ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में PM मोदी और राष्ट्रपति जिनपिंग की मुलाकात पर चीनी मीडिया ने क्या कहा?
ग्लोबल टाइम्स के अनुसार, शी जिनपिंग और नरेंद्र मोदी की लगातार तीसरे साल हुई मुलाकात से भारत-चीन संबंध विश्वास के एक नए दौर में प्रवेश कर चुके हैं। विशेषज्ञ वांग शू ने इस बैठक को दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम बताया है।
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ब्रिक्ससंगठन इस समय पूरी दुनिया का मुख्य केंद्र बना हुआ है। अमेरिका से लेकर यूरोपीय देशों के प्रमुख अखबारों में इसे लेकर विभिन्न प्रकार की समीक्षाएं और रिपोर्ट सामने आ रही हैं। चीन के प्रतिष्ठित सरकारी अखबार 'ग्लोबल टाइम्स' की एक रिपोर्ट के अनुसार, नई दिल्ली में आयोजित हुआ ब्रिक्स शिखर सम्मेलन उच्च गुणवत्ता वाले और अत्यधिक व्यापक सहयोग की दिशा तय करने में पूरी तरह सफल रहा है।
मोदी और जिनपिंग की ऐतिहासिक द्विपक्षीय बैठक
इस सम्मेलन से इतर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई उच्चस्तरीय बैठक ने दोनों देशों के कूटनीतिक रिश्तों को एक नए मुकाम पर पहुंचा दिया है। यह लगातार तीसरा वर्ष है जब भारत और चीन के शीर्ष नेताओं के बीच आमने-सामने की बातचीत हुई है। इससे पहले वर्ष 2024 में कजान और वर्ष 2025 में तियानजिन में दोनों नेताओं की महत्वपूर्ण बैठकें संपन्न हुई थीं। यह निरंतर संवाद दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में आ रही स्थिरता को साफ तौर पर दर्शाता है।
पेकिंग यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर साउथ एशियन स्टडीज के कार्यकारी उप निदेशक वांग शू के अनुसार, कजान बैठक को द्विपक्षीय संबंधों में एक निर्णायक मोड़ कहा जा सकता है, जबकि तियानजिन बैठक ने आपसी रिश्तों को दोबारा पटरी पर लाने में अहम भूमिका निभाई थी। अब नई दिल्ली में हुई इस ताज़ा मुलाकात को 'विश्वास निर्माण के नए चरण' के रूप में देखा जाना चाहिए। इसका मुख्य उद्देश्य रणनीतिक सहमति को ज़मीनी और ठोस परिणामों में बदलना है।
सीमा प्रबंधन से लेकर सीधी उड़ानों की बहाली
दोनों देशों के बीच हाल के समय में कई सकारात्मक बदलाव देखने को मिले हैं। सीमा प्रबंधन को लेकर हुए समझौते, सीमावर्ती व्यापार की फिर से बहाली, दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानों का दोबारा शुरू होना और नागरिकों के बीच आपसी संपर्क का बढ़ना इस बात का पुख्ता प्रमाण है कि रिश्ते सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि दो विशाल राष्ट्रों के बीच राजनीतिक विश्वास केवल कागजी दावों से नहीं, बल्कि जमीनी और ठोस कदमों से ही मजबूत होता है। भविष्य में संबंधों को और अधिक प्रगाढ़ बनाने के लिए सीमा विवाद के प्रबंधन हेतु संस्थागत तंत्र को मजबूत करना, व्यावहारिक आदान-प्रदान का दायरा बढ़ाना, व्यापार में सुरक्षा के अति-केंद्रित रवैये से बचना और बहुपक्षीय मंचों पर आपसी समन्वय को गहरा करना बेहद आवश्यक है।
वैश्विक मंचों पर भारत और चीन का सहयोग
ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि वैश्विक शासन प्रणाली में सुधार, जलवायु परिवर्तन और विकास वित्तपोषण जैसे तमाम ज्वलंत मुद्दों पर भारत और चीन के पास ब्रिक्स (BRICS), शंघाई सहयोग संगठन (SCO) और जी-20 (G20) जैसे वैश्विक मंचों के माध्यम से एक साथ मिलकर काम करने की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। विशेषज्ञों का दृढ़ मत है कि दोनों देश जितने अधिक क्षेत्रों में मिलकर सहयोग करेंगे, उनके आपसी मतभेदों का प्रभाव उतना ही कम होता जाएगा। यह आपसी सहयोग न केवल द्विपक्षीय रिश्तों को और अधिक मजबूत और स्थिर बनाएगा, बल्कि संपूर्ण विश्व में शांति और स्थिरता कायम करने में भी अपनी अहम भूमिका निभाएगा।
Published By : Aarya Pandey
पब्लिश्ड 13 September 2026 at 10:07 IST