Pink E-Rickshaw Scheme के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रहा है रोहित पंडित फाउंडेशन

महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता और सामाजिक परिवर्तन के प्रति एक स्पष्ट प्रतिबद्धता का प्रतीक था। इसी क्षण रोहित पंडित फाउंडेशन की बहुप्रतीक्षित Pink E-Rickshaw Scheme औपचारिक रूप से देश के सामने आई।

 
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Pink E-Rickshaw Scheme: महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रहा रोहित पंडित फाउंडेशन | Image: Social media

मुंबई की व्यस्त सड़कों पर जब चमकदार गुलाबी रंग के इलेक्ट्रिक रिक्शाओं का काफिला आगे बढ़ा, तो वह केवल नए वाहनों की शुरुआत नहीं थी। वह महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण, आत्मनिर्भरता और सामाजिक परिवर्तन के प्रति एक स्पष्ट प्रतिबद्धता का प्रतीक था। इसी क्षण रोहित पंडित फाउंडेशन की बहुप्रतीक्षित Pink E-Rickshaw Scheme औपचारिक रूप से देश के सामने आई।

इस पहल के शुभारंभ अवसर पर बॉलीवुड अभिनेत्री और फिटनेस आइकन मलाइका अरोड़ा, अभिनेत्री एवं अभियान की ब्रांड एंबेसडर भूमि पेडनेकर, प्रसिद्ध गायिका पलक मुछल, संगीतकार शंकर महादेवन, रैपर बादशाह, पद्मश्री सम्मानित शेफ विकास खन्ना, पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर तथा महाराष्ट्र के राज्यपाल सहित अनेक प्रतिष्ठित हस्तियाँ उपस्थित रहीं। उनकी मौजूदगी ने इस कार्यक्रम को एक साधारण योजना-लॉन्च से आगे बढ़ाकर महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण पर केंद्रित एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय विमर्श का रूप दे दिया।

एक विचार जो ज़मीन पर उतरा

इस पहल के केंद्र में हैं रोहित पंडित, जिन्होंने वर्षों से इस विश्वास के साथ सामाजिक कार्य किया है कि वास्तविक सशक्तिकरण केवल सहायता प्रदान करने से नहीं, बल्कि अवसर उपलब्ध कराने से संभव होता है। उनका दृष्टिकोण स्पष्ट है कि लोगों को स्थायी रूप से सक्षम बनाने के लिए उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर देना आवश्यक है।

Pink E-Rickshaw Scheme इसी विचार की व्यावहारिक अभिव्यक्ति है। यह योजना केवल महिलाओं को वाहन उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन्हें वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण, वाहन वितरण और संचालन संबंधी मार्गदर्शन सहित संपूर्ण सहयोग प्रदान करती है। इसकी संरचना उन प्रमुख चुनौतियों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है जिनका सामना महिलाओं को रोजगार और उद्यमिता के क्षेत्र में करना पड़ता है, जैसे पूंजी की कमी, कौशल प्रशिक्षण का अभाव और संस्थागत सहयोग की आवश्यकता।

रोहित पंडित फाउंडेशन ने इन बाधाओं को दूर करने के लिए एक समग्र मॉडल विकसित किया है, जिसका उद्देश्य महिलाओं को केवल रोजगार देना नहीं, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है।

राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार की शुरुआत

योजना का पहला चरण देश के कई प्रमुख शहरों में एक साथ प्रारंभ किया गया। मुंबई में इस पहल का उद्घाटन श्रीमती अमृता फडणवीस ने किया, जबकि भोपाल में स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।
एक साथ अनेक शहरों में योजना की शुरुआत इस बात का संकेत है कि यह कोई सीमित क्षेत्रीय परियोजना नहीं, बल्कि व्यापक राष्ट्रीय दृष्टि के साथ शुरू किया गया अभियान है।

मुंबई में आयोजित मुख्य कार्यक्रम के दौरान भूमि पेडनेकर ने महिलाओं की आर्थिक भागीदारी को राष्ट्र की प्रगति से जोड़ते हुए कहा कि जब महिलाएँ आर्थिक रूप से सक्षम होती हैं, तो समाज अधिक सुरक्षित, समावेशी और विकासोन्मुख बनता है। उन्होंने इस पहल को सामाजिक परिवर्तन की दिशा में एक व्यावहारिक और प्रभावी कदम बताया।

कार्यक्रम में शंकर महादेवन की उपस्थिति ने आयोजन को सांस्कृतिक गरिमा प्रदान की, जबकि बादशाह ने युवा वर्ग तक इस अभियान का संदेश पहुँचाने की आवश्यकता पर बल दिया। विकास खन्ना और अनुराग ठाकुर ने इस योजना की विशेष रूप से सराहना की क्योंकि यह महिलाओं की आजीविका और पर्यावरणीय स्थिरता, दोनों उद्देश्यों को एक साथ साधती है।

