अपडेटेड 19 March 2026 at 17:28 IST

Chaiti Chhath 2026: 22 मार्च से शुरू होगा चैती छठ, जानें खरना से लेकर उगते सूर्य को अर्घ्य तक की सभी तिथि; कार्तिक छठ से क्यों है अलग?

Chaiti Chhath 2026: हिंदू कैलेंडर के अनुसार, साल में दो बार छठ पूजा का आयोजन होता है। लोक आस्था का महापर्व 'चैती छठ' इस वर्ष 22 मार्च 2026 से शुरू होने जा रहा है। चार दिनों तक चलने वाला यह कठिन अनुष्ठान न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का भी माध्यम है।

Chaiti Chhath 2026 | Image: Meta AI

Chaiti Chhath 2026:  हिंदू धर्म में छठ पूजा का विशेष महत्व है। आमतौर पर लोग कार्तिक मास के छठ को बड़े स्तर पर जानते हैं, लेकिन साल में दो बार सूर्य देव की आराधना का यह महापर्व मनाया जाता है। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष में मनाए जाने वाले इस पर्व को 'चैती छठ' कहा जाता है। साल 2026 में चैती छठ की शुरुआत 22 मार्च से होने जा रही है। अब ऐसे में कब से चैती छठ शुरू हो रहा है और यह कार्तिक छठ से क्यों अलग है? आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं।

नहाय-खाय से पारण तक की तिथि और विधि

नहाय-खाय 22 मार्च 2026

इस दिन व्रती नदी या जलाशय में स्नान कर नए वस्त्र धारण करते हैं। भोजन में कद्दू की सब्जी, चने की दाल और अरवा चावल का सेवन किया जाता है।

खरना 23 मार्च 2026

यह दिन आत्म-शुद्धि का होता है। शाम को मिट्टी के चूल्हे पर गुड़ की खीर और रोटी बनाई जाती है। इसे ग्रहण करने के बाद व्रती का 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरू हो जाता है।

संध्या अर्घ्य 24 मार्च 2026

सूप और दउरा में फल, ठेकुआ और नैवेद्य सजाकर व्रती कमर तक पानी में खड़े होकर डूबते सूर्य को अर्घ्य देते हैं।

उषा अर्घ्य 25 मार्च 2026

समापन के दिन सूर्योदय की पहली किरण को अर्घ्य दिया जाता है, जिसके बाद कच्चा दूध और प्रसाद खाकर व्रत खोला जाता है।

कार्तिक छठ और चैती छठ में क्या अंतर है?

कार्तिक छठ शरद ऋतु के आगमन पर मनाया जाता है, जबकि चैती छठ वसंत और ग्रीष्म ऋतु के संधिकाल में आता है। कार्तिक छठ का आयोजन बहुत व्यापक होता है और इसे 'बड़ा छठ' माना जाता है। वहीं, चैती छठ मुख्य रूप से बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। चैती छठ का संबंध चैत्र नवरात्रि से भी है। ऐसा माना जाता है कि माता सीता और भगवान राम ने रावण वध के बाद चैत्र मास में ही सूर्य देव की उपासना की थी। इसलिए चैत्र महीने में छठ करने का विधान है। इसे चैती छठ भी कहते हैं।

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चैती छठ का ज्योतिष महत्व क्या है? 

ज्योतिष शास्त्र में चैत्र का महीना वह समय होता है जब सूर्य अपनी उच्च राशि मेष में प्रवेश करने के निकट होता है या प्रवेश कर चुका होता है। ज्योतिष में सूर्य का उच्च का होना ऊर्जा, जीवनशक्ति और आरोग्यता का प्रतीक है। सूर्य के उत्तरायण काल में होने के कारण इस समय दी जाने वाली अर्घ्य से सकारात्मक ऊर्जा का संचरण तीव्र होता है। इतना ही नहीं, छठ पर्व षष्ठी तिथि को मनाया जाता है। ज्योतिष शास्त्र में षष्ठी तिथि के अधिष्ठाता भगवान कार्तिकेय हैं और इसकी शक्ति देवी कात्यायनी छठी मइया से जुड़ी है। यह तिथि संतान की रक्षा, दीर्घायु और वंश वृद्धि के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है।

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ अलग-अलग सूचना और मान्यताओं पर आधारित है। REPUBLIC BHARAT इस आर्टिकल में दी गई किसी भी जानकारी की सत्‍यता और प्रमाणिकता का दावा नहीं करता है।

Published By : Aarya Pandey

पब्लिश्ड 19 March 2026 at 17:28 IST