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Suvendu Adhikari: पिता केंद्रीय मंत्री, कांग्रेस से सियासी करियर की शुरुआत... कौन हैं सुवेंदु अधिकारी? जो बनेंगे बंगाल के नए मुख्यमंत्री

बंगाल में BJP का पहला मुख्यमंत्री बनने जा रहे है। ऐसे में आईए जानते हैं कि कौन हैं सुवेंदु अधिकारी? जो बनेंगे बंगाल के नए मुख्यमंत्री, कभी ममता बनर्जी के थे बेहद करीबी

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कौन हैं सुवेंदु अधिकारी? | Image: Social Media

सुवेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल के अगले मुख्यमंत्री होंगे। आज, 8 मई को कोलकाता में हुई बैठक में उन्हें विधायक दल का नेता चुना गया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उनके नाम का ऐलान किया। पश्चिम बंगाल में 15 साल बाद सत्ता परिवर्तन होने जा रहा है। विधानसभा चुनाव 2026 में BJP ने दो-तिहाई बहुमत के साथ ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। वहीं, बंगाल की सत्ता पर दशकों से ज्यादा समय तक राज करने वाली TMC मात्र 80 सीटों पर सिमट गई। बीजेपी ने TMC का जैसे सूपड़ा साफ किया, ममता बनर्जी ने इसकी कभी कल्पना भी नहीं होगी। अब बंगाल में BJP का पहला मुख्यमंत्री बनने जा रहे है। ऐसे में आईए जानते हैं कि कौन हैं सुवेंदु अधिकारी? जो बनेंगे बंगाल के नए और BJP के पहले मुख्यमंत्री

बंगाल की राजनीति में कुछ नाम ऐसे होते हैं जो समय के साथ इबारत बदल देते हैं। सुवेंदु अधिकारी उनमें से एक हैं। जो कभी ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद सिपाही में से एक थे, उनके बेहद करीबी माने जाते थे। वही आज उनके सबसे कट्टर विरोधी बन चुके हैं। नंदीग्राम की धूल से शुरू हुई उनकी कहानी अब कोलकाता के सत्ता गलियारों तक पहुंच चुकी है, जहां लोग उन्हें बंगाल के अगले मुख्यमंत्री के रूप में देख रहे हैं।

नंदीग्राम से लेकर भवानीपुर तक की जंग

जो साल 2021 में लगभग नामुमकिन लग रहा था, वह पांच साल बाद एक जोरदार बहस का विषय बन गया। क्या सुवेंदु अधिकारी ममता को उनके अपने गढ़ भवानीपुर में कोई हरा सकते हैं? 2026 में इस सवाल का जवाब मिल गया। 2021 के नंदीग्राम चुनाव में भी रोमांचक टक्कर देखने को मिला था। ममता ने अपने ही पुराने करीबी साथी को चुनौती दी थी। सुवेंदु के गढ़ नंदीग्राम में जाकर उन्हें चुनौती देना ममता को भारी पड़ा गया, क्योंकि BJP नेता ने उन्हें 1900 से ज्यादा वोटों से हरा दिया। यह ममता बनाम सुवेंदु के बीच पहली लड़ाई थी। 2026 में दूसरा दौर और भी ज्यादा रोमांचक रहा, क्योंकि इस बार सुवेंदु ने ममता के गढ़, भवानीपुर में जाकर उन्हें चुनौती दी और मात भी दिया।

कौन हैं सुवेंदु अधिकारी? 

15 दिसंबर 1970 को पूर्वी मेदिनीपुर में जन्मे सुवेंदु को राजनीति विरासत में मिली थी। उनके पिता शिशिर अधिकारी मनमोहन सिंह सरकार में केंद्रीय राज्यमंत्री रह चुके थे। अधिकारी परिवार दशकों से मेदिनीपुर की राजनीति पर अपनी पकड़ बनाए हुए था। शिशिर अधिकारी, पश्चिम बंगाल विधानसभा और लोकसभा दोनों में सदस्य रहे थे, जबकि उनके भाई दिब्येंदु अधिकारी 2024 में BJP में शामिल होने से पहले तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद थे।

