'पश्चिम एशिया की हालत चिंताजनक, संकट के समय भारत की एकमत और एक आवाज दुनिया को सुनाई देनी चाहिए', लोकसभा में बोले PM मोदी

मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष पर प्रधानमंत्री मोदी ने मंगलवार को लोकसभा में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, 'भारत के सामने इस युद्ध ने अप्रत्याशित चुनौतियां खड़ी की हैं। मगर हम संकट से निपटने में सक्षम है।'

PM Modi | Image: Youtube

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और ईरान-इजरायल के ताजा हालात पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में अपनी बात रखी। PM मोदी ने कहा, "मैं पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और इस कारण भारत में आई समस्या पर बात रखने के लिए उपस्थित हुआ हूं। वहां हालात चिंताजनक हैं। इस संकट को 3 सप्ताह से ज्यादा हो रहा है। हमारी प्राथमिकता अपने नागरिकों को युद्ध क्षेत्र से सुरक्षित निकालना है। साथ ही युद्ध की वजह से उत्पन्न हुए गैस और तेल संकट से निपटना है।"

प्रधानमंत्री मोदी ने लोकसभा में कहा "मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष की वजह से पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था और लोगों के जीवन पर विपरीत असर हो रहा है। भारत के सामने भी इस युद्ध ने अप्रत्याशित चुनौतियां खड़ी की हैं। हम इन चुनौतियों से निपटने की लगातार तैयारी भी कर रहे हैं। गल्फ देशों की सरकार से हमारी लगातार बात हो रही है।"

हमारे नागरिक हमारी प्राथमिकता-PM मोदी

पीएम मोदी ने आगे कहा,' युद्ध शुरू होने के साथ ही हम सबसे पहले खाड़ी देशों में फंसे भारतीय को सुरक्षित निकाल रहे हैं। अब तक करीब 3 लाख से ज्यादा भारतीयों को सुरक्षित देश लाया गया है। हमारी सरकार का मानना है कि संकट के समय भारत की एकमत और एक आवाज दुनिया को सुनाई देनी चाहिए।'

ऑयल और गैस की किल्लत पर क्या बोले PM मोदी?

वेस्ट एशिया विवाद पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, "भारत के उन देशों के साथ बड़े पैमाने पर ट्रेड रिलेशन हैं जो लड़ाई में हैं और लड़ाई से प्रभावित हैं। जिस इलाके में लड़ाई हो रही है, वह दुनिया भर के दूसरे देशों के साथ हमारे ट्रेड के लिए भी एक ज़रूरी रास्ता है, खासकर हमारी क्रूड ऑयल और गैस की जरूरतों के एक बड़े हिस्से के लिए। यह इलाका हमारे लिए एक और वजह से भी ज़रूरी है।"

 भारत की एक आवाज दुनिया को सुनाई देनी चाहिए-PM मोदी?

पीएम मोदी ने लोकसभा में बताया कि "लगभग 1 करोड़ भारतीय खाड़ी देशों में रहते और काम करते हैं। वहां कमर्शियल जहाज चलते हैं। भारतीय क्रू मेंबर्स की संख्या भी बहुत ज़्यादा है। इन अलग-अलग वजहों से, भारत की चिंताएं स्वाभाविक रूप से ज़्यादा हैं। इसलिए, यह जरूरी है कि इस संकट के बारे में पार्लियामेंट से दुनिया तक एक आवाज और आम सहमति पहुंचे।"

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Published By : Rupam Kumari

पब्लिश्ड 23 March 2026 at 14:23 IST