अपडेटेड 27 January 2026 at 17:09 IST
पतंजलि के पीड़ानिल गोल्ड पर हुए शोध से पुरानी नसों के दर्द के इलाज को लेकर नई वैज्ञानिक उम्मीद
पुराना नसों का दर्द आज भी एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती है, लेकिन पतंजलि द्वारा किए गए शोध यह दिखाते हैं कि आयुर्वेदिक फॉर्मूलेशन को आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़कर प्रभावी समाधान विकसित किए जा सकते हैं।
पुराना न्यूरोपैथिक दर्द (Chronic Nerve Pain) आज की सबसे जटिल और कष्टदायक स्वास्थ्य समस्याओं में से एक बन चुका है। यह दर्द केवल शारीरिक परेशानी नहीं, बल्कि व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य, नींद, कार्यक्षमता और जीवन की गुणवत्ता को भी गहराई से प्रभावित करता है। आमतौर पर यह दर्द डायबिटिक न्यूरोपैथी, नसों की चोट, सर्जरी के बाद की स्थिति, कीमोथेरेपी या रीढ़ से जुड़ी समस्याओं के कारण उत्पन्न होता है।
आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों में इस दर्द के लिए दवाइयाँ उपलब्ध हैं, लेकिन अधिकतर मामलों में ये केवल अस्थायी राहत देती हैं और लंबे समय तक इनके उपयोग से साइड इफेक्ट्स का खतरा भी बना रहता है। इसी चुनौती को देखते हुए पतंजलि रिसर्च इंस्टीट्यूट से जुड़े वैज्ञानिकों ने एक आयुर्वेदिक हर्बो-मिनरल फॉर्मूलेशन पीड़ानिल गोल्ड पर गहन वैज्ञानिक शोध किया, जिससे नसों के दर्द के इलाज को लेकर एक नई दिशा सामने आई है।
न्यूरोपैथिक दर्द: एक बढ़ती हुई वैश्विक समस्या
न्यूरोपैथिक दर्द सामान्य दर्द से अलग होता है। इसमें व्यक्ति को ठंड, गर्मी, हल्के स्पर्श या सामान्य दबाव पर भी असहनीय दर्द महसूस हो सकता है। जलन, झनझनाहट, सुन्नता और चुभन इसके आम लक्षण हैं। कई मामलों में यह दर्द वर्षों तक बना रहता है, जिससे मरीज का दैनिक जीवन प्रभावित होता है।
परंपरागत एलोपैथिक दवाइयां जैसे गैबापेंटिन आदि कुछ हद तक राहत देती हैं, लेकिन ये दर्द के मूल कारणों, जैसे नसों में सूजन और सेंसिटाइजेशन पर पूरी तरह काम नहीं कर पातीं हैं।
पीड़ानिल गोल्ड पर हुआ वैज्ञानिक शोध क्या कहता है?