सुवेंदु अधिकारी ने कितनी की है पढ़ाई

पढ़ाई के प्रति गहरी लगन रखने वाले सुवेंदु ने कांथी मॉडल स्कूल से हायर सेकेंडरी की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद कांथी के पी.के. कॉलेज से स्नातक किया और रवींद्र भारती विश्वविद्यालय में भी समय बिताया। राजनीति की भागदौड़ के बीच उन्होंने नेताजी सुभाष ओपन यूनिवर्सिटी (NSOU) से मास्टर डिग्री भी हासिल की। सुवेंदु ने अपनी राजनीतिक यात्रा 1995 के नगरपालिका चुनावों के दौरान कांग्रेस के साथ शुरू की और फिर 1998 में अपने पिता के साथ मिलकर नई बनी पार्टी TMC में शामिल हो गए।

1989 में छात्र राजनीति से एंट्री करने वाले सुवेंदु ने कांग्रेस की छात्र इकाई से सफर शुरू किया। 1995 में कांथी नगर पालिका के पार्षद बनकर उन्होंने चुनावी मैदान में कदम रखा। जब 1998 में ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस का गठन किया, तो सुवेंदु बिना देर किए उसमें शामिल हो गए। 2006 में कांथी दक्षिण सीट से पहली बार विधायक चुने गए और उसी साल कांथी नगरपालिका के अध्यक्ष भी बनाए गए। लेकिन असली मोड़ आया नंदीग्राम से।

नंदीग्राम से शुरू हुआ था जंग

तृणमूल कांग्रेस को सत्ता दिलाने वाला सबसे बड़ा आंदोलन नंदीग्राम का था। राज्य सरकार केमिकल हब बनाने के नाम पर किसानों की जमीन छीनना चाहती थी। सुवेंदु अधिकारी ने किसानों के बीच खड़े होकर 'भूमि उच्छेद प्रतिरोध कमेटी' (BUPC) बनाई। उन्होंने आंदोलन को इतना मजबूत किया कि पूरा बंगाल हिल गया। यह वही सुवेंदु थे जिन्होंने बाद में उसी नंदीग्राम से ममता बनर्जी को दो बार चुनावी शिकस्त दी। 2011 में TMC की भारी जीत के बाद सुवेंदु पार्टी में केंद्रीय भूमिका में आ गए। 2009 और 2014 में तमलुक लोकसभा सीट पर लगातार जीत हासिल की यहां तक कि 2014 की मोदी लहर में भी उनकी सीट नहीं छूट सकी।

ममता सरकार में नंबर दो की रखती थी हैसियत 

विधानसभा चुनाव 2016 में नंदीग्राम से जीतकर सुवेंदु परिवहन मंत्री बने और सरकार में नंबर दो की हैसियत हासिल कर ली। अब तक सुवेंदु ममता के दाहिना हाथ बन चुके थे और सरकार के सबसे प्रभावशाली चेहरे में शुमार हो गए थे। मगर सुवेंदु का भविष्य कही और लिखा था।  2019 के लोकसभा चुनावों में TMC की हार के बाद चीजें बदलनी शुरू हुई। प्रशांत किशोर की एंट्री और ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी का बढ़ता वर्चस्व सुवेंदु को रास नहीं आया।

2021 में चुनाव से पहले BJP का थामा था दामन

सुवेंदु अधिकार ने महसूस किया कि उनकी मेहनत और जमीनी ताकत को नजरअंदाज किया जा रहा है। दिसंबर 2020 में सुवेंदु ने TMC छोड़ दी और 2021 के चुनाव से ठीक पहले भाजपा में शामिल हो गए। फिर वही नंदीग्राम,  जहां उन्होंने खुद ममता बनर्जी को हराकर इतिहास रच दिया। बाद में भवानीपुर उपचुनाव में भी उन्होंने ममता को INDIRECT रूप से चुनौती दी। जिस नंदीग्राम ने उन्हें ममता का सबसे बड़ा हितैषी बनाया, उसी नंदीग्राम ने उन्हें उनका सबसे बड़ा विरोधी भी बना दिया।

बंगाल में BJP का पहले मुख्यमंत्री

आज के समय में सुवेंदु अधिकारी बंगाल भाजपा के सबसे मजबूत चेहरे हैं। जमीनी स्तर पर गहरी पकड़, संगठनात्मक क्षमता, विरोधी को घेरने की रणनीति और पढ़े-लिखे नेता का छवि। इन सबके साथ वे बंगाल की बदलती राजनीति के सबसे बड़े प्रतीक बन चुके हैं और अब बंगाल में बीजेपी के पहले मुख्यमंत्री बनने जा रहे हैं। 9 मई को सुवेंदु अधिकार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के साथ इतिहास रच देंगे।

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Published By : Rupam Kumari

पब्लिश्ड 8 May 2026 at 22:03 IST