मलाइका अरोड़ा और पलक मुछल ने भी इस पहल के माध्यम से महिलाओं को नए अवसर उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर जोर दिया। वहीं, महाराष्ट्र के राज्यपाल की उपस्थिति ने इस कार्यक्रम को संस्थागत समर्थन और विश्वसनीयता प्रदान की।

सेवा से परिवर्तन तक की यात्रा

Pink E-Rickshaw Scheme किसी एकल परियोजना का परिणाम नहीं है, बल्कि रोहित पंडित फाउंडेशन द्वारा वर्षों से किए जा रहे सामाजिक कार्यों की निरंतरता का हिस्सा है।

फाउंडेशन के अनुसार, अब तक 70,000 से अधिक परिवार इसके विभिन्न कार्यक्रमों से लाभान्वित हो चुके हैं। पाँच लाख से अधिक लोगों को निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान की गई हैं, जबकि 12,000 से अधिक लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए गए हैं। इसके अतिरिक्त, 3,000 से अधिक छात्रों को छात्र वृत्तियाँ प्रदान की गई हैं और 5,000 से अधिक लोगों को निःशुल्क कौशल विकास प्रशिक्षण दिया गया है। वर्तमान में 1,800 से अधिक स्वयंसेवक देशभर में फाउंडेशन के विभिन्न अभियानों को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।

हालाँकि, रोहित पंडित का मानना है कि किसी भी सामाजिक पहल की वास्तविक सफलता आँकड़ों में नहीं, बल्कि उन व्यक्तिगत जीवन कथाओं में दिखाई देती है जो इन प्रयासों से बदलती हैं। वह महिला जो पहली बार आर्थिक रूप से स्वतंत्र हुई, वह छात्र जिसने छात्र वृत्ति के कारण अपनी शिक्षा जारी रखी, या वह परिवार जिसे स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुँच मिली, यही किसी भी सामाजिक अभियान की वास्तविक उपलब्धियाँ हैं।
फाउंडेशन के पाँच प्रमुख स्तंभ, शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास एवं रोजगार, महिला सशक्तिकरण और भारतीय संस्कृति का संरक्षण, एक-दूसरे से जुड़े हुए ऐसे आयाम हैं जिनका उद्देश्य समाज में सम्मानजनक और स्थायी परिवर्तन लाना है।

महिलाओं के सशक्तिकरण के साथ पर्यावरण संरक्षण

Pink E-Rickshaw Scheme की एक महत्वपूर्ण विशेषता इसका पर्यावरणीय दृष्टिकोण भी है। इलेक्ट्रिक रिक्शा पारंपरिक ईंधन आधारित वाहनों की तुलना में शून्य प्रत्यक्ष उत्सर्जन करते हैं, जिससे शहरी क्षेत्रों में वायु प्रदूषण कम करने में सहायता मिलती है।

ऐसे समय में जब भारत के अनेक शहर वायु गुणवत्ता संबंधी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, यह पहल सामाजिक और पर्यावरणीय दायित्वों को एक साथ जोड़ने का प्रयास करती है। रोहित पंडित फाउंडेशन का मानना है कि महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण और पर्यावरण संरक्षण परस्पर विरोधी लक्ष्य नहीं हैं, बल्कि दोनों को समानांतर रूप से आगे बढ़ाया जा सकता है।

इस प्रकार प्रत्येक गुलाबी इलेक्ट्रिक रिक्शा केवल आजीविका का साधन नहीं, बल्कि एक हरित और समावेशी भविष्य की दिशा में उठाया गया कदम भी है।

आगे की दिशा

पहले चरण के सफल शुभारंभ के बाद फाउंडेशन अब इस योजना को देश के अधिक शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों तक विस्तारित करने की तैयारी कर रहा है। उद्देश्य उन महिलाओं तक अवसर पहुँचाना है जो अब तक आर्थिक संसाधनों और स्वरोज़गार के अवसरों से वंचित रही हैं।

रोहित पंडित के लिए यह परियोजना किसी उपलब्धि का अंतिम पड़ाव नहीं, बल्कि एक लंबी यात्रा की शुरुआत है। फाउंडेशन का मूल मंत्र, “सेवा, समर्पण और संकल्प”, केवल एक नारा नहीं, बल्कि उसके कार्यों की आधारशिला है।

जब देश की सड़कों पर चलने वाली एक गुलाबी इलेक्ट्रिक रिक्शा किसी महिला को आर्थिक स्वतंत्रता की ओर ले जाती है, तो वह केवल एक यात्री नहीं, बल्कि एक नई संभावना को आगे बढ़ा रही होती है। और यही संभावना इस पहल को एक योजना से आगे बढ़ाकर सामाजिक परिवर्तन के आंदोलन का स्वरूप प्रदान करती है।
 

Published By : Sahitya Maurya

पब्लिश्ड 8 June 2026 at 20:10 IST