अपडेटेड 18 February 2026 at 14:32 IST

शिक्षा, चिकित्सा और जीवनशैली की गलत दिशा: वैश्विक संकट पर एक विचार

स्वामी रामदेव के अनुसार आधुनिक शिक्षा प्रणाली अक्सर नैतिक मूल्यों से दूर होती जा रही है। ज्ञान का उद्देश्य केवल आर्थिक सफलता नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण भी होना चाहिए।

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आधुनिक शिक्षा प्रणाली पर विचार विमर्श | Image: Republic

आज विश्व जिन चुनौतियों का सामना कर रहा है, उनमें शारीरिक रोगों से अधिक मानसिक और सामाजिक असंतुलन प्रमुख है। इस संदर्भ में स्वामी रामदेव बताते हैं कि शिक्षा, चिकित्सा और जीवनशैली की वर्तमान दिशा ने अनेक समस्याएं उत्पन्न की हैं। पतंजलि के समग्र दृष्टिकोण के अनुसार समाधान केवल तकनीकी उन्नति में नहीं, बल्कि मूल्य-आधारित सुधार में निहित है।

स्वामी रामदेव के अनुसार आधुनिक शिक्षा प्रणाली अक्सर नैतिक मूल्यों से दूर होती जा रही है। ज्ञान का उद्देश्य केवल आर्थिक सफलता नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण भी होना चाहिए। जब शिक्षा से संस्कार अलग हो जाते हैं, तो समाज में असंतुलन बढ़ता है।
चिकित्सा क्षेत्र में भी उन्होंने रोकथाम की कमी पर बल दिया। आधुनिक चिकित्सा आपात स्थितियों में प्रभावी है, परंतु जीवनशैली से जुड़े रोगों के लिए दीर्घकालिक अनुशासन आवश्यक है। योग, प्राणायाम और संतुलित आहार को पतंजलि मॉडल में प्राथमिकता दी जाती है।

सुधार भीतर से प्रारंभ होता है-स्वामी रामदेव 

जीवनशैली में अनियमित दिनचर्या, जंक फूड और तनाव प्रमुख समस्याएं हैं। स्वामी रामदेव का मत है कि यदि व्यक्ति स्वयं जिम्मेदारी ले, तो अनेक रोगों से बचा जा सकता है। निष्कर्ष शिक्षा, चिकित्सा और जीवनशैली में संतुलन स्थापित करना समय की आवश्यकता है। स्वामी रामदेव और पतंजलि का संदेश स्पष्ट है-सुधार भीतर से प्रारंभ होता है, और समग्र दृष्टिकोण ही स्थायी समाधान प्रदान कर सकता है।

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Published By : Rupam Kumari

पब्लिश्ड 18 February 2026 at 14:32 IST