Sawan 2026: भगवान शिव के प्रिय सावन महीने में दही और कढ़ी क्यों नहीं खानी चाहिए? यह है असली वजह
Sawan 2026: हिंदू धर्म में सावन का महीना सौभाग्य का कारक माना जाता है। यह महीना भगवान शिव की समर्पित है। अब ऐसे में इस महीने में दही और कढ़ी क्यों खाना वर्जित माना जाता है? आइए जानते हैं।
- धर्म और अध्यात्म
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Sawan 2026: भगवान शिव का अतिप्रिय महीना सावन धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस पूरे महीने में भक्त व्रत, उपवास और पूजा-पाठ में लीन रहते हैं। सावन के दौरान खान-पान के कई नियम बताए गए हैं, जिनमें से एक प्रमुख नियम है दही और कढ़ी का सेवन न करना।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि सावन में दही, कढ़ी या छाछ वर्जित करने के पीछे केवल धार्मिक मान्यता ही नहीं, बल्कि गहरा वैज्ञानिक और आयुर्वेदिक कारण भी है? आइए विस्तार से जानते हैं इसके मुख्य कारण।
धार्मिक और पौराणिक मान्यताएं
धार्मिक दृष्टि से सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित होता है। इस दौरान शिवलिंग पर दूध और दही का अभिषेक किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, जिन चीजों को भगवान शिव को अर्पण किया जाता है, या जो चीजें कच्चे दूध व दही से जुड़ी होती हैं, उनका सावन में त्याग करना सात्विक दिनचर्या का हिस्सा माना जाता है। इसके अलावा, कच्चे दूध में कीटाणु पनपने की संभावना के कारण भी इसे कच्चा पीने के बजाय शिवजी पर अर्पित करने की परंपरा बनी।
वात और कफ दोष
आयुर्वेद के अनुसार सावन के मौसम में मानव शरीर में वात दोष प्राकृतिक रूप से बढ़ता है। दही और कढ़ी की तासीर ठंडी और खट्टी होती है, जो शरीर में कफ और वात दोष को और अधिक बढ़ा देती है। वात बढ़ने से जोड़ों में दर्द, गैस, ब्लोटिंग और एसिडिटी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
कमजोर पाचन तंत्र और बैक्टीरिया
मानसून के दौरान वातावरण में नमी बहुत बढ़ जाती है। इस मौसम में पाचन तंत्र कमजोर हो जाता है। दही और बेसन से बनी कढ़ी भारी होती हैं। कमजोर पाचन तंत्र इन्हें आसानी से पचा नहीं पाता है।
Published By : Aarya Pandey
पब्लिश्ड 29 July 2026 at 18:32 IST