अपडेटेड 27 February 2026 at 23:01 IST
क्या प्रिवेंटिव हेल्थकेयर ही भविष्य है? भारत की स्वास्थ्य चुनौती में योग और आयुर्वेद की भूमिका
बैठे रहने वाली जीवनशैली और असंतुलित आहार मेटाबॉलिक समस्याएं बढ़ा रहे हैं। लंबी अवधि की दवाओं का खर्च भी बढ़ रहा है।
भारत में लाइफस्टाइल बीमारियां — मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा और तनाव — तेजी से बढ़ रही हैं।
हमारा स्वास्थ्य तंत्र अक्सर बीमारी के बाद इलाज पर केंद्रित है। लेकिन अब बातचीत रोकथाम की ओर बढ़ रही है।
बढ़ती लागत
बैठे रहने वाली जीवनशैली और असंतुलित आहार मेटाबॉलिक समस्याएं बढ़ा रहे हैं। लंबी अवधि की दवाओं का खर्च भी बढ़ रहा है।
योग और आयुर्वेद की भूमिका
योग तनाव कम करने और मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। स्वामी रामदेव ने लंबे समय से दैनिक योग को प्रिवेंटिव जीवनशैली का हिस्सा बताया है।
आयुर्वेद व्यक्ति की प्रकृति के अनुसार आहार और जीवनशैली सुझाता है। पतंजलि ने भी इसी दृष्टिकोण के आधार पर वेलनेस उत्पाद प्रस्तुत किए हैं।
निष्कर्ष
रोकथाम हर बीमारी को समाप्त नहीं करती, लेकिन जोखिम कम कर सकती है। भारत में प्रिवेंटिव हेल्थ की ओर झुकाव आर्थिक और सांस्कृतिक दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण संकेत देता है।
Published By : Sakshi Bansal
पब्लिश्ड 27 February 2026 at 23:01 IST