अपडेटेड 28 January 2026 at 16:29 IST
हाइड्रोजन, एलएनजी और डिजिटल एनर्जी: इंडिया एनर्जी वीक 2026 के पहले दिन की बड़ी तस्वीर
इंडिया एनर्जी वीक 2026 के पहले दिन ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत का ऊर्जा संक्रमण अब केवल नीति दस्तावेजों या भविष्य की योजनाओं तक सीमित नहीं है।
इंडिया एनर्जी वीक 2026 का पहला दिन सिर्फ विजन और नेतृत्व तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह साफ तौर पर यह दिखाने में भी सफल रहा कि भारत का ऊर्जा संक्रमण अब जमीन पर उतर चुका है। हाइड्रोजन से लेकर एलएनजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित ऊर्जा प्रणालियों तक, भारत के ऊर्जा भविष्य को आकार देने वाली तकनीकों की एक झलक पहले ही दिन देखने को मिली।
‘हाइड्रोजन और फ्यूचर फ्यूल्स’ जोन: भारत की नेट-जीरो प्रतिबद्धता का संकेत
इंडिया एनर्जी वीक 2026 में स्थापित ‘हाइड्रोजन और फ्यूचर फ्यूल्स जोन’ इस बात का स्पष्ट संकेत है कि भारत हाइड्रोजन को केवल भविष्य की संभावना नहीं, बल्कि अपनी नेट-जीरो रणनीति का एक अहम स्तंभ मानता है।
इस विशेष जोन में हाइड्रोजन के उत्पादन, भंडारण और उपयोग से जुड़ी अत्याधुनिक तकनीकों को प्रदर्शित किया गया। इसका उद्देश्य उन क्षेत्रों को कम-कार्बन बनाना है, जहां उत्सर्जन को कम करना सबसे चुनौतीपूर्ण माना जाता है।
तेल रिफाइनिंग, स्टील और सीमेंट जैसे भारी उद्योगों के साथ-साथ परिवहन क्षेत्र को भी हाइड्रोजन के जरिए कम-कार्बन दिशा में ले जाने की भारत की प्रतिबद्धता इस जोन के माध्यम से साफ झलकी।
ऊर्जा संक्रमण की मल्टी-पाथवे रणनीति
हाइड्रोजन के अलावा, इंडिया एनर्जी वीक 2026 में कई थीमैटिक जोन भी आकर्षण का केंद्र रहे। इनमें रिन्यूएबल-हाइब्रिड ऊर्जा समाधान, बायोफ्यूल्स और सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल, नेट-जीरो और डीकार्बनाइजेशन रणनीतियां जैसे विषय शामिल रहे। यह दर्शाता है कि भारत ऊर्जा संक्रमण को किसी एक समाधान तक सीमित नहीं रख रहा, बल्कि मल्टी-पाथवे अप्रोच के साथ आगे बढ़ रहा है।
एलएनजी और गैस: ऊर्जा संक्रमण के ‘वर्कहॉर्स’
इंडिया एनर्जी वीक 2026 के पहले दिन गोवा में देश के ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े कई दिग्गज एक मंच पर नजर आए। इनमें बीपीसीएल के मार्केटिंग डायरेक्टर शुभंकर सेन, बीपीसीएल के वरिष्ठ अधिकारी अभिषेक कुमार सहित ओएनजीसी और अन्य सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल थे।
इन सभी चर्चाओं में एक बात बार-बार सामने आई- नेचुरल गैस और एलएनजी की भूमिका। उद्योग जगत के नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि एलएनजी, कोयले और अन्य अधिक कार्बन-उत्सर्जन वाले ईंधनों की तुलना में कहीं अधिक स्वच्छ विकल्प है।
भारत का तेजी से विस्तार करता गैस पाइपलाइन नेटवर्क और एलएनजी आयात क्षमता, इस संक्रमण को संभव बनाने वाले अहम कारक के रूप में सामने आए।
व्यावहारिक सच्चाई यह है कि ग्रिड की स्थिरता के लिए गैस इंफ्रास्ट्रक्चर बेहद जरूरी है और रिन्यूएबल ऊर्जा के बड़े पैमाने पर एकीकरण को भी गैस आधारित अर्थव्यवस्था के बिना संभव नहीं माना जा सकता।
डिजिटल, एआई और स्मार्ट एनर्जी समाधान
पहले दिन की तकनीकी चर्चाएं सिर्फ ईंधनों तक सीमित नहीं रहीं। डिजिटलाइजेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ऊर्जा क्षेत्र में दक्षता और स्थिरता के बड़े सक्षमकर्ता के रूप में उभरकर सामने आए। स्मार्ट ग्रिड्स, एआई आधारित प्रेडिक्टिव मेंटेनेंस, रियल-टाइम एनर्जी ऑप्टिमाइजेशन और डेटा-आधारित ऊर्जा दक्षता समाधान- इन सभी ने यह दिखाया कि डिजिटल तकनीकों में भारत की मजबूती अब उसकी ऊर्जा महत्वाकांक्षाओं से सीधे तौर पर जुड़ चुकी है।
इंडिया एनर्जी वीक 2026 के पहले दिन ने यह स्पष्ट कर दिया कि भारत का ऊर्जा संक्रमण अब केवल नीति दस्तावेजों या भविष्य की योजनाओं तक सीमित नहीं है। यह संक्रमण निर्माण, परीक्षण और विस्तार के चरण में प्रवेश कर चुका है।
हाइड्रोजन, एलएनजी, रिन्यूएबल्स और डिजिटल तकनीक- ये सभी भारत की ऊर्जा यात्रा के पूरक स्तंभ बनकर उभर रहे हैं, जो देश को एक सुरक्षित, टिकाऊ और आत्मनिर्भर ऊर्जा भविष्य की ओर ले जा रहे हैं।
Published By : Ruchi Mehra
पब्लिश्ड 28 January 2026 at 16:22 IST