अपडेटेड 2 February 2026 at 20:18 IST

असहनीय दर्द से उम्मीद तक: सड़क हादसे ने बदली सिम्मी गौड़ की ज़िंदगी, आज प्राकृतिक चिकित्सा से दूसरों को दे रहीं राहत

एक सड़क हादसा किसी की जिंदगी कैसे बदल सकता है, इसकी मिसाल हैं सिम्मी गौड़। वर्ष 2010 में ऑफिस से लौटते समय हुए एक एक्सीडेंट में वे गंभीर रूप से घायल हो गईं। हादसे ने उनके शरीर को गहरी चोट दी, लेकिन मानसिक रूप से वे कभी हारी नहीं।

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सड़क हादसे ने बदली सिम्मी गौड़ की ज़िंदगी, आज प्राकृतिक चिकित्सा से दूसरों को दे रहीं राहत | Image: Social media

एक सड़क हादसा किसी की जिंदगी कैसे बदल सकता है, इसकी मिसाल हैं सिम्मी गौड़। वर्ष 2010 में ऑफिस से लौटते समय हुए एक एक्सीडेंट में वे गंभीर रूप से घायल हो गईं। हादसे ने उनके शरीर को गहरी चोट दी, लेकिन मानसिक रूप से वे कभी हारी नहीं।

हादसे के बाद उनके शरीर के अलग-अलग हिस्सों में लगातार असहनीय दर्द बना रहने लगा। हालात ऐसे हो गए कि सामान्य दिनचर्या, उठना, बैठना और रोजमर्रा के काम भी मुश्किल हो गए। वर्षों तक चले इस दर्द ने उनकी शारीरिक ही नहीं, मानसिक स्थिति को भी प्रभावित किया।

इलाज हुआ, लेकिन समाधान नहीं मिला

दर्द से राहत पाने के लिए सिम्मी गौड़ ने कई एलोपैथिक चिकित्सकों से इलाज कराया। अस्पतालों के चक्कर लगे, अनेक जाँचें हुईं और लंबे समय तक दवाइयाँ भी चलती रहीं। शुरुआती दौर में कुछ राहत जरूर मिली, लेकिन दर्द पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। समय के साथ दवाइयों पर निर्भरता बढ़ती चली गई और जीवन की गुणवत्ता प्रभावित होने लगी।

एक्यूप्रेशर बना टर्निंग पॉइंट

इसी दौरान सिम्मी गौड़ का परिचय एक्यूप्रेशर चिकित्सा से हुआ। शुरुआत में उन्होंने इसे एक वैकल्पिक उपाय के तौर पर अपनाया। लेकिन जब सही एक्यूप्रेशर पॉइंट्स पर नियमित उपचार शुरू हुआ, तो धीरे-धीरे दर्द में फर्क महसूस होने लगा।
करीब एक महीने बीस दिनों के भीतर उनके स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला। वह फिर से अपने दैनिक काम करने में सक्षम हो गईं। यह अनुभव उनके लिए सिर्फ राहत नहीं, बल्कि एक नई दिशा बन गया।

दर्द से निकली एक नई राह

अपने अनुभव से प्रेरित होकर सिम्मी गौड़ ने एक्यूप्रेशर को गहराई से समझने का फैसला किया। उन्होंने इसका औपचारिक प्रशिक्षण लिया। इसके साथ ही के-टेपिंग थेरेपी और नीडलिंग थेरेपी जैसी अन्य प्राकृतिक उपचार पद्धतियों का भी अध्ययन किया।
इसी क्रम में योग को उन्होंने अपने उपचार दर्शन का अहम हिस्सा बनाया। योग में स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी करने के साथ-साथ उन्होंने अलायंस यूएसए से योग टीचर ट्रेनिंग भी प्राप्त की। योग और एक्यूप्रेशर के समन्वय ने उनके उपचार तरीकों को और अधिक प्रभावी बनाया।

2018 से लोगों के लिए काम

वर्ष 2018 से सिम्मी गौड़ ने अपने ज्ञान और अनुभव को पेशेवर रूप देते हुए लोगों तक पहुंचाना शुरू किया। आज वे बिना दवाइयों के सर्वाइकल पेन, कमर दर्द, एल-4 और एल-5 से जुड़ी समस्याओं, नसों के दबाव और अन्य शारीरिक दर्द से जूझ रहे लोगों की सहायता कर रही हैं।
उनके पास ऐसे लोग भी पहुँचते हैं, जो लंबे इलाज और ऑपरेशन की सलाह से निराश हो चुके होते हैं। सिम्मी गौड़ ऐसे मामलों में बिना सर्जरी प्राकृतिक तरीकों से राहत देने का प्रयास करती हैं।

सम्मान से मिली पहचान

प्राकृतिक चिकित्सा और योग के क्षेत्र में उनके योगदान को देखते हुए सिम्मी गौड़ को “प्राकृतिक चिकित्सा रत्न पुरस्कार” से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके संघर्ष, समर्पण और समाज के प्रति उनके कार्य की पहचान माना जाता है।

यही है उनकी सोच

सिम्मी गौड़ का मानना है कि
“बिना एलोपैथिक दवाइयों के भी प्राकृतिक तरीकों से दर्द से राहत संभव है।” आज एक समय का असहनीय दर्द उनकी ताकत बन चुका है और वही अनुभव अब दूसरों के लिए उम्मीद की वजह बन रहा है।

Published By : Sahitya Maurya

पब्लिश्ड 2 February 2026 at 20:18 IST