अपडेटेड 15 December 2025 at 14:56 IST
पतंजलि द्वारा सतत कृषि लक्ष्यों की दिशा में एक पहल
पतंजलि की कृषि संबंधी दृष्टि भारत की प्राचीन कृषि परंपराओं और आधुनिक वैज्ञानिक शोध के संतुलन पर आधारित है। इस दिशा में पतंजलि ने सतत कृषि लक्ष्यों को साकार करने हेतु एक व्यापक और प्रभावी पहल की है।
आधुनिक कृषि पद्धतियों के कारण आज कृषि जगत अनेक गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है, जिनमें मिट्टी की उर्वरता में गिरावट, जैव विविधता का ह्रास, रासायनिक उर्वरकों का अत्यधिक उपयोग तथा जलवायु परिवर्तन प्रमुख हैं। भारत जैसे कृषि प्रधान देश में, जहां कृषि आजीविका और खाद्य सुरक्षा का आधार है, सतत कृषि को अपनाना समय की आवश्यकता बन गया है। इस दिशा में पतंजलि ने सतत कृषि लक्ष्यों को साकार करने हेतु एक व्यापक और प्रभावी पहल की है।
पतंजलि की कृषि संबंधी दृष्टि भारत की प्राचीन कृषि परंपराओं और आधुनिक वैज्ञानिक शोध के संतुलन पर आधारित है। संस्था का मानना है कि कृषि का वास्तविक विकास तभी संभव है जब वह पर्यावरण संरक्षण, किसान समृद्धि और उपभोक्ताओं को स्वस्थ भोजन उपलब्ध कराने के उद्देश्य को एक साथ साधे। इसी सोच के तहत पतंजलि ने कई ऐसे कार्यक्रम और प्रयास किए हैं, जो भारतीय कृषि को टिकाऊ और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य कर रहे हैं।
पारंपरिक कृषि पद्धतियों का पुनरुद्धार
पतंजलि की सतत कृषि पहल का एक महत्वपूर्ण स्तंभ पारंपरिक भारतीय कृषि पद्धतियों का पुनरुद्धार है। रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के आगमन से पहले, भारतीय कृषि गोबर खाद, जैविक कम्पोस्ट, फसल चक्र और प्राकृतिक उपायों पर आधारित थी। पतंजलि इन परंपरागत विधियों को आधुनिक जैविक खेती के साथ जोड़कर किसानों तक पहुंचा रहा है।
किसान प्रशिक्षण कार्यक्रमों, जागरूकता शिविरों और खेतों पर प्रदर्शन के माध्यम से पतंजलि प्राकृतिक खादों और जैविक इनपुट्स के उपयोग को बढ़ावा देता है, जिससे मिट्टी की उर्वरता और जैविक गतिविधि में सुधार होता है।
जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा
पतंजलि ने देश के विभिन्न क्षेत्रों में जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। किसानों को बाजार से जोड़कर और उनकी उपज की उचित कीमत सुनिश्चित कर, संस्था ने सतत खेती को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाया है। जैविक उत्पादों की बढ़ती मांग के साथ पतंजलि किसानों को स्थायी कृषि अपनाने के लिए प्रोत्साहित करता है।
मिट्टी स्वास्थ्य और जैव विविधता संरक्षण
स्वस्थ मिट्टी ही टिकाऊ कृषि की नींव है। रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक प्रयोग से मिट्टी की संरचना और उत्पादकता प्रभावित हुई है। पतंजलि जैविक पदार्थों और प्राकृतिक उपायों के माध्यम से मिट्टी के पुनर्जीवन पर विशेष ध्यान देता है।
इसके साथ ही, बहुफसली खेती, देशी बीजों और परागण-अनुकूल पद्धतियों को बढ़ावा देकर जैव विविधता के संरक्षण की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।
किसान सशक्तिकरण
पतंजलि किसानों को सतत खेती के लिए प्रशिक्षित कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने पर जोर देता है। प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और लागत-प्रभावी खेती के उपायों से किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिलती है।
जल संरक्षण और जलवायु अनुकूलता
जल संरक्षण सतत कृषि का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। पतंजलि कुशल सिंचाई पद्धतियों, वर्षा जल संचयन और मिट्टी की जल धारण क्षमता बढ़ाने वाले उपायों को बढ़ावा देता है, जिससे खेती जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति अधिक सहनशील बनती है।
सतत कृषि की ओर एक मजबूत कदम
पतंजलि की यह पहल भारतीय कृषि को पर्यावरण-अनुकूल, उत्पादक और टिकाऊ बनाने की दिशा में एक सशक्त प्रयास है। किसान, उपभोक्ता और प्रकृति। ये तीनों के हित में काम करते हुए पतंजलि सतत कृषि के क्षेत्र में एक आदर्श स्थापित कर रहा है।
Published By : Sujeet Kumar
पब्लिश्ड 15 December 2025 at 14:56 IST