अपडेटेड 27 January 2026 at 16:49 IST

टाइप 1 डायबिटीज के लिए प्राकृतिक आयुर्वेदिक समर्थन: स्वामी रामदेव और पतंजलि का दृष्टिकोण

बच्चों में टाइप 1 मधुमेह की बढ़ती घटनाएं वैश्विक चिंता का विषय बन गई हैं। स्वामी रामदेव, पतंजलि के आयुर्वेदिक शोध के माध्यम से, इस स्थिति के प्रबंधन के लिए एक प्राकृतिक और सहायक दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हैं।

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Natural Support For Type 1 Diabetes | Image: Patanjali

आज के दौर में बच्चों और युवाओं में टाइप 1 डायबिटीज के बढ़ते मामले न केवल माता-पिता बल्कि स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए भी गहरी चिंता का विषय बन गए हैं। जहां आधुनिक चिकित्सा विज्ञान इसे पूरी तरह इंसुलिन पर निर्भर मानता है, वहीं स्वामी रामदेव और पतंजलि आयुर्वेद इसे एक अलग और प्राकृतिक नजरिए से देखने की राह दिखाते हैं।

आयुर्वेद की दृष्टि: जड़ से समझ

आयुर्वेद में डायबिटीज को केवल रक्त में शर्करा का बढ़ना नहीं, बल्कि शरीर की पाचन अग्नि और चयापचय के असंतुलन के रूप में देखा जाता है। स्वामी रामदेव के अनुसार, टाइप 1 डायबिटीज में अग्न्याशय की कार्यक्षमता प्रभावित होती है। पतंजलि का मानना है कि यदि बचपन से ही खान-पान और जीवनशैली पर ध्यान दिया जाए, तो इस स्थिति को बेहतर तरीके से प्रबंधित किया जा सकता है।

प्राकृतिक प्रबंधन के मुख्य स्तंभ

पतंजलि योगपीठ के माध्यम से स्वामी रामदेव ने तीन प्रमुख समाधानों पर जोर दिया है। 

  • योग और प्राणायाम: कपालभाति और अनुलोम-विलोम जैसे प्राणायाम आंतरिक अंगों को सक्रिय करने में मदद करते हैं। मंडूकासन और योगमुद्रासन विशेष रूप से पैन्क्रियाज को उत्तेजित करने के लिए जाने जाते हैं।
  • आयुर्वेदिक औषधियां: गिलोय, नीम, करेला और सदाबहार जैसी जड़ी-बूटियाँ रक्त शर्करा को प्राकृतिक रूप से नियंत्रित करने में सहायक होती हैं। पतंजलि की 'मधुनाशिनी वटी' जैसे उत्पाद इसी पारंपरिक ज्ञान पर आधारित हैं।
  • आहार शुद्धि: डिब्बाबंद भोजन और अत्यधिक चीनी से परहेज कर, फाइबर युक्त प्राकृतिक आहार को अपनाना ही दीर्घकालिक स्वास्थ्य की कुंजी है।

स्वामी रामदेव अक्सर स्पष्ट करते हैं कि आयुर्वेद कोई 'जादुई छड़ी' नहीं है जो रातों-रात टाइप 1 डायबिटीज को खत्म कर दे। यह एक अनुशासित जीवनशैली का मार्ग है। पतंजलि का दृष्टिकोण त्वरित समाधान के बजाय निरंतर सुधार पर केंद्रित है। सही मार्गदर्शन और नियमित अभ्यास से न केवल इंसुलिन की निर्भरता को संतुलित किया जा सकता है, बल्कि इससे होने वाली अन्य जटिलताओं से भी बचा जा सकता है।

Published By : Aarya Pandey

पब्लिश्ड 27 January 2026 at 16:49 IST