अपडेटेड 19 March 2026 at 10:45 IST
Chaitra Navratri 2026: आज चैत्र नवरात्रि का पहला दिन, जानें शाम की पूजा मुहूर्त से लेकर विधि, मंत्र और आरती
Chaitra Navratri 2026: आज चैत्र नवरात्रि का पहला दिन है। इस दिन मां शैलपुत्री की पूजा विधिवत रूप से करने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी हो सकती है। अब ऐसे में शाम की पूजा के लिए मुहूर्त और विधि के बारे में जानने के लिए इस लेख को विस्तार से पढ़ें।
Chaitra Navratri 2026: आज यानी 19 मार्च 2026, गुरुवार से शक्ति की उपासना का महापर्व चैत्र नवरात्रि शुरू हो गया है। इसी के साथ हिंदू नववर्ष विक्रम संवत 2083 का भी शुभारंभ हो चुका है। नवरात्रि के नौ दिन मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों को समर्पित होते हैं। पहले दिन पर्वतराज हिमालय की पुत्री मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है, जो स्थिरता और शक्ति का प्रतीक हैं।
अब ऐसे में आज शाम को मां शैलपुत्री की पूजा का शुभ मुहूर्त और विधि के साथ-साथ मंत्र और आरती क्या है? आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं।
मां शैलपुत्री की शाम की पूजा का शुभ मुहूर्त
अगर आप सुबह के समय घटस्थापना या विशेष पूजा नहीं कर पाए हैं, तो शाम के समय भी श्रद्धापूर्वक मां की आरती और वंदना कर सकते हैं।
गोधूलि मुहूर्त- शाम 06:35 से शाम 06:59 तक।
सायाह्न सन्ध्या- शाम 06:33 से रात 07:44 तक।
अमृत काल- रात 08:52 से रात 10:35 तक।
मां शैलपुत्री की पूजा किस विधि से करें?
स्नान के बाद पीले या सफेद वस्त्र धारण करें।
पूजा स्थान पर घी का दीपक अंखड ज्योत जलाएं।
मां शैलपुत्री को गाय के घी का भोग लगाएं या सफेद रंग की मिठाई अर्पित करें।
माता को सफेद फूल, अक्षत और सिंदूर चढ़ाएं।
मां शैलपुत्री की व्रत कथा का पाठ करें और उनके विशेष मंत्रों का जाप करें।
मां शलपुत्री की पूजा के लिए मंत्र
मां शैलपुत्री की पूजा में मंत्र का उच्चारण उत्तम फलदायी माना जाता है। मंत्र के बिना पूजा अधूरी मानी जाती है।
- वंदे वांछितलाभाय चंद्रार्धकृतशेखराम।
वृषारूढ़ां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम॥ - या देवी सर्वभूतेषु मां शैलपुत्री रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥ - प्रथम दुर्गा त्वं हि भवसागर तारणीम्।
धन ऐश्वर्य दायिनी शैलपुत्री प्रणमाम्यहम्॥ - शिवरूपा वृषारूढ़ा हिमालयात्मजा शुभाम्।
शैलपुत्रीं प्रपन्नोऽस्मि रक्ष मां सुरासुरैः॥
मां शैलपुत्री की आरती
मां शैलपुत्री की आरती पूजा करने के बाद करना बेहद महत्वपूर्ण और शुभ माना जाता है। इसलिए आरती अवश्य करें।
शैलपुत्री माँ बैल पर सवार। करें देवता जय जयकार॥
शिव शंकर की प्रिय भामिनी। जय जय माँ शैलपुत्री कामिनी॥
प्रथम रूप तेरा पावन प्यारा। भक्तों ने जब हृदय से पुकारा॥
दाहिने हाथ में त्रिशूल धारे। बाएं हाथ में कमल सुधारे॥
मस्तक पर सोहे अर्ध चन्द्र। जपते भक्त तुम्हारे मंत्र॥
सफेद वस्त्र अति मन को भावे। जो ध्यावे सो फल पावे॥
हिमालय की तुम हो दुलारी। भक्तों की तुम रक्षक भारी॥
ऋद्धि-सिद्धि के भंडार भरती। दुःख-दरिद्रता दूर तुम करती॥
शैलपुत्री की आरती जो कोई गावे। मनवांछित फल निश्चय पावे॥
प्रेम से बोलो जय शैलपुत्री। कष्ट हरो तुम जय शैलपुत्री॥
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ अलग-अलग सूचना और मान्यताओं पर आधारित है। REPUBLIC BHARAT इस आर्टिकल में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता और प्रमाणिकता का दावा नहीं करता है।
Published By : Aarya Pandey
पब्लिश्ड 19 March 2026 at 10:44 IST