ई-20 पर अरविंद केजरीवाल की रिकॉर्ड तोड़ डिजिटल रैली, 7 लाख लोगों ने लाइव देखा टाउनहॉल

आम आदमी पार्टी का दावा है कि यह सिर्फ एक डिजिटल आंकड़ा नहीं, बल्कि ई-20 के खिलाफ देशभर के लोगों की बढ़ती नाराजगी का संकेत है।

 
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ARVIND KEJRIWAL | Image: ANI

देश में ई-20 पेट्रोल को लेकर बहस तेज है और इसी बीच शनिवार को एक ऐसा डिजिटल मुकाबला देखने को मिला, जिसने सोशल मीडिया पर नई चर्चा छेड़ दी। एक तरफ दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में आयोजित अरविंद केजरीवाल का नेशनल टाउनहॉल अगेंस्ट ई-20 था, तो दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लाइव कार्यक्रम। सबसे ज्यादा चर्चा किसी भाषण की नहीं, बल्कि लोगों की मौजूदगी की हुई।

टाउनहॉल के दौरान आम आदमी पार्टी के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर करीब 7 लाख (7,00,262) लोग एक साथ लाइव जुड़े, जबकि उसी समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर करीब 3,324 लोग लाइव दिखाई दिए। सोशल मीडिया पर इसी स्क्रीनशॉट को शेयर करते हुए लोग लिख रहे हैं कि "जनता अब मन की बात नहीं, अपने मन की बात सुनाने वाले नेता को सुन रही है।

आम आदमी पार्टी का दावा है कि यह सिर्फ एक डिजिटल आंकड़ा नहीं, बल्कि ई-20 के खिलाफ देशभर के लोगों की बढ़ती नाराज़गी का संकेत है। पार्टी का कहना है कि लाखों लोगों ने इसलिए टाउनहॉल देखा क्योंकि वहां आम लोगों, मैकेनिकों, प्रोफेसरों, डिलीवरी राइडर्स और वाहन मालिकों की समस्याओं को मंच मिला। लोगों ने माइलेज घटने, इंजन खराब होने, सर्विसिंग खर्च बढ़ने और पुरानी गाड़ियों पर ई-20 के असर जैसे मुद्दे उठाए।

अरविंद केजरीवाल ने सरकार से तीन प्रमुख मांगें रखीं, हर पेट्रोल पंप पर शुद्ध पेट्रोल और ई-20 दोनों का विकल्प, शुद्ध पेट्रोल से ई-20 सस्ता किया जाए और पेट्रोल की कीमत 84 रुपये प्रति लीटर से कम की जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार बिना पर्याप्त सार्वजनिक वैज्ञानिक रिपोर्ट सामने रखे ई-20 को पूरे देश पर थोप रही है और उपभोक्ताओं की चिंताओं को नजरअंदाज कर रही है।

सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में यूज़र्स ने सवाल उठाया कि यदि ई-20 इतना ही लाभकारी है तो लोगों को विकल्प देने में हिचक क्यों है? कई लोगों ने लिखा कि सरकार को जनता के सवालों का जवाब देना चाहिए, न कि आलोचना करने वालों को राष्ट्रविरोधी बताना चाहिए। वहीं समर्थकों का कहना है कि पहली बार किसी बड़े राजनीतिक मंच पर आम वाहन मालिकों की परेशानी राष्ट्रीय बहस का विषय बनी।

आम आदमी पार्टी इसे "दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल रैली" बता रही है और दावा कर रही है कि यह साबित करता है कि अरविंद केजरीवाल सोशल मीडिया पर केवल राजनीतिक भाषण नहीं, बल्कि सीधे जनता के रोजमर्रा के मुद्दों को उठा रहे हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि जब लाखों लोग स्वेच्छा से किसी नीति पर चर्चा सुनने के लिए जुड़ते हैं, तो यह सरकार के लिए चेतावनी है कि जनभावनाओं को अनदेखा करना आसान नहीं होगा।

सोशल मीडिया पर तुलना चर्चा का विषय बनी हुई है। समर्थक इसे जनता के बदलते मूड का संकेत बता रहे हैं, जबकि आलोचक इसे अलग-अलग कार्यक्रमों और दर्शक व्यवहार का परिणाम मान रहे हैं। हालांकि इतना तय है कि 7 लाख बनाम 3 हज़ार का यह आंकड़ा सोशल मीडिया पर ई-20 बहस का सबसे चर्चित प्रतीक बन गया है और विपक्ष इसे भाजपा सरकार की नीतियों के खिलाफ बढ़ते जन असंतोष का प्रमाण बताकर लगातार निशाना बना रहा है।

 

 

Published By : Priyanka Yadav

पब्लिश्ड 3 August 2026 at 14:50 IST