अपडेटेड 16 January 2026 at 16:12 IST
महिलाओं को देवी मत बनाइए, अगर बना भी रहे हैं तो फिर आपका हक नहीं है ये बताना कि हम क्या करें? जया किशोरी ने ऐसा क्यों कहा
जया किशोरी ने मंच पर बताया कि उन्होंने मोटिवेशन स्पीकिंग कब और क्यों शुरू की। साथ ही बताया कि व्यास पीठ पर महिलाओं का बैठना सही है या नहीं।
Jaya Kishori in Republic Bharat Sangam 2026: रिपब्लिक भारत के 'साहित्य, सुर और शक्ति का संगम' में कथावाचक और मोटिवेशनल स्पीकर जया किशोरी ने शिरकत की। इस दौरान उन्होंने कई मुद्दों पर अपनी बात रखी। साथ ही एक बार फिर स्पष्ट किया कि मैं संत, साधु और साध्वी नहीं हूं।
जया किशोरी ने मंच पर बताया कि उन्होंने मोटिवेशन स्पीकिंग कब और क्यों शुरू की। साथ ही बताया कि व्यास पीठ पर महिलाओं का बैठना सही है या नहीं।
मैं संत, साधु और साध्वी नहीं- जया किशोरी
कथावाचक से मोटिवेशनल स्पीकर की जर्नी कैसे चुनी? इस सवाल के जवाब में जयाकिशोरी ने कहा, 'मैंने अपनी जिंदगी के पहले इंटरव्यू में स्पष्ट कर दिया था कि मैं संत, साधु और साध्वी नहीं हूं। जब मैं हूं ही नहीं तो वैसा जीवन कैसे जी सकती हूं। दूसरा ये कि बचपन में मेरे पिता ने मुझे सीख दी थी कि बहता पानी निर्मल है। यानी पानी जब तक बहता रहता है, साफ रहता है। अगर वो एक जगह काफी समय तक रुक गया तो उसमें गंदगी जमा हो जाती है। ऐसे में कभी भी रुकना नहीं है। बहते रहना और कुछ न कुछ नया करते रहता है। तो मुझे लगता है कि मैं जीवन में कभी भी किसी एक कार्य में रुकना नहीं चाहती।'
हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसा नहीं है कि अगर वो कुछ नया करेंगी तो पहले को छोड़ देंगी। उन्होंने कहा मैं कथाएं अभी भी करती हूं। कथाएं सात दिन की होती है और मोटिवेशन एक दिन का होता है। अभी भी बोलबाला कथा का ही ज्यादा है।
मोटिवेशन स्पीकिंग कब और क्यों की शुरू?
मोटिवेशन स्पीकिंग पर जयाकिशोरी ने कहा, 'मैंने मोटिवेशन स्पीकिंग तब शुरू कि जब मैंने देखा कि यूथ बहुत आ रहे हैं। मैं बहुत भाग्यशाली हूं, भगवान की कृपा है कि 80 प्रतिशत युवा बैठते हैं। लेकिन युवाओं की शिकायत होती थी कि वो सात दिन नहीं बैठ सकते हैं जो कि जायज भी है। अगर सातों दिन आएंगे तो क्लास, कॉलेज वैगरह छूट जाएंगे। उन्होंने हमसे कहा कि हमें आपकी बातें अच्छी लगती हैं और रिलेटेबल लगती हैं। तब मुझे समय आया कि एक कथा के अलावा युवाओं से जुड़ने का एक और तरीका भी हो सकता है। कथाओं को सारांश के तौर पर एक वीडियो में पिरोकर मोटिवेशन सेशन के जरिये जुड़ सकती हूं। मैंने सोचा कि मोटिवेशन सेशन के क्षेत्र में भी जाऊं। मुझे ऐसा लगता है कि आध्यात्मिक व्यक्ति वो नहीं होता जो संसार त्याग चुका हो, बल्कि वो होता है जो संसार में रहकर भगवान को जोड़ चुका हो।'
व्यास पीठ पर महिलाओं का बैठना सही या नहीं?
व्यास पीठ पर महिलाओं का बैठना सही या गलत? इस पर जया किशोरी ने कहा, 'हमें ये नहीं सुनना चाहिए जब लोग कहते हैं कि महिला देवी स्वरूप है। हमें ऐसा स्थान मत दीजिए, साधारण मनुष्य समझिए। क्योंकि हमारी भी इच्छाएं हैं, हम भी गलती करते हैं। लेकिन लोगों का कहना है कि आजकल महिलाओं की आजादी देखकर पता चलता है कि उन्हें पहले क्यों आजादी नहीं दी गई। मतलब हम (महिलाएं) गलत करें तो आप आजादी छीन लेंगे, आप गलत करें तो बोलेंगे- अरे वो तो लड़का है, र सकता है, लड़के तो होते ही ऐसे हैं। ये दोहरी मानसिकता मुझे समझ नहीं आती। मुझे लगता है जो भी गलत कर रहा है उससे बात करें और उससे शिकायत करें, उस व्यक्ति को गलत कहें, लेकिन उससे उसका इंसान होना छीन लेना, उसका हक छीन लेना, उसका अवसर छीन लेना ये मुझे गलत लगता है। और अगर आप देवी बना भी रहे हैं, मैं कहती हूं मत बनाइए हमें इंसान ही रहने दीजिए और इंसानों की तरह ही ट्रीट करें, लेकिन अगर देवी बना रहे हैं, और हमें देवी बना दिया है तो फिर आपका बिल्कुल हक नहीं बनता देवी को बताना कि उसे करना क्या है। देवी देख लेगी कि उसे क्या करना है, आप मत समझाएं। तो या तो देवी मत बनाओ, और अगर बनाते हैं तो उसे अपने मन की करने दे।'
'संगम' को कामयाब बनाने में कई स्पॉन्सर आगे आए हैं, जिसके लिए हम उन्हें धन्यवाद देते हैं।
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Published By : Priyanka Yadav
पब्लिश्ड 16 January 2026 at 16:12 IST