हरियाणा के स्कूलों में 15000 अध्यापकों की कमी के बावजूद अध्यापकों को जनगणना ड्यूटी पर भेजना शर्मनाक: अनुराग ढांडा

आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने हरियाणा की नायब सिंह सैनी सरकार पर शिक्षा व्यवस्था को ठप करने का गंभीर आरोप लगाया है। ढांडा ने कहा कि एक तरफ प्रदेश के स्कूलों में शिक्षकों के 15,451 पद खाली हैं, वहीं दूसरी ओर मौजूदा अध्यापकों को जनगणना के काम में झोंककर छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है।

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Anurag Dhandha | Image: Republic

हरियाणा की शिक्षा व्यवस्था इस समय एक गंभीर संकट से गुजर रही है। आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढांडा ने सैनी सरकार के एक ताजा फरमान पर तीखा हमला बोला है। सरकार ने शिक्षकों की ड्यूटी जनगणना कार्य में लगा दी है, जिस पर ढांडा ने सवाल उठाया है कि जब स्कूलों में शिक्षक ही नहीं रहेंगे, तो प्रदेश का भविष्य यानी बच्चे कहाँ जाएंगे?

शिक्षा पर संकट - अनुराग ढांडा

अनुराग ढांडा का कहना है कि प्रदेश के स्कूलों में पहले से ही शिक्षकों और स्टाफ की भारी किल्लत है। ऐसे में उन्हें जनगणना जैसे गैर-शैक्षणिक कार्यों में झोंकना छात्रों की पढ़ाई के साथ खिलवाड़ है। चौंकाने वाली बात यह है कि कई स्कूलों में तो समस्त स्टाफ की ड्यूटी लगा दी गई है, जिससे स्कूलों के संचालन और बच्चों की सुरक्षा पर प्रश्नचिह्न लग गया है। अंबाला के राजकीय प्राथमिक पाठशाला (नंबर 3, 6 और मोतीनगर) जैसे कई स्कूलों में मात्र 3-5 शिक्षक हैं और उन सभी को जनगणना में भेज दिया गया है। यहाँ तक कि बड़ागढ़ के इकलौते शिक्षक को भी नहीं बख्शा गया।

बदहाल शिक्षा का सच

ढांडा ने आंकड़ों के जरिए नायब सरकार की संवेदनहीनता को उजागर किया। उन्होंने बताया कि प्रदेश में शिक्षकों के 15,451 पद रिक्त पड़े हैं, जिनमें:
PGT: 3,998 पद
TGT/ESHM: 7,707 पद
PRT/मुख्य शिक्षक: 3,746 पद

नूंह (4954 रिक्तियां) और यमुनानगर (1721 रिक्तियां) जैसे जिलों में स्थिति भयावह है। प्रदेश के 298 स्कूलों में कोई नियमित शिक्षक नहीं है, और 1051 स्कूल सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। ऐसे में नए सत्र के दौरान जब दाखिला प्रक्रिया चल रही है, शिक्षकों को फील्ड ड्यूटी पर भेजना सरकार की प्राथमिकता पर बड़े सवाल खड़े करता है।

न किताबें, न शिक्षक क्या यही है 'शिक्षित हरियाणा'?

नया सत्र शुरू हुए काफी समय बीत गया है, लेकिन बच्चों के पास किताबें तक नहीं पहुंची हैं। यमुनानगर से लेकर जींद तक, नौवीं कक्षा तक के छात्र पुरानी किताबों से पढ़ने को मजबूर हैं। अनुराग ढांडा ने सीधा आरोप लगाया कि भाजपा सरकार को शिक्षित समाज से डर लगता है। उन्होंने कहा,एक तरफ शिक्षक नहीं हैं, दूसरी तरफ जो हैं उन्हें भी स्कूलों से दूर किया जा रहा है। ऐसा लगता है कि सरकार चाहती ही नहीं कि प्रदेश का युवा शिक्षित हो।

आत्मसम्मान को ठेस और 'आप' की चेतावनी

शिक्षकों को उनकी मूल जिम्मेदारी से हटाकर जनगणना में लगाना न केवल प्रशासनिक दृष्टि से गलत है, बल्कि यह उनके मनोबल और आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाने वाला कदम है। ढांडा ने इसे सेवा नियमों का उल्लंघन बताया और मांग की कि इस कार्य के लिए संबंधित विभाग के लोगों की ड्यूटी लगाई जाए या नई भर्तियां की जाएं।

Published By : Aarya Pandey

पब्लिश्ड 7 April 2026 at 19:13 IST