Chandipura Virus Symptoms: क्या है 'चांदीपुरा वायरस' जिसने ली गुजरात में 3 मासूमों की जान? जानिए इसके खतरे और बचाव
What Is Chandipura Virus: कोरोना के बाद अब गुजरात में चांदीपुरा वायरस के कहर से माता-पिता अपने बच्चों से जुड़ी चीजों का खासतौर से ख्याल रख रहे हैं। ऐसे में इस वायरस से जुड़ी पूरी जानकारी समझ लेना सबसे ज्यादा जरूरी है।
- लाइफस्टाइल न्यूज़
- 4 min read
Chandipura Virus Symptoms And Prevention: हाल ही में गुजरात में 'चांदीपुरा वायरस' के कारण कई मासूम बच्चों की जान चली गई है, जिसने माता-पिता और स्वास्थ्य और प्रशासन की चिंता को बहुत बढ़ा दिया है। शुरुआत में 3 बच्चों की मौत की खबर ने सबको झकझोर दिया। तो चलिए हैं कि आखिर यह वायरस क्या है, इसके क्या खतरे हैं और अपने बच्चों को इससे कैसे सुरक्षित रख सकते हैं।
वायरस से साबरकांठा जिले में 6 वर्षीय बच्ची की मौत के बाद शनिवार को खेड़ा जिले में दो और बच्चों में भी चांदीपुरा वायरस जैसे लक्षण दिखाई दिए। बेहतर इलाज के लिए उन्हें गांधीनगर सिविल अस्पताल भेजा गया है। फिलहाल दोनों की जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
इसके बाद स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि वायरस को फैलने से रोकने के लिए कई स्तरों पर एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं। लगातार निगरानी, घरों के आसपास कीटनाशक का छिड़काव, साफ-सफाई, मिट्टी की दीवारों और दरारों को भरने जैसे उपाय किए जा रहे हैं ताकि कीट वहां पनप न सकें।
चांदीपुरा वायरस क्या है?
यह एक बेहद खतरनाक वायरस है जो मुख्य रूप से बच्चों यानी 9 महीने से लेकर 15 साल तक के बच्चों को अपना शिकार बनाता है। यह वायरस सीधे तौर पर इंसान के दिमाग पर हमला करता है, जिससे मस्तिष्क में सूजन यानी एन्सेफलाइटिस आ जाती है। इसका नाम महाराष्ट्र के 'चांदीपुरा' गांव से पड़ा है, जहां साल 1965 में पहली बार इस वायरस की पहचान की गई थी।
यह कैसे फैलता है?
यह कोई ऐसी बीमारी नहीं है जो छूने या खांसने से एक इंसान से दूसरे इंसान में फैले। यह मुख्य रूप से सैंडफ्लाई यानी रेत में पाई जाने वाले मक्खी, मच्छरों और टिक्स के काटने से फैलता है। जब ये संक्रमित कीड़े या मक्खी किसी बच्चे को काटते हैं, तो यह जानलेवा वायरस सीधे उसके खून में प्रवेश कर जाता है।
चांदीपुरा वायरस के मुख्य लक्षण
इस वायरस की सबसे डरावनी बात यह है कि इसका असर बहुत तेजी से होता है। माता-पिता को इन लक्षणों को लेकर बहुत सतर्क रहने की जरूरत है।
- अचानक तेज बुखार आना: शरीर अचानक बहुत ज्यादा तपने लगता है।
- गंभीर सिरदर्द: बच्चे को सिर में असहनीय दर्द होता है।
- उल्टी और पेट दर्द: तेज बुखार के साथ लगातार उल्टी होना या मतली महसूस होना।
- दौरे पड़ना: कुछ ही घंटों में बच्चे का शरीर अकड़ने लगता है और दौरे आने लगते हैं।
- बेहोशी और सुस्ती: बच्चा अचानक बहुत सुस्त हो जाता है, उसकी चेतना कम होने लगती है और वह बेहोशी की हालत में जा सकता है।
यह वायरस इतना खतरनाक क्यों है?
इस वायरस के खतरे का मुख्य कारण इसकी गति है। लक्षण दिखने के 24 से 48 घंटों के भीतर ही यह बीमारी गंभीर रूप ले लेती है और वायरस मस्तिष्क को बड़ा नुकसान पहुंचा सकता है। अगर समय पर इलाज न मिले तो बच्चा कोमा में जा सकता है और उसकी जान भी जा सकती है।
वर्तमान में इस वायरस को खत्म करने के लिए कोई वैक्सीन, टीका या दवा मौजूद नहीं है। डॉक्टर लक्षणों के आधार पर ही इलाज करते हैं जैसे बुखार कम करना और दौरों को रोकना, इसलिए सही समय पर अस्पताल पहुंचना ही जान बचाने का एकमात्र तरीका होता है।
कैसे करें बचाव?
चूंकि इस वायरस की कोई पक्की दवा नहीं है, इसलिए मक्खियों और मच्छरों से बचना ही इस बीमारी का सबसे असरदार इलाज है।
- पूरी बांह के कपड़े पहनाएं: बच्चों को हमेशा ऐसे कपड़े पहनाएं जिससे उनके हाथ और पैर पूरी तरह ढके रहें, खासकर शाम और रात के समय।
- मच्छरदानी का प्रयोग: घर में सोते समय, खासकर बच्चों के लिए हमेशा मच्छरदानी का इस्तेमाल करें।
- कीट निरोधक का इस्तेमाल: त्वचा के खुले हिस्सों या कपड़ों पर कीड़ों और मच्छरों को दूर रखने वाली क्रीम या स्प्रे लगाएं।
- घर के आसपास सफाई रखें: सैंडफ्लाई अक्सर कच्ची मिट्टी, दरारों, गंदगी और रुके हुए पानी के आसपास पनपती है। अपने घर और आसपास के इलाके में साफ-सफाई रखें और पानी जमा न होने दें।
- लक्षण दिखते ही डॉक्टर के पास जाएं: यदि बच्चे को अचानक तेज बुखार आए और साथ में उल्टी या दौरे की शिकायत हो, तो घरेलू नुस्खों में समय बर्बाद न करें। तुरंत नजदीकी बड़े अस्पताल जाएं।
थोड़ी सी जागरूकता और सावधानी अपनाकर हम इस जानलेवा वायरस से अपने बच्चों को सुरक्षित रख सकते हैं।
Disclaimer: इस आर्टिकल में बताई विधियां, तरीके और दावे अलग-अलग जानकारियों पर आधारित हैं। REPUBLIC BHARAT आर्टिकल में दी गई जानकारी के सही होने का दावा नहीं करता है। किसी भी उपचार और सुझाव को अप्लाई करने से पहले डॉक्टर या एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
Published By : Samridhi Breja
पब्लिश्ड 12 July 2026 at 18:42 IST