अपडेटेड 18 January 2026 at 13:08 IST
CM योगी के लिए उत्तराखंड से आई स्पेशल कुर्सी, देवदार की लकड़ी पर हाथ की नक्काशी, हत्थों पर उकेरी है सिंह की आकृति, बनने में लगी 15 दिनों की मेहनत
उत्तराखंड की देवदार लकड़ी से बनी विशेष कुर्सी योगी आदित्यनाथ को कर्नल अजय कोठियाल ने भेंट की है। केदारनाथ पुनर्निर्माण से बची लकड़ी से तैयार यह कुर्सी सिंह आकृति, उत्तराखंडी नक्काशी और भगवा रंग वाली है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और गोरखनाथ मंदिर के महंत योगी आदित्यनाथ का उत्तराखंड से गहरा नाता है। उत्तराखंड सरकार में राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और सेवानिवृत्त कर्नल अजय कोठियाल ने उन्हें केदारनाथ पुनर्निर्माण से बची पवित्र देवदार की लकड़ी से तैयार की गई एक अनूठी कुर्सी भेंट की है। यह कुर्सी मकर संक्रांति (15 जनवरी) के पावन अवसर पर गोरखपुर जाकर सौंपी गई।
कर्नल अजय कोठियाल, 2013 की केदारनाथ आपदा के बाद धाम के पुनर्निर्माण प्रोजेक्ट के प्रमुख चेहरा रहे हैं। उन्होंने बताया कि पुनर्निर्माण के दौरान बड़ी मात्रा में देवदार की लकड़ी का उपयोग हुआ था। कुछ लकड़ी बच गई थी, तो उन्होंने सोचा कि इस पवित्र लकड़ी का उपयोग किसी आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व की वस्तु में किया जाए। इसी विचार से योगी आदित्यनाथ के लिए यह विशेष कुर्सी तैयार की गई।
कुर्सी के निर्माण में उत्तराखंड के पारंपरिक मंदिर वास्तुकला का पूरा ध्यान रखा गया। आर्किटेक्ट कृष्ण कुडियाल ने उत्तराखंड के अलग-अलग मंदिरों का अध्ययन कर डिजाइन तैयार किया। मुख्य रूप से महासू मंदिर की काष्ठ कला को इसमें समाहित किया गया है। चकराता के निकट कोटा गांव के पारंपरिक काष्ठ कारीगरों ने लगभग 15 दिनों की कड़ी मेहनत से इस खास कुर्सी को तैयार किया है।
कुर्सी की खासियतें
इसके दोनों हत्थों पर सिंह की आकृति उकेरी गई है, जो शक्ति और साहस का प्रतीक है। पीछे की तरफ उत्तराखंड के प्राचीन मंदिरों वाली पारंपरिक नक्काशी की गई है। गद्दी पर भगवा रंग का उपयोग किया गया है, जो योगी आदित्यनाथ का प्रिय रंग है। देवदार की लकड़ी होने के कारण कुर्सी से प्राकृतिक सौंधी सुगंध निकलती है। योगी आदित्यनाथ को यह कुर्सी गोरक्षपीठ के महंत के रूप में भेंट की गई। उन्हें यह उपहार इतना पसंद आया कि उन्होंने इसे गोरखनाथ मंदिर के मुख्य सभागार में रख दिया।
कुर्सी पर शानदार हाथ की नक्काशी है। बहुत ही बारीक और भारी भरकम हैंड-क्राफ्टेड कार्विंग से फूल, पत्तिया, अलंकृत पैटर्न और सबसे ऊपर महलनुमा शिखर जैसा डिजाइन है। दोनों आर्मरेस्ट के सिरे पर शेर के मुंह बने हुए हैं। यह शक्ति, राजसी अंदाज और नेतृत्व का प्रतीक है।
योगी आदित्यनाथ का उत्तराखंड कनेक्शन
योगी आदित्यनाथ मूल रूप से उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के यमकेश्वर ब्लॉक के पंचूर गांव के हैं। उनका जन्म 5 जून, 1972 को हुआ था। उत्तराखंड से उनका यह गहरा लगाव इस भेंट से और भी स्पष्ट हो गया है।
यह उपहार न केवल कारीगरी और आस्था का प्रतीक है, बल्कि उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के बीच सांस्कृतिक और सामाजिक ताने-बाने को भी मजबूत करता है।
Published By : Sagar Singh
पब्लिश्ड 18 January 2026 at 11:54 IST