अपडेटेड 27 February 2026 at 14:50 IST
क्या योग जिम की जगह ले सकता है? भारत की फिटनेस संस्कृति में छिड़ी बहस
भारत का फिटनेस उद्योग तेजी से बढ़ रहा है। लेकिन इसी बीच योग मैट भी फिर से लोकप्रिय हो रहे हैं।तो सवाल उठता है-क्या योग जिम की जगह ले सकता है?
भारत का फिटनेस उद्योग तेजी से बढ़ रहा है। लग्जरी जिम, बुटीक वर्कआउट स्टूडियो और मैराथन क्लब शहरों में फैल रहे हैं। लेकिन इसी बीच योग मैट भी फिर से लोकप्रिय हो रहे हैं।तो सवाल उठता है-क्या योग जिम की जगह ले सकता है?
जिम संस्कृति
जिम संरचित स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और हाई-इंटेंसिटी वर्कआउट देता है। कई शहरी पेशेवरों के लिए यह अनुशासन और परिवर्तन का प्रतीक है।लेकिन इसमें महंगी मेंबरशिप, उपकरणों पर निर्भरता और कभी-कभी बर्नआउट भी शामिल है।
योग का विकल्प
योग न्यूनतम साधनों से किया जा सकता है। यह लचीलापन, श्वास नियंत्रण, शक्ति और ध्यान को जोड़ता है। समर्थक कहते हैं कि यह मानसिक स्पष्टता और हार्मोनल संतुलन में मदद करता है। स्वामी रामदेव ने योग को केवल आध्यात्मिक अभ्यास नहीं, बल्कि दैनिक फिटनेस के रूप में प्रस्तुत किया।
संतुलन की आवश्यकता
विशेषज्ञ मानते हैं कि योग और जिम दोनों के अपने लाभ हैं। इसलिए बहस “जिम बनाम योग” की नहीं, बल्कि संतुलित जीवनशैली की होनी चाहिए।
Published By : Rupam Kumari
पब्लिश्ड 27 February 2026 at 14:50 IST