अपडेटेड 17 March 2026 at 19:39 IST
'जल है तो कल है' का नहीं है कोई विकल्प, बूंद-बूंद बचाने के करेंगे हर संभव प्रयास: मुख्यमंत्री डॉ. यादव
मोहन यादव ने जल संरक्षण को लेकर बड़ा संदेश देते हुए कहा है कि “जल है तो कल है” का कोई विकल्प नहीं है और हर बूंद को बचाना हम सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की है कि जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाकर मध्यप्रदेश को जल आत्मनिर्भर और समृद्ध राज्य बनाया जाए।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि प्रदेश में 19 मार्च से जल गंगा संवर्धन अभियान की शुरुआत की जाएगी। यह 100 दिवसीय अभियान 30 जून तक चलेगा। राज्य स्तरीय शुभारंभ भारतीय नववर्ष प्रतिपदा के अवसर पर Ujjain में Shipra River तट पर किया जाएगा। इसके लिए सरकार द्वारा व्यापक तैयारियां की जा रही हैं। उन्होने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकारी प्रयासों से संभव नहीं है, बल्कि इसे सामाजिक आंदोलन बनाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि हर गांव, हर शहर और हर नागरिक को इस अभियान से जोड़ा जाएगा। समाज और सरकार की साझेदारी से प्रदेश जल प्रबंधन में एक मॉडल स्टेट बन सकता है।
परंपरा और तकनीक का होगा समन्वय
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में जल संरक्षण की परंपरा सदियों पुरानी रही है, जहां तालाब, कुएं और बावड़ियां सामाजिक जीवन का हिस्सा थे। सरकार इन पारंपरिक व्यवस्थाओं को आधुनिक तकनीक और जनभागीदारी के माध्यम से पुनर्जीवित करने का प्रयास कर रही है। इस अभियान का उद्देश्य नई जल संरचनाएं बनाना और जल संरक्षण की संस्कृति को मजबूत करना है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इस अभियान की सबसे बड़ी ताकत जनभागीदारी है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे श्रमदान के माध्यम से तालाब और कुओं की सफाई करें, वर्षा जल संचयन को अपनाएं और जल स्रोतों के आसपास स्वच्छता बनाए रखें। उन्होंने कहा कि इससे भूजल स्तर में सुधार, किसानों को सिंचाई के लिए पानी, सूखा प्रभावित क्षेत्रों को राहत और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।
पहले चरण में बने 2.79 लाख से अधिक जल ढांचे
मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2024 में शुरू किए गए पहले चरण में 2.79 लाख से अधिक जल संरचनाओं का निर्माण और पुनर्जीवन किया गया। इनमें तालाब, कुएं, बावड़ियां, नहरें और सूखी नदियों का पुनर्जीवन शामिल है। इससे प्रदेश के कई क्षेत्रों में भूजल स्तर में सुधार और सिंचाई के लिए अतिरिक्त पानी उपलब्ध हुआ।
दूसरे चरण में भी तेजी से काम जारी
वर्ष 2025 में चलाए गए दूसरे चरण में भी बड़े स्तर पर कार्य हुए हैं। अब तक 72 हजार 647 से अधिक जल संरचनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि 64 हजार 395 संरचनाओं पर काम जारी है। इन परियोजनाओं में खेत तालाब, चेक डैम, स्टॉप डैम, नहर, कुएं और अन्य जल संचयन संरचनाएं शामिल हैं। इनका उद्देश्य ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्थायी जल उपलब्धता सुनिश्चित करना है।
Published By : Kirti Soni
पब्लिश्ड 17 March 2026 at 19:39 IST