जब लवलीना को मिली तारीफ, लेकिन मीराबाई चानू उड़ा ले गईं मिठाई पीएम मोदी ने बताया किस्सा; वीडियो हो रहा वायरल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने आवास पर ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेल 2026 के भारतीय पदक विजेताओं की मेजबानी की। लवलीना बोरगोहेन से पीएम ने रेस्टोरेंट में तिरंगे के सही रूप को लेकर हुए विवाद पर उनसे चर्चा की। लवलीना की राष्ट्रध्वज के प्रति सजगता की सराहना करते हुए मोदी जी ने कहा कि देश उनके इस विचारशील कदम को लंबे समय तक याद रखेगा। वहीं मीराबाई को पीएम ने खुद लड्डू खिलाकर बधाई दी।
- प्रधान सेवक नरेंद्र मोदी
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ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए देश का सिर गर्व से ऊंचा किया। हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने आवास पर पदक विजेताओं के साथ मुलाकात की और उनके अनुभवों को करीब से सुना। इस खास बैठक में खेल मंत्री मनसुख मंडाविया, खेल राज्य मंत्री रक्षा खडसे और आईओए (IOA) अध्यक्ष पी.टी. उषा भी मौजूद थीं। पीएमओ द्वारा साझा किए गए वीडियो में खिलाड़ियों और प्रधानमंत्री के बीच आत्मीय और दिलचस्प बातचीत देखने को मिली।
लवलीना और रेस्टोरेंट का दिलचस्प किस्सा
75 किग्रा वर्ग में रजत पदक जीतने वाली असम की स्टार मुक्केबाज़ लवलीना बोरगोहेन से पीएम मोदी ने मुस्कुराते हुए पूछा, 'क्या हुआ, वो रेस्टोरेंट वाले से झगड़ा कर रही थी?'
इस पर लवलीना ने हंसते हुए जवाब दिया, ‘सर, खेलों का आखिरी दिन था और हम अपनी जीत का जश्न मना रहे थे। तभी मेरी नज़र वहां लगे एक गलत भारतीय तिरंगे पर पड़ी। मुझे यह बिल्कुल अच्छा नहीं लगा। मैंने बेहद विनम्रता से रेस्टोरेंट प्रबंधन को इस बारे में बताया और उन्होंने तुरंत झंडे में सुधार कर लिया।’ प्रधानमंत्री मोदी ने लवलीना के इस कदम की दिल खोलकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि जश्न के माहौल में भी देश के झंडे और मान-चित्र का ध्यान रखना एक बहुत बड़ी बात है। लोग इस घटना को लंबे समय तक याद रखेंगे।
मीराबाई चानू का भावुक पल और पीएम की मिठास
48 किग्रा वर्ग में रिकॉर्ड 190 किग्रा भार उठाकर स्वर्ण पदक जीतने वाली मीराबाई चानू से पीएम मोदी ने पोडियम पर उनके रोने की वजह पूछी। बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने खुद अपने हाथों से मीराबाई को लड्डू खिलाकर उनकी पीठ थपथपाई। मीराबाई ने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए कहा, ‘पेरिस ओलंपिक में मैं सिर्फ एक किलोग्राम से पदक से चूक गई थी। पिछले चार सालों में चोटों और पारिवारिक समस्याओं के कारण मैंने बहुत संघर्ष किया। जब स्वर्ण मिला, तो चार साल से रुका हुआ दर्द और खुशी आंसुओं के रूप में बाहर निकल आए।’
Published By : Aarya Pandey
पब्लिश्ड 10 August 2026 at 16:35 IST