एशिया के सबसे बड़े न्यूज़रूम में पारुल यूनिवर्सिटी के छात्र, रिपब्लिक के नोएडा कैंपस में देखी खबर बनने की पूरी प्रक्रिया
रिपब्लिक का डिजिटल न्यूज़रूम अलग लय पर चलता है और एक्स, इंस्टाग्राम, फेसबुक तथा लिंक्डइन जैसे चार प्लेटफॉर्म के लिए सामग्री तैयार करता है। एक ही न्यूज़रूम में खड़े होकर चर्चा, बैठकर इंटरव्यू और दर्शक संवाद के लिए बना एक अलग 'क्राउड रूम' तक, हर फॉर्मेट के लिए अलग जगह बनाई गई है।
- इनिशिएटिव
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पारुल यूनिवर्सिटी के पत्रकारिता छात्रों ने अपने दिल्ली मीडिया लीडरशिप टूर में नोएडा सेक्टर 158 स्थित रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के उस कैंपस का दौरा किया, जो एशिया का सबसे बड़ा इंटीग्रेटेड न्यूज़रूम है। छात्रों ने यहां खबर के पहले संपर्क से लेकर अंतिम प्रसारण तक की पूरी प्रक्रिया देखी और समझी।
एशिया का सबसे बड़ा इंटीग्रेटेड न्यूज़रूम
एक लाख वर्ग फुट से अधिक में फैले इस परिसर में छह अत्याधुनिक स्टूडियो हैं। छात्रों ने अलग-अलग नाम वाले स्टूडियो देखे, जैसे अग्नि (अंग्रेज़ी), आकाश (हिंदी), वायु, तेजस (कस्टमाइज़ेबल आरजीबी लाइटिंग वाला हिंदी स्टूडियो) और पृथ्वी, जिसमें नेटवर्क का ग्लोबल चैनल है और जिसमें एशिया की सबसे लंबी एलईडी स्क्रीन बताई गई।
क्रोमा स्टूडियो और एआर-वीआर तकनीक
दौरे की शुरुआत क्रोमा स्टूडियो से हुई, जहाँ एंकर को रियल टाइम में पूरी तरह तैयार 3D बैकग्राउंड में दिखाया जाता है, चाहे वह कोई क्षतिग्रस्त इमारत हो या संसद। स्टूडियो की दीवारों पर लगे छोटे सफेद सेंसर हर हलचल को ट्रैक कर एंकर के चारों ओर वर्चुअल वातावरण गढ़ते हैं।
लाइव प्रसारण में गलती की कोई गुंजाइश नहीं
छात्रों ने रिपब्लिक बांग्ला को एक शिखर सम्मेलन की लाइव कवरेज करते और एंकर अनन्या को लाइव सेगमेंट देते देखा। उन्हें बताया गया कि लाइव प्रसारण केवल एक से दो सेकंड के अंतर पर चलता है, यानी ऑन-एयर जाने के बाद लगभग कुछ भी ठीक नहीं किया जा सकता। लाइव एंकरिंग की इन्हीं माँगों को न्यूज़ एंकर कैसे बनें, इस पर वरिष्ठ एंकरों की सलाह में विस्तार से समझाया गया है।
संपादकों से संवाद और 'लर्न लाइव' मॉडल
पहली मंज़िल पर छात्रों ने एग्ज़िक्यूटिव एडिटर निरंजन नारायणस्वामी और राम मोहन शर्मा के साथ संवाद किया। निरंजन, जो बीस वर्षों से पत्रकारिता में हैं और 2010 से एडिटर-इन-चीफ अर्णब गोस्वामी के साथ काम कर रहे हैं, ने कॉर्पोरेट घरानों और एक पत्रकार द्वारा चलाई जा रही पत्रकारिता के बीच के अंतर पर बात की।
राम मोहन शर्मा, जो रिपब्लिक स्कूल ऑफ जर्नलिज़्म के डीन भी हैं, ने बताया कि यहाँ छात्र “लर्न लाइव” मॉडल के तहत सीधे न्यूज़रूम में प्रशिक्षण पाते हैं। उन्होंने एक पंक्ति में पत्रकारिता का सार रखा, “रिपोर्टर की आदत होनी चाहिए कि उसे जनता के सवाल पूछने हैं।” छात्रों को यह भी बताया गया कि यहाँ किसी की सीट तय नहीं है, ताकि पदानुक्रम की दीवार टूटे और हिंदी तथा अंग्रेज़ी न्यूज़रूम बिना दीवार के साथ काम करें।
डिजिटल न्यूज़रूम और चार प्लेटफॉर्म
रिपब्लिक का डिजिटल न्यूज़रूम अलग लय पर चलता है और एक्स, इंस्टाग्राम, फेसबुक तथा लिंक्डइन जैसे चार प्लेटफॉर्म के लिए सामग्री तैयार करता है। एक ही न्यूज़रूम में खड़े होकर चर्चा, बैठकर इंटरव्यू और दर्शक संवाद के लिए बना एक अलग 'क्राउड रूम' तक, हर फॉर्मेट के लिए अलग जगह बनाई गई है।
निरंजन नारायणस्वामी ने बताया कि नेटवर्क की पहुँच लगभग 50 करोड़ लोगों तक है, जिसमें एएनआई, पीटीआई और राज्यों के ब्यूरो तथा स्ट्रिंगरों का नेटवर्क योगदान देता है। उन्होंने यह भी कहा कि इंस्टाग्राम जैसे शॉर्ट-फॉर्म प्लेटफॉर्म अक्सर किसी खबर का पूरा संदर्भ नहीं दे पाते, जबकि फेसबुक ग्रामीण भारत में आज भी मज़बूत बना हुआ है।
पारुल यूनिवर्सिटी का पत्रकारिता कार्यक्रम
खबर के पहले संपर्क से अंतिम प्रसारण तक की यह पूरी प्रक्रिया एक टीवी न्यूज़रूम कैसे काम करता है में दर्ज है। पारुल यूनिवर्सिटी का पत्रकारिता एवं जनसंचार में स्नातकोत्तर (MA JMC) कार्यक्रम छात्रों को इसी तरह के व्यावहारिक अनुभव, स्टूडियो और इंडस्ट्री एक्सपोज़र के साथ तैयार करता है।
Published By : Sujeet Kumar
पब्लिश्ड 16 September 2026 at 18:25 IST