अपडेटेड 15 December 2025 at 20:04 IST
भारत मंडपम, नई दिल्ली में भव्य “अंतरराष्ट्रीय जनमंगल सम्मेलन” का सफल आयोजन संपन्न
प्रत्येक माह की 7 तारीख को एक दिन उपवास करने का आह्वान करने वाले इस महाअभियान से देश-विदेश के लाखों लोगों ने जुड़कर इसे एक वैश्विक जनचेतना का स्वरूप प्रदान किया।
भारत मंडपम, नई दिल्ली में 12–13 दिसंबर को दो दिवसीय “अंतरराष्ट्रीय जनमंगल सम्मेलन” का भव्य एवं सफल आयोजन किया गया। यह सम्मेलन योग ऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज एवं जैन संत अंतरमना आचार्य प्रसन्न सागर जी महाराज के दिव्य सान्निध्यमें संपन्न हुआ। इस अवसर पर जनकल्याण हेतु “एक माह एक उपवास” नामक राष्ट्रीय जनआंदोलन का विधिवत शुभारंभ किया गया।
प्रत्येक माह की 7 तारीख को एक दिन उपवास करने का आह्वान करने वाले इस महाअभियान से देश-विदेश के लाखों लोगों ने जुड़कर इसे एक वैश्विक जनचेतना का स्वरूप प्रदान किया। सम्मेलन का केंद्रीय विषय था- “जनकल्याण की सम्यक दृष्टि: उपवास, ध्यान, योग एवं स्वदेशी चिंतन।”
इस गरिमामयी आयोजन में लोकसभा अध्यक्ष माननीय श्री ओम बिरला, केंद्रीय मंत्री श्री नितिन गडकरी, श्री गजेंद्र सिंह शेखावत, श्री भूपेंद्र यादव, दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता, दिल्ली सरकार के मंत्री श्री प्रवेश साहिब सिंह एवं श्री कपिल मिश्रा सहित अनेक केंद्रीय एवं राज्य मंत्री, संसद सदस्य एवं विशिष्ट अतिथियों ने सहभागिता की।
संसद सदस्य श्री सुधांशु त्रिवेदी एवं श्री योगेंद्र चंदोलिया, इंडिया टीवी के चेयरमैन श्री रजत शर्मा, प्रख्यात यकृत रोग विशेषज्ञ डॉ. एस. के. सरिन, भारतीय शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष श्री एन. पी. सिंह तथा पतंजलि अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. अनुराग वार्ष्णेय ने अपने विचारोंसे सम्मेलन को समृद्ध किया।
पूज्य बागेश्वर सरकार धीरेंद्र शास्त्री जी ने डिजिटल माध्यम से प्रेरणादायक संबोधन दिया, वहीं पूज्य आचार्य बालकृष्ण जी महाराज, गीता मनीषी महामंडलेश्वर ज्ञानानंद जी महाराज एवं महंत बालकनाथ योगी जी महाराज की पावन उपस्थिति ने सम्मेलन की गरिमा को और बढ़ाया।
सम्मेलन में इस तथ्य परविशेष प्रकाश डाला गया कियोग ऋषि स्वामी रामदेव जी महाराज के अथक प्रयासों से योग हरिद्वार से घर-घर तक पहुंचा है और आजसंपूर्ण विश्व के लिए मानवकल्याण का एक सशक्त माध्यम बन चुका है। इसी क्रम में, आचार्य प्रसन्न सागर जी महाराज की अद्वितीय साधना-557 दिनों का निरंतर उपवास एवं अब तक 3,500 से अधिक उपवास के लिए उन्हें“उपवास साधना शिरोमणि” की उपाधि से सम्मानित किया गया।
सम्मेलन के माध्यम से इन दोनों महान संतों ने “एक माह एक उपवास” महाअभियान के द्वारा समाज में शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक शुद्धि का संदेश दिया और मानवता के उत्थान हेतु उपवास कोएक सर्वसाधक महामंत्र के रूप में प्रस्तुत किया। सम्मेलन का समापन जनकल्याण के संकल्प एवं वैश्विक चेतनाके विस्तार के साथ हुआ।
Published By : Ruchi Mehra
पब्लिश्ड 15 December 2025 at 20:04 IST