'आज दुनिया जिस तरह के संघर्षों से गुजर रही...', PM मोदी ने मिडिल ईस्ट में जारी तनाव का किया जिक्र, 'बुद्ध के विचारों' की समझाई अहमियत?

Mann Ki Baat: पीएम मोदी ने आज 'मन की बात' में कहा कि दुनिया जिस तरह के तनावों और संघर्षों से गुजर रही है। ऐसे समय में बुद्ध के विचार और भी अहम हो गए हैं।

Mann ki baat | Image: X

PM Modi: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज 'मन की बात' कार्यक्रम के 133वें एपिसोड को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि आज दुनिया जिस तरह के तनावों और संघर्षों से गुजर रही है। ऐसे चुनौतीपूर्ण समय में बुद्ध के विचार और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो गए हैं।

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में आगे कहा कि मई महीने की शुरुआत एक पावन अवसर के साथ होने जा रही है। क्योंकि कुछ ही दिनों में बुद्ध पूर्णिमा मनाई जाएगी।

खुद पर विजय ही सबसे बड़ी विजय- PM

उन्होंने आगे सभी देशवासियों को अपनी अग्रिम शुभकामनाएं दी। साथ ही कहा कि भगवान गौतम बुद्ध का जीवन संदेश आज भी उतना ही प्रासंगिक है। उन्होंने हमें सिखाया है कि शांति हमारे भीतर से शुरू होती है। उन्होंने यह भी बताया है कि खुद पर विजय ही सबसे बड़ी विजय होती है।

चिली की संस्था का किया जिक्र

प्रधानमंत्री ने दक्षिण अमेरिका के चिली की एक संस्था का जिक्र किया जो भगवान बुद्ध के विचारों को आगे बढ़ा रही है। उन्होंने कहा कि लद्दाख में जन्मे ड्रबपोन ओत्जर रिनपोचे (Drubpon Otzer Rinpoche) के मार्गदर्शन में काम हो रहा है। ये संस्था ध्यान और करुणा को लोगों के जीवन से जोड़ रही है। कोचीगुआज घाटी में बना स्तूप लोगों को शांति का अनुभव कराता है। यह देखकर वाकई गर्व होता है। उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीन धारा दुनिया तक पहुंच रही है और दूर-दराज के लोग भी इससे जुड़ रहे हैं।

कर्नाटक की कर्मा मोनेस्ट्री का क्यों दिया उदाहरण?

उन्होंने कहा कि बौद्ध परंपरा हमें प्रकृति से जुड़ना भी सिखाती है। उन्होंने भगवान बुद्ध से जुड़ी जानकारी देते हुए कहा कि उन्हें ज्ञान एक पेड़ के नीचे मिला था। ऐसे में प्रकृति हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा है। ऐसे ही प्रयास देश में भी हो रहे हैं। इसके लिए उन्होंने कर्नाटक में Karma Monastery का उदाहरण दिया।

पीएम मोदी ने कहा कि यह मठ (Karma Monastery) एक जीवंत वन क्षेत्र है जो सौ एकड़ में फैला हुआ है। इस वन में 700 से ज्यादा देसी पेड़ों को संरक्षित किया गया है। बुद्ध का संदेश सिर्फ अतीत नहीं है, बल्कि यह आज भी प्रासंगिक होने के साथ-साथ भविष्य के लिए भी जरूरी है। बुद्ध पूर्णिमा का यह अवसर प्रेरणा देता है कि हम अपने जीवन में शांति बढ़ाएं, करुणा अपनाएं और संतुलन के साथ आगे बढ़ें।

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Published By : Priyanka Yadav

पब्लिश्ड 26 April 2026 at 12:22 IST