म में कालाष्टमी व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। यह व्रत हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है और यह दिन भगवान शिव के रौद्र स्वरूप काल भैरव को समर्पित होता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से पूजा करने पर सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं, जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। तो चलिए जानते हैं कब है कालाष्टमी और जानेंगे शुभ मुहूर्त और धार्मिक महत्व-

फरवरी 2026 में कालाष्टमी कब है?

वैदिक पंचांग के अनुसार, फरवरी 2026 की कालाष्टमी 9 फरवरी, सोमवार को मनाई जाएगी। इस दिन योग वृद्धि 10 फरवरी की रात 12 बजकर 52 मिनट तक रहेगी, जिससे इस व्रत का महत्व और भी बढ़ जाता है।

कालाष्टमी पर पूजा का शुभ मुहूर्त

इस दिन आप नीचे दिए गए शुभ मुहूर्त में भगवान काल भैरव की पूजा कर सकते हैं:

  • ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 5:21 से 6:12 बजे तक
  • अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:13 से 12:57 बजे तक
  • विजय मुहूर्त: दोपहर 2:27 से 3:10 बजे तक
  • गोधूलि मुहूर्त: शाम 6:04 से 6:30 बजे तक
  • अमृत काल: रात 10:04 से 11:52 बजे तक

इन समयों में की गई पूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है।

कालाष्टमी पर अशुभ समय

  • राहुकाल: सुबह 8:27 से 9:50 बजे तक
  • यमगंड: सुबह 11:13 से दोपहर 12:35 बजे तक
  • गुलिक काल: दोपहर 1:58 से 3:21 बजे तक
  • आडल योग: पूरे दिन

इन समयों में शुभ कार्य करने से बचना चाहिए।

कालाष्टमी पूजा विधि 

  • सुबह स्नान करें: ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें।
  • व्रत का संकल्प लें: हाथ में जल लेकर भगवान शिव और काल भैरव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें।
  • पूजा स्थान तैयार करें: चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाकर उस पर भैरव बाबा की तस्वीर या मूर्ति रखें।
  • दीपक जलाएं: सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
  • विशेष अर्पण: नींबू, काले तिल, उड़द की दाल और सरसों का तेल अर्पित करें।
  • भोग लगाएं: काले चने, हलवा, खीर और पूए का भोग लगाएं।
  • मंत्र जाप करें: “ॐ कालभैरवाय नमः” मंत्र का 108 बार जाप करें।
  • आरती करें: अंत में भैरव बाबा की आरती कर पूजा पूर्ण करें।

कालाष्टमी का धार्मिक महत्व

कालाष्टमी पर विधि-विधान से व्रत और पूजा करने से सभी इच्छाएं पूरी होती हैं। मान्यता है कि काल भैरव की उपासना से भगवान शिव भी प्रसन्न होते हैं। इससे अज्ञात भय दूर होता है, गुप्त शत्रुओं का नाश होता है, रोगों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-शांति आती है। जो लोग लंबे समय से परेशानियों से जूझ रहे हैं, उनके लिए यह व्रत विशेष फलदायी माना जाता है।

 

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ अलग-अलग सूचना और मान्यताओं पर आधारित है। REPUBLIC BHARAT इस आर्टिकल में दी गई किसी भी जानकारी की सत्‍यता और प्रमाणिकता का दावा नहीं करता है।

Published By : Samridhi Breja

पब्लिश्ड 8 February 2026 at 16:32 IST