अपडेटेड 18 February 2026 at 19:14 IST
प्रातःकालीन योग-यज्ञ: दिन की पवित्र और ऊर्जावान शुरुआत
सुबह की दिनचर्या हमारे पूरे दिन की दिशा तय करती है। स्वामी रामदेव बताते हैं कि यदि दिन की शुरुआत योग और यज्ञ से की जाए, तो शरीर, मन और आत्मा में संतुलन स्थापित होता है।
सुबह की दिनचर्या हमारे पूरे दिन की दिशा तय करती है। स्वामी रामदेव बताते हैं कि यदि दिन की शुरुआत योग और यज्ञ से की जाए, तो शरीर, मन और आत्मा में संतुलन स्थापित होता है। पतंजलि के समग्र स्वास्थ्य दर्शन में प्रातःकाल को आत्मविकास का सर्वोत्तम समय माना गया है।
ब्रह्ममुहूर्त को भारतीय परंपरा में अत्यंत पवित्र माना गया है। इस समय वातावरण शांत और शुद्ध होता है, जिससे मन एकाग्र रहता है। स्वामी रामदेव के अनुसार प्राणायाम से दिन की शुरुआत करने से फेफड़ों की क्षमता बढ़ती है और शरीर में नई ऊर्जा का संचार होता है।
कपालभाति, भस्त्रिका और अनुलोम-विलोम जैसे अभ्यास शरीर को आंतरिक रूप से शुद्ध करते हैं। इसके बाद सूर्य नमस्कार और अन्य योगासन मांसपेशियों को सक्रिय करते हैं। यह संयोजन पूरे दिन के लिए स्फूर्ति प्रदान करता है।
यज्ञ को केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि वैज्ञानिक प्रक्रिया के रूप में भी देखा जाता है। स्वामी रामदेव बताते हैं कि औषधीय हवन सामग्री के प्रयोग से वातावरण में सकारात्मकता बढ़ती है। पतंजलि के अनुसार यह मानसिक शांति और सामूहिक ऊर्जा को भी प्रोत्साहित करता है।
ध्यान और सकारात्मक संकल्प दिनचर्या का महत्वपूर्ण भाग हैं। ध्यान से तनाव हार्मोन कम होते हैं और मानसिक स्पष्टता बढ़ती है। नियमित अभ्यास से व्यक्ति निर्णय लेने में अधिक सक्षम होता है।
निष्कर्ष
प्रातःकालीन योग-यज्ञ केवल परंपरा नहीं बल्कि एक अनुशासित जीवनशैली है। स्वामी रामदेव के मार्गदर्शन और पतंजलि के दर्शन के अनुसार, यदि दिन की शुरुआत संतुलन और जागरूकता से की जाए, तो संपूर्ण जीवन में सकारात्मक परिवर्तन संभव है।
Published By : Sahitya Maurya
पब्लिश्ड 18 February 2026 at 19:14 IST