'युद्ध नशों विरुद्ध' पंजाब ने नशे के खिलाफ खेलों को बनाया हथियार
पंजाब में ‘युद्ध नशों विरुद्ध’ अभियान चलाया जा रहा है। GNDU अमृतसर में फुटबॉल टूर्नामेंट से युवाओं को नशे से दूर रखने की मुहिम चलाई जा रही है। जिसमें खेल को हथिराय बनाया जा रहा है। पढे़ं पूरी खबर।
पंजाब एक निर्णायक लड़ाई लड़ रहा है। सरहदों पर नहीं, बल्कि समाज के भीतर, नशे के बढ़ते खतरे के खिलाफ। पंजाब सरकार के प्रमुख अभियान “युद्ध नशों विरुद्ध” के तहत पूरे राज्य में एक बड़ा जनआंदोलन चलाया जा रहा है, जिसका मकसद नशे को खत्म करना और युवाओं का भविष्य सुरक्षित करना है।
इसी मुहिम को आगे बढ़ाते हुए गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी, अमृतसर में 27 और 28 मार्च को इंटर-यूनिवर्सिटी फुटबॉल टूर्नामेंट हुआ। यह सिर्फ एक फुटबॉल टूर्नामेंट नहीं था, यह एक संदेश था। नशे के खिलाफ, बेहतर भविष्य के लिए। युवाओं की ऊर्जा को खेल, अनुशासन और मकसद की तरफ मोड़ने की कोशिश।
इस पहल को और मजबूती देने पहुंचे हॉकी ओलंपियन और एसपी बटाला रमनदीप सिंह भी नौजवानों के बीच नजर आए। उनसे मिले, उन्हें खेलते देखा और उन्हें प्रेरित किया। आइए सुनते हैं उनका क्या कहना है।
पिछले चार सालों में सरकार ने नशे के खिलाफ सिर्फ बातें नहीं कीं, ज़मीन पर काम किया है। 95,000 से ज्यादा तस्कर गिरफ्तार किए गए। 1105 गैंग निष्क्रिय किए गए और 2858 अपराधी जेल की सलाखों के पीछे भेजे गए। 772 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति ज़ब्त की गई। 1500 से ज़्यादा तस्करों की गैरकानूनी जायदादों पर भी शिकंजा कसा गया।
लेकिन सरकार ने सिर्फ डंडा नहीं चलाया, हाथ भी थामा, युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए स्कूलों में युद्ध नशों विरुद्ध का पाठ्यक्रम शुरू किया गया, ताकि बचपन से ही नशे के खिलाफ जागरूकता बने। 65,000 सरकारी नौकरियां दी गईं। खेलों के ज़रिए युवाओं को सही दिशा देने की कोशिश लगातार जारी है। मुख्यमंत्री भगवंत मान का कहना है कि 'खेल पंजाब में नशे के खिलाफ सबसे प्रभावी हथियार हैं।' यह सिर्फ एक टूर्नामेंट नहीं, एक आंदोलन है। जब युवा सही रास्ता चुनते हैं तो पंजाब जीतता है।
Published By : Nidhi Mudgill
पब्लिश्ड 7 April 2026 at 18:58 IST