पतंजलि के वैज्ञानिकों द्वारा किया गया यह शोध अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त Pain Research and Management जर्नल (Wiley प्रकाशन) में प्रकाशित हुआ है। इस अध्ययन में Chronic Constriction Injury (CCI) मॉडल का उपयोग किया गया, जो न्यूरोपैथिक दर्द के अध्ययन के लिए एक मानक प्रीक्लिनिकल मॉडल माना जाता है।
शोध के प्रमुख निष्कर्ष इस प्रकार हैं:
- पीड़ानिल गोल्ड ने ठंड और स्पर्श से होने वाले दर्द (Cold & Tactile Allodynia) तथा गर्मी से बढ़ने वाले दर्द (Thermal Hyperalgesia) को प्रभावी रूप से कम किया।
- इसके प्रभाव गैबापेंटिन जैसी एलोपैथिक दवाओं के समान पाए गए।
- इसने TRPV1, TRPV4, TRPA1 और TRPM8 जैसे दर्द संवेदक रिसेप्टर्स की अभिव्यक्ति को कम किया, जो नसों के दर्द में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- इसके साथ-साथ, पीड़ानिल गोल्ड ने सूजन से जुड़े बायोमार्कर्स जैसे p38 MAP kinase और IL-6 receptor को भी नियंत्रित किया।
इन निष्कर्षों से यह स्पष्ट होता है कि पीड़ानिल गोल्ड केवल दर्द को दबाता नहीं, बल्कि दर्द और सूजन से जुड़े जैविक कारणों पर भी प्रभाव डालता है।
आयुर्वेदिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान का संगम
पीड़ानिल गोल्ड एक ऐसा फॉर्मूलेशन है जो पारंपरिक आयुर्वेदिक सिद्धांतों पर आधारित है, लेकिन इसकी प्रभावशीलता को आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान द्वारा प्रमाणित किया गया है। यही कारण है कि इसे केवल एक पारंपरिक औषधि नहीं, बल्कि एविडेंस-बेस्ड आयुर्वेदिक समाधान के रूप में देखा जा रहा है।
जो लोग नसों के पुराने दर्द के लिए प्राकृतिक और शोध-आधारित विकल्प तलाश रहे हैं, वे पीड़ानिल गोल्ड के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
यह कैसे काम करता है: दर्द और सूजन पर डुअल एक्शन
दर्द रिसेप्टर्स पर नियंत्रण
TRP चैनल्स (जैसे TRPV1 और TRPM8) नसों में दर्द के संकेतों को मस्तिष्क तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाते हैं। शोध में पाया गया कि पीड़ानिल गोल्ड इन रिसेप्टर्स की गतिविधि को कम करता है, जिससे दर्द की तीव्रता घटती है।\
सूजन को कम करना
न्यूरोपैथिक दर्द अक्सर नसों में सूजन के कारण बना रहता है। पीड़ानिल गोल्ड ने सूजन से जुड़े प्रमुख संकेतकों को कम करके यह दिखाया कि यह दर्द के मूल कारण पर भी काम करता है, न कि केवल लक्षणों पर।
नसों के दर्द से आगे भी प्रभावी
अन्य शोधों में यह भी सामने आया है कि पीड़ानिल गोल्ड ऑस्टियोआर्थराइटिस और जोड़ों की सूजन जैसी समस्याओं में भी प्रभावी हो सकता है। इससे यह संकेत मिलता है कि इसके एंटी-इंफ्लेमेटरी और पेन-रिलीफ गुण व्यापक उपयोग की क्षमता रखते हैं।
संतुलित और समग्र दर्द प्रबंधन की ओर एक कदम
हालांकि आगे और क्लिनिकल रिसर्च की आवश्यकता बनी रहेगी, लेकिन मौजूदा वैज्ञानिक प्रमाण यह दर्शाते हैं कि पीड़ानिल गोल्ड उन लोगों के लिए एक संभावनाशील विकल्प हो सकता है, जो लंबे समय तक दवाओं पर निर्भर हुए बिना सुरक्षित और प्राकृतिक समाधान चाहते हैं।
अधिक जानकारी के लिए देखें: पीड़ानिल गोल्ड प्रोडक्ट पेज
निष्कर्ष
पुराना नसों का दर्द आज भी एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती है, लेकिन पतंजलि द्वारा किए गए शोध यह दिखाते हैं कि आयुर्वेदिक फॉर्मूलेशन को आधुनिक विज्ञान के साथ जोड़कर प्रभावी समाधान विकसित किए जा सकते हैं। पीड़ानिल गोल्ड दर्द रिसेप्टर्स और सूजन दोनों पर एक साथ काम करके एक समग्र उपचार दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है।
यह उदाहरण है कि कैसे प्राचीन आयुर्वेदिक ज्ञान और आधुनिक रिसर्च मिलकर भविष्य की स्वास्थ्य समस्याओं के समाधान दे सकते हैं।
Published By : Samridhi Breja
पब्लिश्ड 27 January 2026 at 17:09 IST