Dahi Handi 2026: जन्माष्टमी के अगले दिन क्यों मनाया जाता है दही हांडी का उत्सव, जानिए युवाओं के मटकी फोड़ने के पीछे का कारण
Dahi Handi 2026: जनमाष्टमी के अगले दिन देश के कई राज्यों में दही हांडी का तयोहार बड़े धूम-धाम से मनाया जाता है। लेकिन बहुत से लोग ये नहीं जानते कि दही हांडी का तयोहार किस कारण मनाया जाता है।
- धर्म और अध्यात्म
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Dahi Handi 2026: जन्माष्टमी के त्योहार पर पूरे देश भर में भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति और उनके आगमन की तैयारियों में जुटे हुए हैं। जनमाष्टमी के अगले दिन देश के कई राज्यों में दही हांडी का तयोहार बड़े धूम-धाम से मनाया जाता है। लेकिन बहुत से लोग ये नहीं जानते कि दही हांडी का तयोहार किस कारण मनाया जाता है।
क्यों मनाते हैं दही हांडी
दिल्ली के इस्कॉन मंदिर के पंडित लक्ष्मी नरसिंह दास ने दही हांडी उत्सव के पीछे का कारण बताया। उनके अनुसार श्रीकृष्ण को माखन और दही बेहद पसंद था। भगवान बचपन में श्रीदामा, सुदामा, मधुमंगल, सुबल और सुबाहु जैसे अपने सभी सखाओं के साथ गोकुल की गलियों में घूमते थे। इस दौरान उन्हें किसी भी घर में माखन-दही की मटकी दिखाई देती तो वो उसे चुराकर खा लेते थे। इस सबसे गोपियाँ बहुत परेशान रहती थी।
मटकी टांग दी ऊंचाई पर
पंडित लक्ष्मी नरसिंह दास ने बताया कि फिर गोपियों ने कृष्ण जी से माखन बचाने के लिए मटकी काफी ऊंचाई पर लटकाना शुरू कर दिया। लेकिन नटखट कृष्ण जी ने इसका तोड़ निकाल लिया। उन्होंने अपने सभी दोस्तों को एक साथ करके एक दूसरे के ऊपर चढ़कर मानव पिरामिड बनाकर मटकी फोड़ माखन खाने की योजना बनाई। पिरामिड में सबसे ऊपर खड़ा व्यक्ति ही मटकी फोड़ता था।
दही हांडी के रूप में इसी लीला को मनाते हैं
इस कारण भक्तजन भगवान कृष्ण की इसी लीला को दही हांडी के रूप में पूरे उत्सव के साथ मनाते हैं। मथुरा- वृंदावन ही नहीं मुंबई में भी दही हांडी उत्सव बहुत बड़े स्तर पर मनाया जाता है। युवाओं की टोली दही और मक्खन से भारी मटकी को तोड़ने के लिए बड़े बड़े पिरामिड बनाकर एक दूसरे के ऊपर चड़ते हैं। सबसे ऊपर चड़े व्यक्ति को गोविंदा कह कर संबोधित किया जाता है और जब वो मटकी फोड़ता है तभी यह तयोहार पूरा होता है।
Published By : Kritarth Sardana
पब्लिश्ड 3 September 2026 at 23:57 IST