'विश्व में कहीं संकट आया भारत ने सहायता की, यही देश का DNA, अपने चरित्र के कारण ही विश्वगुरु बना', टोरंटो में बोले RSS प्रमुख मोहन भागवत

RSS प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने कनाडा के टोरंटो में कहा कि जब भी विश्व में कहीं संकट आया और भारत से सहायता माँगी गई, भारत ने कभी मना नहीं किया। बल्कि बिना मदद के लिए पुकार किए भी वह सहायता करता है। यही परंपरा है यही भारत का डीएनए है।”

 
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mohan bhagwat torento canada | Image: RSS

RSS प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने कनाडा के टोरंटो में ‘हिंदू विश्व बंधु – एम्ब्रेस द वर्ल्ड इन फ्रेंडशिप’ (हिंदू विश्व बंधु: मैत्री में विश्व को अपनाएँ) कार्यक्रम को संबोधित किया। इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि जब भी विश्व में कहीं संकट आया और भारत से सहायता माँगी गई, भारत ने कभी मना नहीं किया। बल्कि बिना मदद के लिए पुकार किए भी वह सहायता करता है। यही परंपरा है यही भारत का डीएनए है।”

बता दें कि यह कार्यक्रम कॉर्ड (सीएचओआरडी—कनाडियन हिंदूज़ फॉर आउटरीच रिलेशंस एंड डायलॉग) द्वारा आयोजित किया गया था। कनाडा के सभी 10 प्रांतों से 175 मेजबान संगठनों के 2,000 से अधिक प्रतिनिधियों ने इस सम्मेलन में भाग लिया।

सभी धर्मों के लोगों को शांतिपूर्ण आश्रय मिला 

मोहन भागवत ने कहा कि मुस्लिम, ईसाई, यहूदी और पारसी समुदायों ने ऐतिहासिक रूप से भारत में बिना उत्पीड़न के भय के शांतिपूर्ण आश्रय पाया है। उन्होंने कुछ उदाहरण देते हुए कहा, “द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान पोलैंड के निवासी, जिनमें से अनेक शरणार्थी बन गए थे, समुद्र पार करके भारत आए। उस समय भारत स्वतंत्र नहीं था। उस समय भारत में ब्रिटिश शासन था और उन्होंने शरण देने से इनकार कर दिया। उस समय जामनगर एक रियासत था। जामनगर के राजकुमार ने उन्हें बुलाया और कहा, ‘यहाँ आइए, यहाँ बस जाइए। जब तक आपका देश फिर से आपके लिए स्वतंत्र नहीं हो जाता और आप यहाँ से जाने के लिए स्वतंत्र नहीं होते, तब तक मैं आपकी रक्षा करूँगा।’ और यह चलता आ रहा है।”

सरसंघचालक ने आगे कहा, “कुछ वर्ष पहले जब मध्य-पूर्व में युद्ध हुआ और लोग वहाँ फँस गए थे, तब भारत के सैन्य विमान वहाँ गए और लोगों को बचाकर लाए। केवल भारतीय ही नहीं, बल्कि सात देशों के नागरिकों को वहाँ से बचाया गया। जब भी विश्व में कहीं संकट आया और भारत से सहायता माँगी गई, भारत ने कभी मना नहीं किया। बल्कि बिना मदद के लिए पुकार किए भी वह सहायता करता है। यही परंपरा है। यही भारत का डीएनए (मूल स्वभाव) है।”

भारत की परंपरा को बताया 

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक ने कहा, “हमारी भारत की परंपरा हमें केवल यूनिटी इन डायवर्सिटी (विविधता में एकता) ही नहीं बताती, बल्कि डायवर्सिटीज ऑफ यूनिटी (एकता की विविधताएँ) भी बताती है। सभी विविधताएँ एकता की अभिव्यक्ति हैं।”
उन्होंने कहा, “इसलिए हम, जिन्हें इस पृथ्वी पर कुछ वर्षों तक जीना है, ऊबना नहीं चाहिए। हमें इस विविधता की सेवा करनी है, इसे स्वीकार करना है, इसका सम्मान करना है, क्योंकि यह एकता की अभिव्यक्ति है। यह इसे सुंदर बनाती है। यह इसकी शोभा है। हम इसका उत्सव मनाते हैं। हम हमेशा एकता को देखते हैं।”

अपने चरित्र के कारण भारत विश्वगुरु बना, महाशक्ति नहीं

डॉ. मोहन भागवत ने कहा, “जब भारत बड़ा बना वह कभी सुपरपावर (विश्व महाशक्ति) नहीं बना। वह एक गौरवशाली देश बना। हाँ, कोई उस समय के भारत को महाशक्ति कह सकता है। किन्तु वह महाशक्ति नहीं था। वह एक गौरवशाली देश था। जब भारत बड़ा बना, तब उसने विश्व की सेवा की।” उन्होंने कहा, “अपने चरित्र के कारण वह विश्वगुरु बना, महाशक्ति नहीं। इसलिए भारत का उदय अर्थात् अधिक एकजुट, अधिक मुक्त मानवता।” RSS प्रमुख ने ने कहा कि भारत ने यह कार्य बहुत पहले किया था, जब न सड़कें थीं, न नावें, न हवाई जहाज, न मोटर वाहन, केवल बैलगाड़ियाँ और घोड़े थे। 

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Published By : Kritarth Sardana

पब्लिश्ड 31 August 2026 at 22:27 IST