अपडेटेड 20 November 2025 at 13:50 IST

Indoor Air Pollution: घर में ये 5 चीजें जलती हैं तो बढ़ सकता है COPD का जोखिम, फेफड़ों के लिए बड़ा खतरा

घर की जहरीली हवा COPD का प्रमुख कारण बन सकती है, इससे आपके फेफड़ों को भारी नुकसान पहुंच सकता है, जानते हैं क्या है ये? अधिकतर लोगों को इसके बारे में नहीं पता।

घर की जहरीली हवा खराब कर रही आपके फेफड़े | Image: Freepik

हर साल नवंबर के तीसरे बुधवार को वर्ल्ड COPD (क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज) डे मनाया जाता है, इस अवसर पर हम आपको घर की वायु गुणवत्ता के बारे में बताने जा रहे हैं। इस साल थीम 'स्वस्थ फेफड़े, स्वस्थ घर' रखी गई है, जिससे घर की हवा के खतरों को उजागर किया जा सके। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, भारत में सीओपीडी के मामलों में पिछले 5 वर्षों में 15 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) एक प्रगतिशील फेफड़े की बीमारी है, जो धूम्रपान के अलावा भी कई कारणों से उत्पन्न हो सकती है। भारत में सबसे खतरनाक वायु वह है, जिसमें लोग अपने घरों के भीतर सांस लेते हैं।

COPD के बड़े घरेलू कारण

खाना पकाने के दौरान उत्पन्न धुआं, अगरबत्ती, मच्छर कॉइल, रूम फ्रेशनर और अपर्याप्त वेंटिलेशन सीओपीडी के जोखिम को बढ़ाते हैं । ग्रामीण और छोटे शहरों में लकड़ी, कोयला, पराली या गोबर से चलने वाले पारंपरिक चूल्हे रोजाना उपयोग में होते हैं, जिससे सूक्ष्म कण और विषाक्त गैसें निकलती हैं। ये कण फेफड़ों में जमा होकर दीर्घकालिक क्षति पहुंचाते हैं।

लगातार इन धुएं के संपर्क में रहने से पुरानी खांसी, कफ, सांस लेने में कठिनाई और जिससे सीओपीडी हो सकता है, भले ही व्यक्ति ने कभी धूम्रपान न किया हो,  विशेष रूप से महिलाएं, बुजुर्ग और छोटे बच्चे, जो ज्यादा समय रसोई के पास बिताते हैं, उन्हें इसका ज्यादा खतरा रहता है।

बचाव के प्रभावी उपाय

घर में वायु गुणवत्ता सुधार के लिए ये कदम उठाएं

  • रसोई में एग्जॉस्ट फैन या चिमनी स्थापित करें। 
  • स्वच्छ ईंधन (एलपीजी या इंडक्शन) का उपयोग करें।
  • अगरबत्ती, मच्छर कॉइल और तेज रूम फ्रेशनर से बचें।
  • नियमित रूप से खिड़कियां खोलकर ताजी हवा आने दें।
  • धूल और फफूंद हटाने के लिए घर की सफाई रखें।
  • धुएं वाले क्षेत्रों में मास्क पहनें।

इन उपायों के अलावा, घर में एलोवेरा, सैन्सवेरिया जैसे हवादार पौधे रखना भी वायु को शुद्ध करने में सहायक माना जाता है, हालांकि यह वैज्ञानिक रूप से अभी सिद्ध नहीं हुआ है।

विशेषज्ञ की चेतावनी

सीओपीडी को अक्सर ‘धूम्रपान करने वालों की बीमारी’ कहा जाता है, लेकिन भारत में कई महिलाएं और गैर‑धूम्रपान करने वाले लोग घर की खराब हवा के कारण पीड़ित हैं। उन्होंने घर के अंदर के वायु प्रदूषण को एक गंभीर जोखिम कारक के रूप में पहचानने की जरूरत है। वर्ल्ड सीओपीडी डे पर जागरूकता बढ़ाने के साथ, घर में स्वच्छ वायु सुनिश्चित करना अब व्यक्तिगत स्वास्थ्य की प्राथमिकता बननी चाहिए। छोटे बदलाव जैसे बेहतर वेंटिलेशन और स्वच्छ ईंधन का उपयोग, फेफड़ों की दीर्घकालिक स्वास्थ्य को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। 

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Disclaimer: इस आर्टिकल में बताई विधियां, तरीके और दावे अलग-अलग जानकारियों पर आधारित हैं।  REPUBLIC BHARAT आर्टिकल में दी गई जानकारी के सही होने का दावा नहीं करता है। किसी भी उपचार और सुझाव को अप्लाई करने से पहले डॉक्टर या एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।

Published By : Sujeet Kumar

पब्लिश्ड 20 November 2025 at 13:50 IST